दिल्ली में MCD का बड़ा एक्शन: 2 दिन में 80 अवैध निर्माण ध्वस्त, 24 संपत्तियां सील
Raisina News Desk- सितंबर 15, 2026 11:24 PM IST

दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने खतरनाक इमारतों, अनधिकृत निर्माणों और दिल्ली के मास्टर प्लान (एमपीडी) और भवन उपविधियों के उल्लंघन के खिलाफ अपने शहरव्यापी प्रवर्तन अभियान को और तेज कर दिया है. भवन मानदंडों का अनुपालन सुनिश्चित करने और जनसुरक्षा की रक्षा के लिए निगम के सभी 12 जोनों में सख्त प्रवर्तन कार्रवाई की जा रही है.
आज चलाए गए गहन प्रवर्तन अभियान के तहत एमसीडी के सभी 12 जोनों में 40 विध्वंस कार्रवाई की गईं. इसके अलावा, 16 संपत्तियों को सील किया गया, जबकि लागू भवन मानदंडों और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर 4 विध्वंस आदेश पारित किए गए.
एमसीडी ने कल भी व्यापक प्रवर्तन अभियान चलाया था, जिसके दौरान दिल्ली के मास्टर प्लान और भवन उपविधियों के उल्लंघन के मामले में 40 संपत्तियों को ध्वस्त किया गया और 8 अन्य संपत्तियों को सील किया गया. लगातार की जा रही यह कार्रवाई अनधिकृत निर्माण पर अंकुश लगाने और वैधानिक प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए निगम के सतत प्रयासों को दर्शाती है.
आज के अभियान के दौरान दक्षिण जोन के गौशाला रोड, सतबड़ी तथा पश्चिम जोन के विशाल एन्क्लेव, हस्तसाल, विकासपुरी एक्सटेंशन और उत्तम नगर में प्रमुख विध्वंस कार्रवाई की गई. उत्तरी जोन के सब्जी मंडी क्षेत्र में भी विध्वंस सहित प्रवर्तन कार्रवाई की गई.
पूर्वी जोन में न्यू सीलमपुर, मयूर विहार फेज-I और पांडव नगर में प्रमुख विध्वंस कार्रवाई की गई. एमसीडी के शेष जोनों में भी कई स्थानों पर इसी तरह की प्रवर्तन कार्रवाई की गई.
एमसीडी ने स्पष्ट किया है कि किसी भी तरह के अनधिकृत निर्माण या भवन मानदंडों के उल्लंघन की अनुमति नहीं दी जाएगी. एमसीडी ने दोहराया कि जनसुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वाले उल्लंघनों तथा अपने अधिकार क्षेत्र में अनधिकृत निर्माण के खिलाफ प्रवर्तन अभियान पूरी सख्ती के साथ जारी रहेगा.
अपने निरंतर निरीक्षण अभियान के तहत एमसीडी ने दिल्लीभर में पेइंग गेस्ट (पीजी) आवासीय भवनों का मैदानी सर्वेक्षण किया है. इस सर्वेक्षण का उद्देश्य संचालित पीजी सुविधाओं का विस्तृत डेटाबेस तैयार करना तथा लागू भवन मानदंडों और नियमों के अनुपालन का आकलन करना है.
अब तक किए गए सर्वेक्षण में लगभग 2,453 ऐसे भवनों की पहचान की गई है, जहां पीजी सुविधाएं संचालित हो रही हैं और इनमें करीब 55,000 लोग रह रहे हैं.