Parwal Kheti Tips: परवल की पत्तियों में पीलापन? जलजमाव और फल मक्खी हैं मुख्य वजह, ऐसे करें समय पर बचाव
Raisina News Desk- अक्टूबर 01, 2026 05:09 PM IST
दरभंगा: बारिश के मौसम में परवल की फसल किसानों के लिए आमदनी का अच्छा जरिया बनती है. लेकिन इस बार कई परवल उत्पादक किसानों के सामने एक नई समस्या खड़ी हो गई है. खेतों में लगी परवल की लताओं की पत्तियों और फलियों में पीलापन आने लगा है, जिससे किसान चिंतित हैं और उपज घटने का डर सता रहा है. इस समस्या के समाधान के लिए हमने सहायक निदेशक, पौधा संरक्षण, दरभंगा रोमी कुमारी से विशेष जानकारी ली. उन्होंने बताया कि परवल में पीलापन आने के पीछे मुख्य रूप से दो कारण होते हैं.
पहला कारण: खेत में जलजमाव
रोमी कुमारी के अनुसार लगातार बारिश या सिंचाई के बाद पानी का निकास न होने से जड़ों में नमी बनी रहती है. इससे जड़ें सड़ने लगती हैं और पौधा भोजन सही से नहीं ले पाता. नतीजतन लताओं की पत्तियां पीली पड़कर मुरझाने लगती हैं और फल का विकास रुक जाता है.
बचाव का उपाय
अगर समस्या जलजमाव की है तो सबसे पहले खेत में उचित जल निकासी की व्यवस्था करें. खेत के चारों ओर नाली बनाएं ताकि अतिरिक्त पानी बाहर निकल जाए. रोपाई के समय ही क्यारी और नाली पद्धति से खेती करें. इससे जड़ों में हवा का आवागमन बना रहेगा और पौधा स्वस्थ रहेगा.
दूसरा कारण: फल मक्खी का प्रकोप
दूसरा बड़ा कारण फल मक्खी है. यह कीट फसल के शुरुआती दौर में ही हमला करता है. मादा मक्खी नन्हे फल के अंदर अंडे दे देती है. बाद में फल पीला होकर गिरने लगता है और अंदर कीड़े लग जाते हैं.
बचाव का उपाय
फल मक्खी से बचाव के लिए किसान अपने खेतों में ल्यूअर ट्रैप लगा सकते हैं. विशेषज्ञों की सलाह है कि ट्रैप को जमीन से लगभग 4 इंच ऊपर लता के पास टांगें. इस ट्रैप में लगा आकर्षक पदार्थ फल मक्खियों को अपनी ओर खींचता है और वे इसके अंदर फंसकर नष्ट हो जाती हैं. इससे मक्खियों की संख्या शुरुआती दौर में ही नियंत्रित हो जाती है और फल सुरक्षित रहते हैं.
किसानों के लिए जरूरी सलाह
रोमी कुमारी ने किसानों से अपील की कि वे हर 7-10 दिन पर खेत का निरीक्षण करें. पीली पत्तियों और गिरते फलों को तुरंत तोड़कर नष्ट कर दें. संतुलित मात्रा में खाद दें और फसल चक्र अपनाएं. समय पर पहचान और सही उपाय से परवल की फसल को बचाया जा सकता है. उन्होंने कहा कि घबराने की जरूरत नहीं है. अगर समय पर जल निकासी और ट्रैप का उपयोग किया जाए तो किसान अच्छी पैदावार ले सकते हैं.