आजम खान की यूनिवर्सिटी का मामला, अवैध भवनों पर ध्वस्तीकरण की तलवार; RDA ने इलाहाबाद HC में दाखिल की कैविएट



नई दिल्ली:

समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और यूपी के पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान के ड्रीम प्रोजेक्ट मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की मुश्किलें जहां लगातार बढ़ती जा रही है वहीं रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने यूनिवर्सिटी परिसर में बिना स्वीकृत मैप के बनाए गए 38 भवनों को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है. RDA ने जौहर यूनिवर्सिटी के इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचने से पहले ही इस मामले में कानूनी रूप से खुद को मजबूत करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक कैविएट एप्लीकेशन दाखिल कर दी है. इस कानूनी कदम के बाद अब जौहर यूनिवर्सिटी प्रबंधन के लिए हाईकोर्ट से एकपक्षीय राहत या स्टे ऑर्डर हासिल करना बेहद मुश्किल हो हो सकता है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट में कैविएट दाखिल करने का सीधा मतलब यह है कि यदि विश्वविद्यालय प्रबंधन ध्वस्तीकरण नोटिस के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर कर किसी भी तरह के स्टे या राहत की मांग करता है तो अदालत बिना रामपुर विकास प्राधिकरण का पक्ष सुने कोई भी आदेश या स्थगनादेश जारी नहीं करेगी. RDA के अधिवक्ता डीएस चौहान ने एनडीटीवी से बात करते हुए स्पष्ट किया है कि जौहर यूनिवर्सिटी पक्ष अगर हाईकोर्ट जाता है तो कोई भी निर्णय लेने से पहले कोर्ट हमारी बात को विस्तार से सुनेगा और उसके बाद ही कोई फैसला लेगा.

बता दें कि RDA ने मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट यूनिवर्सिटी के परिसर में किए गए कथित अवैध निर्माण के खिलाफ ध्वस्तीकरण आदेश पर संभावित कानूनी चुनौती को देखते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में ये कैविएट एप्लीकेशन दाखिल की है. एनडीटीवी के पास मौजूद कैविएट कॉपी में ये कहा गया है कि 20 दिनों के अंदर अवैध निर्माण हटाने का नोटिस यूनिवर्सिटी को दिया गया है.

रामपुर विकास प्राधिकरण ने 15 जुलाई, 2026 को उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा 27(1) के तहत आदेश पारित किया है. इस आदेश के अनुसार मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट (यूनिवर्सिटी), ग्राम सींगन खेड़ा, जिला रामपुर में बिना स्वीकृत नक्शे के किए गए अनधिकृत और अवैध निर्माणों को 20 दिनों के अंदर स्वतः हटाने का निर्देश दिया गया है. आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि यदि जौहर ट्रस्ट तय 20 दिनों की समय-सीमा के भीतर इस अवैध निर्माण को खुद नहीं हटाता है तो रामपुर विकास प्राधिकरण इसे अपने स्तर पर ध्वस्त कर देगा और ध्वस्तीकरण कार्रवाई की पूरी लागत का खर्च भी डेवलपर (जौहर ट्रस्ट) से ही वसूला जाएगा.

दाखिल कैविएट के माध्यम से कहा गया है कि RDA को पूर्ण विश्वास और अंदेशा है कि इस ध्वस्तीकरण आदेश की वैधता और वैधानिकता को चुनौती देते हुए जौहर ट्रस्ट और उसके रजिस्ट्रार जल्द ही इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सकते है. प्राधिकरण की मांग है कि चूंकि ये अनधिकृत निर्माण रामपुर विकास प्राधिकरण के विकास क्षेत्र के अंतर्गत आते है इसलिए RDA इस मामले में एक मुख्य और आवश्यक पक्षकार (Interested Party) है. इसलिए न्याय के सिद्धांत के तहत कोई भी अंतरिम राहत या स्टे ऑर्डर पारित करने से पहले RDA के अधिवक्ताओं को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया जाना चाहिए. ये याचिका आरडीए के अधिवक्ता डीएस चौहान की तरफ से दायर की गई है. माना जा रहा है कि अब जौहर यूनिवर्सिटी जल्द ही किसी भी तरह की राहत पाने के लिए ध्वस्तीकरण कार्यवाही से पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख करेगी. 

बता दें कि 15 जुलाई को रामपुर के जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी के समक्ष हुई सुनवाई में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए है. जिला पंचायत रामपुर से प्राप्त आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार पूरे विश्वविद्यालय परिसर में बनी कुल 40 इमारतों में से केवल दो भवनों का नक्शा ही तत्कालीन जिला पंचायत से नियमानुसार स्वीकृत कराया गया था. इसमें केवल मेडिकल कॉलेज और एकेडमिक ब्लॉक का नक्शा ही वैध पाया गया है. इनके अलावा बाकी के 38 भवन जो लगभग 82,309.80 वर्ग मीटर के विशाल क्षेत्र में फैले है बिना किसी स्वीकृत मानचित्र के अवैध रूप से खड़े किए गए है.
इस मामले में विश्वविद्यालय प्रबंधन ने अपनी दलील में कहा था कि जब इन भवनों का निर्माण कराया गया था तब रामपुर विकास प्राधिकरण अस्तित्व में नहीं था इसलिए नक्शा पास नहीं कराया जा सका. इस दलील को खारिज करते हुए जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि आरडीए के गठन से पहले वह क्षेत्र जिला पंचायत के 

क्षेत्राधिकार में आता था और वहां निर्माण के लिए जिला पंचायत से नक्शा स्वीकृत कराना अनिवार्य था. चूंकि दो भवनों का नक्शा जिला पंचायत से पास कराया गया था इसलिए यह साफ है कि प्रबंधन नियमों से पूरी तरह वाकिफ था. शेष 38 भवनों के लिए अनुमति न लेना सीधे तौर पर नियमों की खुली अनदेखी है. पूरी कानूनी कार्रवाई के घटनाक्रम को देखें तो आरडीए ने क्षेत्रीय अवर अभियंता की रिपोर्ट के आधार पर 28 जून 2026 को यूनिवर्सिटी प्रबंधन को नोटिस दिया था.इसके अगले ही दिन यानी 29 जून 2026 को ट्रस्ट के सचिव को भी नोटिस देकर पक्ष रखने का मौका दिया गया था. इसके बाद 8 जुलाई 2026 को प्रबंधन ने संयुक्त रूप से अपना लिखित पक्ष रखा जिसके बाद 15 जुलाई 2026 को अंतिम सुनवाई की तारीख तय की गई थी. बुधवार को हुई इस सुनवाई में जिलाधिकारी ने प्रबंधन के सभी दावों और दलीलों को पूरी तरह खारिज कर दिया.

अब इस मामले में जिलाधिकारी ने विश्वविद्यालय प्रबंधन को स्पष्ट आदेश जारी करते हुए नियमों के तहत 20 दिन का समय दिया है ताकि वो इस अवधि में खुद ही इन 38 अवैध भवनों के अतिक्रमण को हटा लें. यदि तय समय सीमा के अंदर प्रबंधन द्वारा इन अवैध निर्माणों को नहीं हटाया गया तो रामपुर विकास प्राधिकरण खुद बुलडोजर चलाकर इन्हें ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू कर देगा. इसके अलावा लोक निर्माण विभाग ने भी विश्वविद्यालय के अंदर सरकारी धन से बनी लगभग 13.5 करोड़ रुपये की फोरलेन सड़क के गेट पर सरकारी बोर्ड लगाकर उसे ‘आम रास्ता’ घोषित कर दिया है. जमीन अधिग्रहण में अनियमितताओं और ईडी की जांच का सामना कर रहा जौहर ट्रस्ट अब पूरी तरह से चौतरफा कानूनी शिकंजे में घिर चुका है. फिलहाल अगर जौहर यूनिवर्सिटी ध्वस्तीकरण कार्यवाही के नोटिस को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती देता है तो अब आरडीए को भी इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखने का पूरा मौका मिलेगा.





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