दिवाली की छुट्टियां, महज 700 किमी दूरी, किराए ने खाली कर दी जेब, 19000 में एयर तो 7000 रुपये में बस की टिकट
Raisina News Desk- अक्टूबर 30, 2026 01:44 PM IST
दिवाली के त्यौहार पर हर कोई अपने घर जाना चाहता है. परिवार के साथ सालभर के इस त्यौहार और खुशियों को सेलिब्रेट करना चाहता है, लेकिन इन खुशियों पर अब किराए ने ग्रहण लगा दिया है. आसमान पर पहुंचे हवाई और सामान्य रोड ट्रांसपोर्ट के किराए ने लोगों की जेबें खाली कर दी हैं. महज 700 किलोमीटर की दूरी के लिए हवाई किराया 19000 रुपये है तो प्राइवेट स्लीपर बसों के किराया 7000 रुपये तक पहुंच गया है. किराए में लगी इस आग ने दिवाली की रौनक फीकी कर दी है.
इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक दिवाली की छुट्टियां नजदीक आने के साथ पुणे से नागपुर जाने वाले यात्रियों के लिए काफी मुश्किलें हो रही हैं. इन दो शहरों की यात्रा का खर्च आसमान छू रहा है. त्यौहार के लिए ट्रेनों के टिकट लगभग खत्म हो चुके हैं, जबकि हवाई जहाज का किराया 19 हजार रुपये से ऊपर और निजी स्लीपर बस का किराया 7 हजार रुपये तक पहुंच गया है.
किराए में लगी इस आग से विदर्भ के उन हजारों लोगों के सामने मुश्किल पैदा हो गई है जो पुणे में नौकरी या पढ़ाई कर रहे हैं. वे त्योहार पर घर लौटना चाहते हैं, लेकिन सस्ती यात्रा का कोई विकल्प ही नहीं बचा है. दिवाली 8-9 नवंबर को है. नवंबर के पहले हफ्ते में पुणे-नागपुर रूट पर चलने वाली लगभग सभी ट्रेनें पूरी तरह बुक हो चुकी हैं. 5 और 7 नवंबर को करीब छह ट्रेनें चल रही हैं, जबकि 6 नवंबर को सात ट्रेनें उपलब्ध हैं. लेकिन इन सबके टिकट पहले ही बिक चुके हैं.
इतने किराए में पहुंच जाएं दुबई
पुणे और नागपुर के लिए हवाई जहाज का विकल्प भी राहत नहीं दे रहा. क्योंकि जितना किराया इन दो शहरों के बीच में आ रहा है, उतने में कोई व्यक्ति दुबई जा सकता है. देर रात या सुबह-सुबह वाली उड़ानों का किराया करीब 12 हजार रुपये है. लेकिन सुविधाजनक समय वाली उड़ानों का एकतरफा किराया 19 हजार रुपये से ऊपर पहुंच गया है.
बस संचालक उठा रहे फायदा
त्योहार पर मची इस आपाधापी में निजी स्लीपर बस संचालक मौके का फायदा उठा रहे हैं. वे एक यात्री से 4 हजार से 7 हजार रुपये तक ले रहे हैं. यात्रियों ने बताया कि पिछले साल की दिवाली के मुकाबले किराया करीब 2 हजार रुपये बढ़ गया है. इससे यात्रियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है.
पुणे में काम करने वाले एक आईटी प्रोफेशनल ने बताया, “हर साल यही हालत होती है. सरकार जानती है कि दिवाली में किराए आसमान छूते हैं, तो अतिरिक्त बसें क्यों नहीं चलाती या एयरलाइन और निजी ऑपरेटरों के किराए पर नियंत्रण क्यों नहीं लगाती? हम नियमित किराए से दोगुना देने को तैयार हैं, लेकिन तीन-चार गुना वसूलना बर्दाश्त के बाहर है.” उन्होंने सवाल किया कि छात्र, जो परिवार पर निर्भर होते हैं, इतनी महंगी यात्रा कैसे कर सकते हैं.
कारपूलिंग ढूंढ रहे लोग
सामान्य यात्रा के विकल्प महंगे होने के कारण कई कामकाजी लोग कारपूलिंग और शेयर कैब का सहारा ढूंढ रहे हैं. पुणे और मुंबई से विदर्भ जाने वाले यात्रियों के लिए समृद्धि एक्सप्रेसवे एक बड़ा सहारा बन गया है. हालांकि सड़क पर वाहनों की संख्या बढ़ने की आशंका को देखते हुए हाईवे ट्रैफिक पुलिस और महाराष्ट्र स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एमएसआरडीसी) ने सुरक्षा के कई कदम उठाए हैं. गश्त बढ़ाई गई है, वाहनों की जांच हो रही है और अतिरिक्त निगरानी रखी जा रही है ताकि दुर्घटनाएं कम हों.