यूपी पंचायत चुनाव पर बड़ा फैसला, जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक की जिम्मेदारी, अब ब्लॉक प्रमुख की बारी | UP Panchayat Election News Zila Palchayat Adyaksh gets administrator charge Block Pramukh Next Turn in Uttar Pradesh


लखनऊ:

उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव को लेकर यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक और बड़ा फैसला लिया है. ग्राम पंचायतों में ग्राम प्रधानों को छह महीने के लिए प्रशासक बनाने के बाद जिला पंचायतों में भी यही व्यवस्था लागू करने का फैसला किया गया है. जिला पंचायत अध्यक्षों को अंतरिम प्रावधानों के तहत संबंधित जिला पंचायतों का प्रशासक बनाया गया है. यह आदेश नई जिला पंचायत के गठन तक लागू रहेगा.ब्लॉक प्रमुख को भी ऐसे ही उनके ब्लॉक में जिम्मेदारी दिए जाने का संकेत है. सरकार ने ये कदम ऐसे वक्त उठाया है, जब ग्राम पंचायत चुनाव कराने में देरी और प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने का फैसला हाईकोर्ट में चल रहा है. 

जिला पंचायत चुनाव भी टले

उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में 75 जिला पंचायत अध्यक्ष हैं, जिनका 5 साल का टर्म आज 11 जुलाई को खत्म हो रहा है. ऐसे में जिला पंचायतों और क्षेत्र पंचायतों का कार्यकाल पूरा होने के साथ जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख प्रशासक के तौर पर संभालेंगे.पंचायती राज विभाग ने इसका प्रस्ताव शासन को भेज दिया था, जिस पर फैसला लिया गया है.

क्षेत्र पंचायत चुनाव भी टलेंगे?

उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव में निर्वाचित जिला पंचायत अध्यक्ष की पहली बैठक 12 जुलाई 2021 के बाद 11 जुलाई 2026 तक पांच साल पूरे हो गए हैं.यूपी में ग्राम पंचायत प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को खत्म होने के बाद प्रधानों को प्रशासक बनाया गया था. अब जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत में ऐसी ही व्यवस्था होनी तय है. ब्लॉक प्रमुख का कार्यकाल 19 जुलाई को खत्म होना है. ऐसे में 18 जुलाई को ब्लॉक प्रमुख पर भी आदेश आ सकता है. 

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पंचायत चुनाव कब होंगे, हाईकोर्ट का सवाल

ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के फैसले पर हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सरकार से सवाल पूछा है. लखनऊ बेंच ने सरकार से पूछा है कि मौजूदा ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने का फैसला किस कानून के तहत की गई है? जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने शुक्रवार को केस की सुनवाई की थी. अदालत ने यूपी सरकार को पिछड़ा वर्ग आयोग बनाने को लेकर एक्शन रिपोर्ट भी तलब की है. अदालत ने कहा कि उत्तर प्रदेश पंचायती राज अधिनियम की धारा 12 (3A) की वैधता पर विचार किया जाना जरूरी है.

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