Cyclone Murasu: 120 किमी की रफ्तार से टकराएगा चक्रवात मुरासु: आंध्र प्रदेश से तमिलनाडु तक हाई अलर्ट, लाखों पर खतरा
Raisina News Desk- नवंबर 03, 2026 12:42 AM IST
Cyclone Murasu Landfall: बंगाल की खाड़ी में सक्रिय हुआ गंभीर चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ अब विकराल रूप ले चुका है. मौसम विभाग (आईएमडी) ने चेतावनी दी है कि यह भीषण तूफान तेजी से उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहा है. इसके देर रात 11:30 बजे से तड़के 4 बजे के बीच दक्षिणी आंध्र प्रदेश के तट से टकराने की पूरी आशंका है. तूफान का लैंडफॉल ओंगोल के दक्षिण में नेल्लोर और नरसापुर के बीच होने का अनुमान लगाया गया है. जब यह तूफान तट से टकराएगा, उस समय हवाओं की रफ्तार 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी. इसके झोंके 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं. इस खतरे को देखते हुए आंध्र प्रदेश, ओडिशा और तमिलनाडु तीनों राज्यों का प्रशासनिक अमला अलर्ट मोड पर है.
Cyclone Murasu: समुद्र में दो मीटर ऊंची लहरें उठने का अनुमान
मौसम विभाग के ताजा बुलेटिन के अनुसार, यह मौसम प्रणाली पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर केंद्रित थी. पिछले छह घंटों के दौरान यह करीब 12 से 25 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से आगे बढ़ी है. यह तूफान चेन्नई से करीब 200 किलोमीटर, नेल्लोर से 210 किलोमीटर और मछलीपट्टनम से 270 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद था.
तट से टकराते वक्त दक्षिण तटीय आंध्र प्रदेश के निचले इलाकों में खगोलीय ज्वार से लगभग 1.5 से 2 मीटर अधिक ऊंचाई तक समुद्री लहरें उठने की आशंका है. सबसे खतरनाक स्थिति बापटला, कृष्णा और प्रकाशम जिलों में देखने को मिल सकती है. यहां समुद्र का पानी रिहायशी बस्तियों में घुसने का खतरा बना हुआ है. मछुआरों को पहले ही समुद्र में न जाने की हिदायत जारी कर दी गई है.
आंध्र प्रदेश के किन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी हुआ है?
तूफान के असर से आंध्र प्रदेश के कई हिस्सों में तेज हवाओं के साथ जोरदार बारिश का दौर पहले ही शुरू हो चुका है. काकीनाडा में 30.4 मिमी, तिरुपति में 12.4 मिमी, कावली में 8.7 मिमी और बापटला में 6.8 मिमी बारिश रिकॉर्ड की जा चुकी है. मौसम विभाग ने बताया है कि बापटला, प्रकाशम, नेल्लोर, चित्तूर और तिरुपति जिलों में कुछ स्थानों पर अत्यंत भारी बारिश हो सकती है. इसके अलावा पलनाडु और नंद्याल जिलों में भी मूसलाधार बारिश का अलर्ट है. एलुरु, एनटीआर, कृष्णा, गुंटूर, अन्नमय्या, कडप्पा और कुरनूल जिलों में भी बहुत भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है. विशाखापत्तनम, काकीनाडा, विजयनगरम, गोदावरी और अनंतपुर जिलों में भी गरज-चमक के साथ पानी गिरने का सिलसिला बना रहेगा.
ओडिशा सरकार ने क्यों शुरू किया बड़े पैमाने पर इवैक्यूएशन?
हालांकि चक्रवात का लैंडफॉल आंध्र प्रदेश में होगा, लेकिन इसका भारी असर पड़ोसी राज्य ओडिशा में भी देखने को मिल रहा है. ओडिशा सरकार ने समय रहते दक्षिणी जिलों के संवेदनशील और निचले इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शुरू कर दिया है. राज्य के आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने बताया कि गंजाम, गजपति, रायगढ़ा, कोरापुट और मलकानगिरि जिलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है. सभी जिलाधिकारियों को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए चौबीसों घंटे तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं. पिछले चक्रवात ‘अर्नब’ के दौरान तैनात की गई आपदा मोचन टीमों को वापस नहीं बुलाया गया है. वे अभी भी उन्हीं स्थानों पर मुस्तैद हैं. गजपति और गंजाम जिलों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और बिजली गिरने की आशंका जताई गई है.
चेन्नई और उत्तरी तमिलनाडु में कैसा रहेगा तूफान का असर?
तमिलनाडु में भी चक्रवात मुरासु का असर साफ देखा जा रहा है. चेन्नई क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक दुरई ने बताया कि तूफान का केंद्र भले ही आंध्र तट पर टकराएगा, लेकिन उत्तरी तमिलनाडु में मौसम काफी बिगड़ा रहेगा. चेन्नई, तिरुवल्लुर, वेल्लोर और नीलगिरी जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश होने का अनुमान है. चेन्नई और आसपास के तटीय जिलों में हवा की गति 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है. हालांकि अधिकारियों ने यह भी साफ किया है कि मुरासु से उतना बड़ा नुकसान होने की संभावना नहीं है, जितना पिछले चक्रवात अर्नब के समय हुआ था. इसके बावजूद स्थानीय प्रशासन राहत और बचाव की तैयारी के साथ जमीन पर तैनात है. पूर्वोत्तर मानसून के चलते राज्य में पहले ही सामान्य से 18 प्रतिशत अधिक बारिश हो चुकी है. इससे राज्य के प्रमुख जलाशयों में पानी की स्थिति पहले से ही बेहतर बनी हुई है.