6 राज्यों में होगा किशाऊ डैम समझौता, 15 हजार करोड़ की इस परियोजना से मिलेगा पानी, बिजली और यमुना को नया जीवन
Raisina News Desk- सितंबर 15, 2026 05:08 AM IST

अलग-अलग राज्यों के बीच दशकों से चले आ रहे जल बंटवारे के विवाद को सुलझाने की केंद्र सरकार की पहल लगातार जारी है. इसी सिलसिले में मंगलवार को छह राज्यों के बीच किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को लेकर समझौते पर दस्तखत होंगे. 15 हजार करोड़ रुपए की यह परियोजना कई सालों से लटकी हुई थी.
मंगलवार को होने वाले समझौते पर राजस्थान, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के मुख्यमंत्री दस्तखत करेंगे. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और जल शक्ति मंत्री सी आर पाटिल की मौजूदगी में इस समझौते पर मुहर लगेगी. मंगलवार दोपहर बारह बजे कर्तव्य भवन 3 में यह कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा.
यह समझौता उत्तर भारत के एक बड़े हिस्से में पेयजल और सिंचाई के संकट को दूर करेगा. इससे स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में भी एक बड़ा कदम उठाया जा सकेगा. किशाऊ परियोजना उत्तराखंड के देहरादून और हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले की सीमा पर टोंस नदी पर निर्मित की जाने वाली एक राष्ट्रीय महत्व की परियोजना है. टोंस नदी यमुना नदी की प्रमुख सहायक नदी है.
हर साल लगभग 1,379 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन किया जाएगा. यह बिजली उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के बीच समान रूप से बांटी जाएगी. इसकी जल भंडारण क्षमता 1,324 मिलियन घन मीटर होगी. परियोजना का उद्देश्य जल संरक्षण, पेयजल आपूर्ति, सिंचाई और बिजली उत्पादन जैसे बहुउद्देशीय लाभ सुनिश्चित करना है.
इस बांध के जलाशयों से 97,000 हेक्टेयर से अधिक कृषि योग्य भूमि को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा. दिल्ली समेत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और पड़ोसी राज्यों को पेयजल आपूर्ति में बड़ा लाभ मिलेगा. यह परियोजना बीते कई वर्षों से हिमाचल प्रदेश की तरफ से उठाए गए वित्तीय आपत्तियों के कारण लटकी हुई थी. हिमाचल प्रदेश का तर्क था कि पूर्व के समझौते के तहत उस पर अत्यधिक वित्तीय भार पड़ रहा था, जिसका वह वहन करने की स्थिति में नहीं था.
हाल ही में केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के हस्तक्षेप और राज्यों की आपसी सहमति के बाद एक नया फॉर्मूला तय किया गया है. इसके तहत परियोजना के जल भाग का 90% खर्च केंद्र सरकार ग्रांट के रूप में देगी. शेष 10% राशि सभी लाभार्थी राज्यों द्वारा साझा की जाएगी.
किशाऊ बांध से बिजली और पानी के अलावा यमुना की सफाई करने में भी मदद मिलेगी. इससे मानसून के दौरान बाढ़ की विभीषिका को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी. गर्मी के मौसम में टोंस और आगे चलकर यमुना नदी में निरंतर जल प्रवाह बनाए रखा जा सकेगा, जिससे यमुना नदी को साफ करने के अभियान में मदद मिल सकेगी.
पिछले कुछ महीनों में दशकों से लंबित जल विवादों को सुलझाया गया है. इस साल जुलाई में सरदार सरोवर परियोजना से जुड़े दशकों पुराने बकाये और लागत साझा करने के विवाद का एकमुश्त निपटारा किया गया. जुलाई में ही ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच महानदी जल विवाद को लेकर एक संयुक्त समिति का गठन करने और आपसी सहमति से दीर्घकालिक ढांचा तैयार करने पर सहमति बनी.
राजस्थान और हरियाणा के बीच ताजेवाला हेडवर्क्स जल समझौता किया गया. इसके तहत मॉनसून में हथनीकुंड ताजेवाला बैराज का सरप्लस पानी राजस्थान के शेखावटी क्षेत्र भेजा जा सकेगा. 31 अगस्त को बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के जल बंटवारे को लेकर भी ऐतिहासिक समझौता किया गया. इसके बाद 25 साल से चला आ रहा विवाद समाप्त हो गया.