पंजाब कांग्रेस नेताओं की केमेस्ट्री डिजाइन करने में जुटे ये चुनावी रणनीतिकार, चन्नी और राजा वडिंग की करवाई सीक्रेट मीटिंग
Raisina News Desk- जुलाई 29, 2026 04:02 AM IST

पंजाब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजा वडिंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के बीच सुलह की कोशिशें जारी हैं. मेल-मिलाप की इस कोशिश में मुख्य भूमिका चुनाव रणनीतिकार नरेश अरोड़ा निभा रहे हैं. इस सिलसिले में मंगलवार की शाम दिल्ली में चन्नी और राजा की एक गुप्त बैठक हुई, जिसमें नरेश अरोड़ा और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा भी मौजूद थे.
विधानसभा चुनाव के मद्देनजर पंजाब कांग्रेस की नई टीम के एलान के बाद यह पहला मौका था जब चन्नी और राजा के बीच औपचारिक तौर पर बातचीत हुई है. हालांकि इनके बीच क्या बात हुई इसकी जानकारी सामने नहीं आई है. सूत्रों ने दावा किया कि बातचीत सही दिशा में है. बैठक के बारे में पूछे जाने पर राजा वडिंग ने ऐसी किसी बैठक में शामिल होने की बात से इंकार किया तो वहीं नरेश अरोड़ा ने भी कोई जवाब नहीं दिया.
एक जुलाई को कांग्रेस नेतृत्व ने राजा वडिंग को पंजाब का प्रदेश अध्यक्ष बनाए रखने का ऐलान किया. चन्नी को कैंपेन कमिटी और रंधावा को कोर कमिटी का प्रमुख बनाया गया. लेकिन दलित समाज से आने वाले चन्नी और वरिष्ठ नेता रंधावा की अगुवाई में पंजाब कांग्रेस के कई विधायकों और पूर्व उम्मीदवारों ने राजा को हटाने के लिए मोर्चा खोल दिया.
इसके बाद पहले प्रभारी भूपेश बघेल ने चंडीगढ़ में हफ़्ते भर डेरा डाला और फिर वेणुगोपाल ने चन्नी-रंधावा जैसे नाराज़ नेताओं को दिल्ली बुलाया और अनुशासन की नसीहत दी. इसके बाद चन्नी ने साफ़ किया कि वो पार्टी आलाकमान के फ़ैसले के साथ हैं. इसके बाद बीते बुधवार को पंजाब कांग्रेस के सभी वरिष्ठ नेता कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल द्वारा पार्टी मुख्यालय “इंदिरा भवन” में बुलाई गई बैठक में शामिल भी हुए. इस बैठक में चन्नी और राजा आसपास ही बैठे थे. पार्टी ने संदेश दिया कि विवाद सुलझा लिया गया है.
लेकिन, जानकार सूत्रों के मुताबिक ऊपर से भले ही सब साथ नज़र आ रहे थे लेकिन राजा और चन्नी के बीच बोलचाल तक नहीं थी. सोमवार को संसद भवन परिसर में राजा वडिंग की अगुवाई में पंजाब कांग्रेस के सांसदों ने राज्य के शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया. इसमें चन्नी और रंधावा नज़र नहीं आए.
बहरहाल, पंजाब कांग्रेस के किस्से में अब चुनावी रणनीतिकार नरेश अरोड़ा की एंट्री हो गई है, जो 2017 के पंजाब विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए काम कर चुके हैं. हालांकि, इस बार पंजाब में कांग्रेस के लिए चुनावी मैनेजमेंट का काम सुनील कानूगोलू कर रहे हैं.
नरेश अरोड़ा की कंपनी डिजाइन बॉक्स्ड ने बीते कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का चुनाव अभियान संभाला था. तब प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार और नेता विपक्ष सिद्धारमैया के बीच वैसी ही प्रतिस्पर्धा थी जैसी आजकल राजा और चन्नी के बीच है. तब अरोड़ा ने डीके और सिद्धा के बीच संतुलन बनाए रखा और वोटिंग से ठीक पहले एक वीडियो जारी किया जिसमें दोनों नेता आत्मीयता के साथ एक दूसरे से संवाद करते नजर आए. चुनाव में कांग्रेस को बड़ी जीत मिली. तीन साल सीएम रहने के बाद हाल में ही सिद्धारमैया ने राहुल गांधी के आग्रह पर डीके शिवकुमार के लिए सीएम की कुर्सी ख़ाली कर दी.
पंजाब में भी कांग्रेस को ऐसे ही संकट मोचक की दरकार है. संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने “आँखे दिखा कर” सभी नेताओं को इकट्ठा तो कर लिया है, लेकिन अगर बड़े नेताओं के बीच की केमेस्ट्री सही नहीं होगी तो पार्टी को नुक़सान उठाना पड़ सकता है. आने वाले वक़्त में पता चलेगा कि दक्षिण दिल्ली में हुई आज की “गुप्त बैठक” का क्या नतीजा रहा!