Opinion: 125 यूनिट फ्री बिजली पर बोले लोग-सरकार अपने वादे से क्यों मुकर रही? पहले क्यों नहीं जांची पात्रता?
Raisina News Desk- नवंबर 04, 2026 01:37 PM IST
Begusarai Public Opinion: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के अपील के बाद चर्चा शुरू हो गया है. क्या बिहार में 125 यूनिट मुफ्त बिजली योजना का लाभ छोड़ेंगे. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अपील के बाद अब इस मुद्दे पर आम लोगों के बीच भी चर्चा शुरू हो गई है. मुख्यमंत्री ने संपन्न परिवारों और आयकरदाताओं से स्वेच्छा से बिजली सब्सिडी छोड़ने की अपील की है. उनका कहना है कि आर्थिक रूप से सक्षम लोग इस सुविधा का लाभ छोड़ दें, ताकि सरकार उस राशि का इस्तेमाल राज्य के विकास और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में कर सके. इस अपील पर लोगों की राय बंटी हुई है. कुछ लोग इसे गरीबों के हित में जरूरी कदम बता रहे हैं, तो कुछ सरकार से ही सवाल पूछ रहे हैं.
सक्षम लोगों को खुद छोड़नी चाहिए सब्सिडी
LOCAL 18 पर ग्रेजुएट छात्र अमित कुमार का कहना है कि जो लोग आर्थिक रूप से सक्षम हैं, उन्हें खुद आगे आकर बिजली सब्सिडी का लाभ छोड़ना चाहिए. इस योजना का वास्तविक फायदा गरीब और जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचना चाहिए. उनका मानना है कि सरकार को भी सक्षम और जरूरतमंद लोगों के लिए स्पष्ट नियम बनाने चाहिए, ताकि सब्सिडी का सदुपयोग हो सके.
सरकारी नौकरी और आयकरदाता भी छोड़ें लाभ
छात्र नेता विश्वजीत कुमार ने मुख्यमंत्री की अपील का समर्थन किया है. उनका कहना है कि जिन लोगों की आमदनी आयकर देने के दायरे में आती है या जो सरकारी नौकरी में हैं, उन्हें 125 यूनिट मुफ्त बिजली की सब्सिडी का लाभ नहीं लेना चाहिए. इससे जरूरतमंद परिवारों को मिलने वाली राहत का उद्देश्य पूरा हो सकेगा.
वहीं, मुकेश कुमार सिन्हा ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि सरकार ने योजना लागू करने से पहले इस बात पर विचार क्यों नहीं किया कि कौन सक्षम है और कौन जरूरतमंद. अब योजना लागू होने के बाद लोगों से सब्सिडी छोड़ने की अपील करना जनता के बीच गलत संदेश दे सकता है.
सक्षम लोगों के आगे आने से होगा विकास
पूर्व सरकारी अधिकारी प्रिया रंजन कुमार का कहना है कि मुख्यमंत्री की अपील का उद्देश्य राज्य के विकास से जुड़ा है. सरकारी नौकरी करने वाले, निजी क्षेत्र में अच्छी आमदनी पाने वाले और आयकरदाता आर्थिक रूप से सक्षम हैं. ऐसे लोगों को स्वेच्छा से सब्सिडी छोड़ने के लिए आगे आना चाहिए. उन्होंने इसकी तुलना रसोई गैस सब्सिडी छोड़ने की पहल से करते हुए कहा कि यदि सक्षम लोग इस सुविधा का लाभ छोड़ते हैं तो सरकार उस पैसे का इस्तेमाल बिहार के विकास में कर सकती है. इधर मोहम्मद आलम का भी मानना है कि सरकारी सेवा में कार्यरत लोगों और आयकरदाताओं को मुफ्त बिजली की सब्सिडी छोड़ देनी चाहिए.
सक्षम और अक्षम का मानक क्या?
व्यवसायी राकेश कुमार सिन्हा ने इस अपील पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार ने जब 125 यूनिट मुफ्त बिजली देने की घोषणा की थी, तब सभी पहलुओं पर विचार करना चाहिए था. अब सरकार अपनी घोषणा से पीछे क्यों हट रही है? उन्होंने कहा कि यदि सक्षम और अक्षम परिवारों के बीच अंतर करना है तो उसका स्पष्ट मानक सरकार को तय करना चाहिए. आखिर किसे सक्षम माना जाएगा और किसे नहीं, यह स्पष्ट होना जरूरी है.
कुल मिलाकर 125 यूनिट मुफ्त बिजली की सब्सिडी को लेकर लोगों के बीच दो तरह की राय सामने आई है. एक पक्ष का मानना है कि सरकारी नौकरी करने वाले, आयकरदाता और आर्थिक रूप से मजबूत परिवारों को खुद आगे आकर सब्सिडी छोड़नी चाहिए, ताकि गरीबों को इसका अधिक लाभ मिल सके. वहीं, दूसरे पक्ष का सवाल है कि यदि सरकार को सक्षम और जरूरतमंद परिवारों के बीच अंतर करना था तो योजना लागू करते समय ही इसके लिए नियम क्यों नहीं बनाए गए?