मां से ऐसी मोहब्बत कि जीते-जी खुदवा ली अपनी कब्र, गोपालगंज के मंजूर हसन की कहानी भावुक कर देगी

मां से ऐसी मोहब्बत कि जीते-जी खुदवा ली अपनी कब्र, गोपालगंज के मंजूर हसन की कहानी भावुक कर देगी

Gopalganj Manzur Hasan Story: गोपालगंज के मंजूर हसन ने मां से बेइंतहा मोहब्बत की मिसाल पेश की है. 1999 में मां के निधन के बाद उन्होंने मां की मजार के पास ही अपनी कब्र खुदवा ली और हरे रंग का कफन भी खरीद लिया है ताकि मौत के बाद भी वह मां के करीब रह सकें.

आलोक कुमार/गोपालगंज: मां और बेटे का रिश्ता दुनिया के सबसे अनमोल रिश्तों में से एक माना जाता है. मां की ममता और उसके प्यार का कोई मोल नहीं होता. लेकिन जब मां इस दुनिया से चली जाती है, तो उसकी कमी जीवनभर महसूस होती है. गोपालगंज जिले के बरौली प्रखंड स्थित बलहा गांव के रहने वाले मंजूर हसन की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. मां से उनका लगाव इस कदर है कि उनके इंतकाल के वर्षों बाद भी वह उनसे जुदा होने की कल्पना नहीं कर पाते. यही वजह है कि उन्होंने जीते-जी अपनी कब्र मां की मजार के ठीक बगल में खुदवा ली है, ताकि मौत के बाद भी मां के करीब रह सकें.

मां से था गहरा लगाव, उनके जाने के बाद बदल गई जिंदगी
मंजूर हसन स्वर्गीय मुबारक हुसैन के पुत्र हैं. तीन भाइयों में सबसे छोटे मंजूर अपनी मां शाह शहरबानो हसनी से बेहद मोहब्बत करते थे. मां भी उन्हें बहुत प्यार करती थीं. मंजूर बताते हैं कि बचपन से ही उनका अपनी मां से गहरा लगाव रहा. मां के रहते उन्हें किसी परेशानी का एहसास नहीं होता था. जिंदगी में कितनी भी मुश्किलें आतीं, मां के पास पहुंचते ही मन को सुकून मिल जाता था. लेकिन जून 1999 में मां के इंतकाल ने उनकी जिंदगी बदल दी. मां के बिछड़ने का सदमा उन्हें भीतर तक तोड़ गया. वह बताते हैं कि मां के जाने के बाद जिंदगी बोझ जैसी लगने लगी थी. धीरे-धीरे उन्होंने खुद को संभाला और मां की यादों को संजोने के लिए उनकी मजार बनवाई.

मां की मजार की देखभाल में बीतता है अधिकतर समय
मां की मजार की देखभाल और साफ-सफाई करना अब मंजूर हसन की दिनचर्या का हिस्सा बन गया है. वह अपना अधिकतर समय मां की मजार के पास ही बिताते हैं. मां से जुदाई का दर्द आज भी उनके दिल में जिंदा है. इसी मोहब्बत के कारण उन्होंने मां की मजार के ठीक बगल में अपनी कब्र भी खुदवा ली है. उनकी इच्छा है कि जब उनका इंतकाल हो, तो उन्हें मां के पास ही दफनाया जाए. इसके लिए उन्होंने अपने कफन का भी इंतजाम कर लिया है.

हरे रंग का कफन भी खरीद रखा है
मंजूर हसन बताते हैं कि उन्होंने अपने लिए हरे रंग का कफन खरीदा है. उनका कहना है कि हरा रंग उन्हें पसंद है और इसे हुसैनी रंग माना जाता है. वह चाहते हैं कि उनके इंतकाल के बाद उन्हें इसी हरे कफन में दफनाया जाए.

मां की सीख को आज भी मानते हैं जिंदगी का आधार
मंजूर हसन अपनी मां की एक सीख को आज भी याद करते हैं. उनकी मां हमेशा कहा करती थीं कि सभी से प्यार करना चाहिए और किसी से दुश्मनी नहीं रखनी चाहिए. अगर इंसान दूसरों से मोहब्बत करेगा, तो दुश्मनी अपने आप खत्म हो जाएगी. मंजूर आज भी इसी सीख को अपनी जिंदगी का आधार मानते हैं.

माता-पिता की सेवा करने का देते हैं संदेश
मंजूर हसन की कहानी सिर्फ मां-बेटे के प्रेम की मिसाल नहीं, बल्कि समाज के लिए एक भावुक संदेश भी है. वह लोगों से अपील करते हैं कि अपने माता-पिता का सम्मान करें, उनकी सेवा करें और उन्हें कभी अकेला न छोड़ें. मां की मौजूदगी में उनकी कद्र करें, क्योंकि उनके जाने के बाद यादें तो रह जाती हैं, लेकिन उनका प्यार और दुलार दोबारा नहीं मिलता.

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