दिल्ली की एक अदालत छह नवंबर को दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के खिलाफ दर्ज शिकायत मामले में आदेश सुना सकती है। इस शिकायत में रेखा गुप्ता के खिलाफप्राथमिकी दर्ज करने की मांग की गई है। उन पर दिल्ली सरकार के अधिकारियों की तुलना भगवान हनुमान से करने का आरोप है।
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार ने 29 अक्तूबर को अपना आदेश दिया था। शिकायतकर्ता ने दिल्ली पुलिस द्वारा सौंपी गई स्थिति रिपोर्ट के जवाब में अपना लिखित पक्ष पेश किया है। मजिस्ट्रेट ने दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनीं। मामले को 6 नवंबर को आदेश के लिए सूचीबद्ध किया गया है। इससे पहले 3 अक्तूबर को, मजिस्ट्रेट ने कश्मीरी गेट पुलिस स्टेशन के एसएचओ से स्थिति रिपोर्ट मांगी थी। शिकायतकर्ता के अनुसार, रेखा गुप्ता ने 23 सितंबर, 2025 को ये टिप्पणियां की थीं। यह कश्मीरी गेट आईएसबीटी पर उत्तर प्रदेश के बड़ौत के लिए डीटीसी बस सेवा की शुरुआत के दौरान हुआ था।
पुलिस ने 15 अक्तूबर को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। रिपोर्ट में कहा गया कि प्राथमिकी दर्ज करने का कोई आधार नहीं है। इसमें कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनता है। पुलिस रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि पूरा वीडियो देखने पर शिकायतकर्ता ने जानबूझकर वीडियो के कुछ हिस्सों को हटाया। इसका उद्देश्य संदर्भ को बदलना और तथ्यों को अलग तरह से पेश करना था। रिपोर्ट के अनुसार, उन वाक्यों या शब्दों से किसी देवता या भक्तों की धार्मिक आस्था का अपमान नहीं होता है।
राजनीतिक प्रतिशोध की आशंका
रिपोर्ट में कहा गया कि शिकायतकर्ता ने जानबूझकर रेखा गुप्ता द्वारा अधिकारियों के लिए कही गई तारीफ और सम्मान भरी बातों को हटा दिया। इसके बजाय मामले को एक अलग रंग और संदर्भ दिया गया। रिपोर्ट में आगे कहा गया कि शिकायतकर्ता रामनिवास शर्मा ने खुद को डीपीसीसी के आरटीआई विभाग का अध्यक्ष बताया है। वह ‘ऑल इंडिया सीमांचल जन विकास परिषद’ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी हैं। इसलिए, पुलिस को लगता है कि यह शिकायत एक सुनियोजित राजनीतिक प्रतिशोध है।