कौन हैं कैप्टन स्मित मच्छार? कभी टेक्सटाइल इंजीनियरिंग में बनाने वाले थे करियर, बने सबसे चर्चित पायलट
Raisina News Desk- अक्टूबर 01, 2026 10:44 AM IST
नई दिल्ली (Captain Smit Machchhar Education). आसमान की असीम ऊंचाइयों पर उड़ना और हजारों फीट की बुलंदी पर यात्रियों की जिंदगी की कमान संभालना आम बात नहीं है. इसके लिए जिगर के साथ-साथ फौलादी हौसले और सूझबूझ की जरूरत होती है. हाल ही में दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान (FZ1073) के दौरान भारतीय पायलट स्मित मच्छार ने जिस तरह से कॉकपिट के अंदर अपनी जान की परवाह किए बिना एक बड़ी साजिश को नाकाम किया, उसने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है.
हीरो बनने का सफर आसान नहीं होता. कैप्टन स्मित मच्छार की कहानी सिखाती है कि मंजिल तय करने के लिए बचपन से ही हवाई सपने देखना जरूरी नहीं है. सही समय पर लिया गया एक सही फैसला पूरी जिंदगी बदल सकता है. उनका परिवार टेक्सटाइल बिजनेस से जुड़ा है. लेकिन 19 साल की उम्र में एक एविएशन सेमिनार ने स्मित की जिंदगी बदल दी. न्यूजीलैंड में पायलट की कठिन ट्रेनिंग लेने से लेकर बोइंग 737 फ्लीट पर 13 साल से अधिक का लंबा अनुभव हासिल करने तक, उनका सफर बेहद संघर्ष भरा रहा है.
कई लोग बचपन से पायलट बनने का सपना देखते हैं. लेकिन कैप्टन स्मित मच्छार की कहानी अलग है. 12वीं के बाद उन्होंने टेक्सटाइल इंजीनियरिंग कोर्स चुना, फिर मैनेजमेंट की राह पकड़ी. 19 की उम्र में एविएशन सेमिनार में हिस्सा लेने के बाद उनके अंदर आसमान छूने की इच्छा जागी. उनके पिता ने उनके फैसले का स्वागत करते हुए केवल इतना कहा कि पता करो इसे कैसे और कहां से किया जा सकता है. इसके बाद उन्होंने न्यूजीलैंड का रुख किया. उस दौर में 16-17 लाख रुपये खर्च करके पायलट ट्रेनिंग पूरी की.
लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक, स्मित मच्छार ने बोइंग 737 फ्लीट पर 13 साल से ज्यादा का कमर्शियल फ्लाइंग अनुभव हासिल किया है. उनके नाम 9,750 से अधिक घंटे की सुरक्षित उड़ान का रिकॉर्ड दर्ज है. उन्होंने 2011 में स्पाइसजेट एयरलाइन के साथ करियर शुरू किया था. वहां लाइन ट्रेनिंग कैप्टन और सीनियर कमांडर जैसी जिम्मेदारियां संभालीं. इसके बाद जून 2022 में फ्लाईदुबई का दामन थामा और UAE की इस सरकारी एयरलाइन में डायरेक्ट एंट्री कैप्टन के रूप में जुड़ गए. बोइंग 737 मैक्स विमानों को भारत लाने वाले पहले पायलट के पहले बैच में भी वह शामिल रहे हैं.
एक इंटरव्यू में स्मित मच्छार ने अपने शुरुआती दिनों का दिलचस्प किस्सा शेयर किया था. जब वह फर्स्ट ऑफिसर थे, तब एक बार फ्लाइट में देरी की वजह से यात्री गुस्से में थे और केबिन क्रू पर दबाव बना रहे थे. उस समय उन्होंने सीखा कि यात्रियों को अंधेरे में रखने के बजाय सीधे कॉकपिट से PA सिस्टम के जरिए सच बताना ज्यादा असरदार होता है. कैप्टन बनने के बाद उनका यही अंदाज उनकी कार्यशैली बन गया. गंभीर टर्बुलेन्स या हवा में होने वाली मेडिकल इमरजेंसी (जैसे उड़ान के दौरान बच्चे का जन्म होना) के वक्त उन्होंने हमेशा ‘जीरो मार्जिन फॉर एरर’ पर काम किया. उनके लिए यात्रियों की सुरक्षा हमेशा सर्वोपरि रही.
दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाइट FZ1073 के दौरान जो हुआ, उसने उनकी परीक्षा ले ली. उड़ान के दौरान कथित तौर पर एक सह-पायलट ने विमान को Sabotage (ध्वस्त) करने की कोशिश की, जिसके बाद दोनों के बीच कॉकपिट में जबरदस्त संघर्ष हुआ. इस दौरान कैप्टन स्मित गंभीर रूप से घायल हो गए और उन्हें चाकू भी लगा. इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और यात्रियों की सुरक्षा के लिए डटे रहे. बाद में क्रू मेंबर और यात्रियों की मदद से स्थिति पर काबू पाया गया. उनकी बहादुरी ने साबित कर दिया कि वह सिर्फ बेहतरीन पायलट ही नहीं, बल्कि सच्चे नायक भी हैं.