55 मिनट और 50 मिनट… दिल्ली में ये दो तकरीर बदल सकती हैं दुनिया की तस्वीर?
Raisina News Desk- सितंबर 13, 2026 12:22 AM IST

एक देश, दो मुलाकातें, तीन शख्स और दुनिया भर की सुर्खियां. अंदाजा लगाया जा सकता है कि ये कितनी हाई प्रोफाइल मुलाकातें होंगी. पहली मुलाकात रूस के राष्ट्रपति और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच शुक्रवार को नई दिल्ली में हुई. ये मुलाकात करीब 55 मिनट चली. फिर शनिवार को दूसरी मुलाकात चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच नई दिल्ली में हुई. ये मुलाकात करीब 50 मिनट चली. मगर इन दो मुलाकातों में हुई तकरीरें मुकम्मल अंजाम तक पहुंचीं तो ये दुनिया की तस्वीर बदल सकती हैं.
इस 50 मिनट की मोदी-जिनपिंग की द्विपक्षीय मुलाकात में रिश्तों को अगले स्तर पर ले जाने पर सहमति बनी. शी जिनपिंग चाहते हैं कि भारत से आर्थिक संबंध बढ़े. सामरिक महत्व के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि इसे सकारात्मक दिशा में ले जाना चाहिए. दोनों देशों के बीच ज्यादा से ज्यादा बातचीत होनी चाहिए. दोनों देशों ने माना कि रिश्तों को अगले स्तर पर ले जाने के लिए कई स्तर पर पहल करने की जरूरत है. शी जिनपिंग ने कहा कि दोनों देश साथ मिलकर विकास कर सकते हैं. उन्होंने पीएम मोदी को यहां तक याद दिलाया कि अब तक दोनों 21 बार मिल चुके हैं. प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी इस बात पर सहमत हुए कि दोनों पक्षों को क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर आपसी सहमति का दायरा बढ़ाना जारी रखना चाहिए.
भारत जनसंख्या के मामले में दुनिया में पहले स्थान पर है तो चीन दूसरे स्थान पर. दोनों की जनसंख्या मिला दें तो दुनिया की करीब 35 फीसदी जनसंख्या इनके पास है. यही नहीं दोनों देशों की अर्थव्यवस्था दुनिया के कुल अर्थव्यवस्था में 20 फीसदी है. संयुक्त राष्ट्र के ही आंकड़ों को मानें तो दुनिया में 195 देश हैं. यानी 193 देश मिलकर 80 फीसदी पैसा रखे हुए हैं और ये दोनों देश अकेले 20 फीसदी. सैन्य मामले में भी देखें तो चीन तीसरे नंबर पर है दुनिया में तो भारत तीसरे नंबर पर. वहीं इन दोनों का दोस्त रूस खुद दूसरे नंबर पर सैन्य ताकत है. मतलब अगर ये दोनों एक साथ आ जाएं तो दुनिया की कोई भी ताकत इनके सामने खड़े होने की हैसियत में नहीं है.
धीरे-धीरे बर्फ तो पिघली, मगर इस 50 मिनट की बातचीत में जो सबसे बड़ी बात हुई कि दोनों देशों ने माना कि समस्याएं हैं. फिर उन समस्याएं को पहचाना. सीमा विवाद और सीमा पर शांति को संबंधों की धुरी के रूप में पहचाना गया और इसे हल करने पर दोनों ने सहमति दिखाई. अगर दोनों देशों के सुप्रीम नेताओं की बात पर अमल करते हुए अधिकारी आगे बढ़ते हैं तो जाहिर है कि ये संबंध बहुत ही टिकाऊ और दुनिया की तस्वीर बदलने का माद्दा रखते हैं.
शुक्रवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और पीएम नरेंद्र मोदी की 55 मिनट की मुलाकात हुई. भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, विभिन्न क्षेत्रों में गहरे सहयोग को बनाए रखने के अपने दृढ़ संकल्प का संकेत देते हुए दोनों नेताओं ने भारत-रूस विशेष रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के प्रयास जारी रखने पर सहमति जताई. बयान में कहा गया कि यह साझेदारी ‘‘महत्वपूर्ण वृद्धि दर्ज कर रही है और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच भी मजबूत बनी हुई है.” इस कोट का मर्म समझिए. भारत और रूस की दोस्ती महत्वपूर्ण वृद्धि दर्ज कर रही है. मतलब तब से भी कई गुणा ज्यादा जब रूस ने अमेरिका के जहाजों का मुकाबला करने के लिए अपना जहाज भेज दिया था.
रूस अभी सबसे ज्यादा आर्थिक रूप से परेशान है. अमेरिका और पश्चिमी देशों ने उस पर कई तरह के सैंक्शंस लगाए हुए हैं. इसके अलावा उसका सैन्य उद्योग भी ठप पड़ गया है. कारण युद्ध के कारण उसे पश्चिमी देशों से आयात होने वाले सामान नहीं मिल रहे. इधर, भारत की मुश्किल ये है कि उसके अपने पड़ोसी ही उसे परेशान किए हुए हैं. आतंकवाद के जरिए भारत के आर्थिक विकास के पहिए को रोकना चाहते हैं.
रूस तेल-गैस की सप्लाई तो कर रहा है, लेकिन व्यापार घाटा भी भारत-रूस का बढ़ता जा रहा है. ऐसे में रूस भी अगर भारत से ज्यादा से ज्यादा सामान खरीदने लगे तो भारत का व्यापार घाटा कम रहेगा. साथ ही अगर रूस अपनी तकनीक भारत को सौंपता है तो जाहिर है मजबूत भारत उसके काम आएगा. वहीं इसके जरिए रूस आर्थिक रूप से मजबूत होगा. दुनिया में शांति के लिए मजबूत रूस का होना भी बहुत जरूरी है. अगर रूस कमजोर हुआ तो अमेरिका से लेकर चीन तक अपनी मनमानी ज्यादा आसानी से कर पाएंगे. ऐसे में भारत और रूस की दोस्ती इस दुनिया की शांति के लिए बहुत ही जरूरी है. साथ ही अगर दोनों मजबूत होते हैं और चीन भी इनकी दोस्ती में शामिल होता है तो ये दुनिया की तस्वीर बदल सकते हैं.
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