लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी ध्वनि मत से पास हुआ एंटी पेपर लीक बिल, 10 साल तक की सजा का है प्रावधान

लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी ध्वनि मत से एंटी पेपर लीक बिल पास हो गया है. दरअसल, पेपर लीक के मुद्दे पर कॉकरोच जनता पार्टी और छात्रों ने द‍िल्‍ली के जंतर मंतर पर व‍िरोध प्रदर्शन क‍िया था. भारी व‍िरोध के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने शि‍क्षा मंत्री के पद से इस्‍तीफा द‍िया. इसके साथ ही सरकार ने पेपर लीक को लेकर सख्‍त कानून बनाने का फैसला ल‍िया. इस ब‍िल को पहले लोकसभा में पेश क‍िया गया, जहां से इसके पास होने के बाद गुरुवार को राज्‍यसभा में पेश क‍िया गया. राज्‍यसभा में भी यह ब‍िल ध्‍वन‍ि मत से पास हो गया है.  

बीजेपी नेता तरुण चुघ ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता साफ तौर पर दिखाई है. फास्ट-ट्रैक कोर्ट, सख्त सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है ताकि कोई भी छात्रों की ज़िंदगी के साथ खिलवाड़ न कर सके. आज इस बिल में मुख्य टास्क फोर्स को मंजूरी दी गई है. मेरा मानना ​​है कि यह लोकतंत्र की जीत है.”

10 साल तक की हो सकती है सजा

एंटी पेपर लीक कानून में कई कड़े प्रावधान किए गए हैं. अब संगठित तरीके से पेपर लीक कराने या नकल गिरोह चलाने वालों को अब अधिकतम 10 साल तक की जेल की सजा हो सकती है. बिल में जुर्माना भी बढ़ा द‍िया गया है. अब पेपर लीक के दोषियों पर अधिकतम 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा. यही नहीं, अगर पेपर लीक के कारण री-एग्‍जाम करानी पड़ा तो उसका पूरा खर्च भी दोषियों से वसूला जा सकेगा. 

एआई की मदद से नकल करना, परीक्षा प्रणाली को हैक करना, ऑनलाइन पेपर सेंड करना और साइबर फ्रॉड भी इस कानून के दायरे में आएगा. परीक्षा कराने वाली एजेंसी, सर्विस प्रोवाइडर, तकनीकी कंपनी या क‍िसी अधिकारी की मिलीभगत सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होगी. 
 

 


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