जामिया में छात्रों की भूख हड़ताल खत्म, कई मुद्दों पर बनी सहमति, 2 नवंबर से फिर शुरू होगी ऑफलाइन क्लास

जामिया में छात्रों की भूख हड़ताल खत्म, कई मुद्दों पर बनी सहमति, 2 नवंबर से फिर शुरू होगी ऑफलाइन क्लास

जामिया में खत्म हुई छात्रों की हड़तालImage Credit source: PTI

जामिया में छात्रों ने भूख हड़ताल खत्म कर दी है. छात्र संघ चुनाव की मांग को लेकर कई दिनों से छात्र भूख हड़ताल पर बैठे हुए थे. VC, रजिस्ट्रार और छात्रों के बीच कई मुद्दों पर सहमति बनी, जिसके बाद जामिया प्रशासन की ओर से छात्र को भूख हड़ताल खत्म करने की बात कही और आखिर में छात्रों ने स्ट्राइक कॉल ऑफ की है.

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के रजिस्ट्रार महताब आलम रिजवी ने कहा, ‘हमें छात्रों की ओर से तीन लिखित मांगें मिलीं. उनकी पहली मांग थी कि संविधान का ड्राफ्ट 15 मई 2027 तक पूरा कर लिया जाए. इसके साथ ही उन्होंने मांग की कि चुनाव लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुसार कराए जाएं. हमने इस मांग को स्वीकार कर लिया और पुष्टि की कि हम 15 मई तक संविधान का ड्राफ्ट फाइनल कर देंगे. उनकी दूसरी मांग लिंगदोह समिति के दिशानिर्देशों से जुड़ी थी, जिनके अनुसार नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने के 6 सप्ताह के भीतर चुनाव हो जाने चाहिए. हमने इस शर्त को भी पूरी तरह मान लिया.

छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई रद्द

महताब आलम रिजवी ने आगे बताया कि छात्रों की तीसरी मांग उन छात्रों के बारे में थी, जिन्हें विरोध-प्रदर्शन के दौरान निष्कासित किया गया था, निलंबित किया गया था या जिन्हें ‘शो-कॉज’ नोटिस दिए गए थे. हमने ऐसी सभी अनुशासनात्मक कार्रवाइयों को रद्द कर दिया है. इसके साथ ही हमने इस बात पर जोर दिया कि जामिया के छात्रों के रूप में हमें अपने संस्थान और अपने देश की अखंडता के लिए एकजुट रहना चाहिए और मिलकर काम करना चाहिए, ताकि जामिया और भारत दोनों ही लगातार प्रगति करते रहें.

2 नवंबर से फिर शुरू होंगी ऑफलाइन क्लासेज

जामिया में अब 2 नवंबर से फिर ऑफलाइन कक्षाएं और परीक्षाएं शुरू हो जाएंगी. कुलसचिव कार्यालय ने इसका आदेश जारी किया. स्नातक और स्नातकोत्तर दोनों की कक्षाएं विभाग और संकाय की समय-सारणी के अनुसार ऑफलाइन चलेंगी. वहीं, मिड-सेमेस्टर, एंड-सेमेस्टर और अन्य निर्धारित परीक्षाएं केवल ऑफलाइन मोड में होंगी. छात्रों को नियमित अटेंडेंस देनी होगी और विश्वविद्यालय के शैक्षणिक नियमों का पालन करना होगा.

डीन, विभागाध्यक्षों और केंद्र निदेशकों को कक्षा-कक्ष, बैठने की व्यवस्था और निरीक्षण की तैयारी करने को कहा गया है और साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि आदेश का पालन न करने से होने वाली असुविधा की जिम्मेदारी विश्वविद्यालय की नहीं होगी. आदेश कुलपति की स्वीकृति से जारी हुआ है और इस पर कुलसचिव प्रो. मो. महताब आलम रिजवी के हस्ताक्षर हैं.

छात्रों के अहिंसक संघर्ष को सलाम

केसी वेणुगोपाल ने एक्स पर लिखा कि जामिया मिलिया इस्लामिया केंद्रीय विश्वविद्यालय के छात्रों की जीत हुई है. आखिरकार, फासीवादी ताकतों को छात्र शक्ति के सामने झुकना ही पड़ा. लोकतंत्र के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ा, लेकिन अंततः जीत हुई. बीजेपी के नियंत्रण वाले प्रशासन ने छात्रों को बांटने और बदनाम करने के लिए हर हथकंडा अपनाया. उन्होंने तो इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन करने वाले NSUI नेताओं को तिहाड़ जेल तक भेज दिया. हम छात्रों के अहिंसक संघर्ष को सलाम करते हैं. यह उन लोगों के लिए एक कड़ा सबक होना चाहिए जो युवाओं की आवाज़ को दबाने की कोशिश करते हैं.

इनपुट: शालिनी वाजपेयी

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