प्रशांत भूषण और नेहा बोरा की रिजीम चेंज वाली राय से अभिजीत दीपके ने झाड़ा पल्ला, बताया अपना मकसद

प्रशांत भूषण और नेहा बोरा की रिजीम चेंज वाली राय से अभिजीत दीपके ने झाड़ा पल्ला, बताया अपना मकसद

नई दिल्ली:

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे प्रदर्शन में बीते दिनों रिजीम चेंज की बात उठने के बाद सियासी भूचाल मच गया है. वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने भरी प्रेस कॉफ्रेंस में रिजीम चेंज की चाहत बताई. आइसा नेता नेहा बोरा ने भी बांग्लादेश से प्रेरणा लेने का बयान दिया. प्रशांत भूषण और नेहा बोरा के इन बयानों ने राजनीति गरमा दी है. भाजपा सहित कई दलों के नेताओं ने इनके बयान को खतरनाक बताया है. प्रशांत भूषण और नेहा बोरा के साथ उसी प्रेस कॉफ्रेंस में मौजूद कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने इन दोनों की राय से पल्ला झाड़ लिया है. 

‘CJP आंदोलन का मसकद रिजीम चेंज नहीं’

कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे अपने संगठन के आंदोलन को ‘रिजीम चेंज’ से अलग रखने की कोशिश की है. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विरोध प्रदर्शन का मकसद केवल CEC को उनके पद से हटाना था, न कि सरकार बदलना.

दीपके ने बताया उनका मकसद क्या?

प्रेस क्लब में आयोजित कॉन्फ्रेंस में दीपके ने कहा, “हम यह नहीं कह रहे हैं कि हम सरकार बदलना चाहते हैं. या सरकार के साथ कुछ करना चाहते हैं. हम बस इतना कह रहे हैं कि मुख्य चुनाव आयुक्त जो चुनावों में धांधली कर रहे हैं, जो अपने साथी चुनाव आयुक्तों की बात नहीं सुन रहे हैं और जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट की भी नहीं सुनी, उन्हें हटा दिया जाना चाहिए. उनकी जगह एक नए चुनाव आयुक्त की नियुक्ति स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से की जानी चाहिए.”

प्रशांत भूषण के बयान पर विरोध तेज

दीपके के इस बयान से पहले आंदोलन में शामिल वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने इस आंदोलन का मकसद रिजीम चेंज बताया था. जिसको लेकर बीजेपी ने विपक्ष और इस विरोध प्रदर्शन पर अपना हमला और तेज कर दिया है. 

प्रशांत भूषण ने कहा, ‘हां, हम सभी सत्ता परिवर्तन चाहते हैं. इसमें क्या गलत है? भाजपा ने सत्ता परिवर्तन के लिए कई आंदोलनों का नेतृत्व किया. अब वे कह रहे हैं कि सत्ता परिवर्तन के लिए कोई साजिश रची जा रही है.’

नेहा बोरा ने पहले एक बयान दिया था जिसमें उन्होंने बांग्लादेश के ‘जेन-जेड’ (Gen-Z) आंदोलन से प्रेरित होने की बात कही थी; इसी आंदोलन के बाद शेख हसीना की सरकार गिर गई थी.

बीजेपी ने कहा- जो नेता नहीं बदल सकते वो सत्ता बदलने चले हैं?    


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