ईशा के ‘सेव सॉइल’ मॉडल फार्म पर इंटरनेशनल वर्कशॉप, 10 देशों के 46 प्रतिभागियों ने ली जैविक खेती की ट्रेनिंग
Raisina News Desk- अक्टूबर 31, 2026 02:18 AM IST
मिट्टी के जीवित पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) को बहाल करने के लिए दुनिया भर के किसानों और पर्यावरणविदों को प्रशिक्षित करने वाले वैश्विक संगठन ‘सॉइल फूड वेब स्कूल’ (SFW) ने कोयंबटूर में ईशा के ‘सेव सॉइल रीजनरेटिव रिवोल्यूशन’ मॉडल फार्म पर मिट्टी के जीव विज्ञान (सॉइल बायोलॉजी) से जुड़े दो विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया.
इस एक्सेलरेटर वर्कशॉप में भारत, नीदरलैंड, ऑस्ट्रेलिया, ईरान, संयुक्त राज्य अमेरिका और कोस्टा रिका सहित 10 देशों और भारत के 7 राज्यों के 46 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया. इनमें किसान, सलाहकार, परमाकल्चर डिजाइनर, माइक्रोबायोलॉजिस्ट, कृषि-व्यवसाय पेशेवर, एनजीओ नेता और मृदा वैज्ञानिक शामिल थे.
सॉइल फूड वेब फाउंडेशन के कार्यकारी निदेशक इवान बकमैन ने बताया, भारत में पहली बार इस वर्कशॉप का आयोजन करना हमारे लिए एक बड़ा कदम है. सेव सॉइल का जमीनी स्तर पर काम और किसानों के साथ उनका मजबूत जुड़ाव इस सहयोग की मुख्य वजह बना. उनका मॉडल फार्म पहले से ही प्राकृतिक खेती के तरीकों को अपना रहा है, जो हमारे प्रतिभागियों के लिए सीखने और व्यावहारिक अभ्यास करने के लिए सबसे मुफीद जगह रही.
सॉइल फूड वेब स्कूल की एडवांस्ड एजुकेशन डायरेक्टर लॉयडा ने बताया कि विभिन्न प्रकार की खाद बनाने की रेसिपी पर एक साथ काम करने से प्रतिभागियों को यह समझने में मदद मिली कि अलग-अलग परिस्थितियों में मिट्टी और खाद का व्यवहार कैसे बदलता है और उसमें क्या सुधार करने की जरूरत होती है.
ईशा द्वारा शुरू किए गए वैश्विक ‘सेव सॉइल’ (मिट्टी बचाओ) आंदोलन के हिस्से के रूप में ये मॉडल फार्म व्यावहारिक प्रदर्शन और अनुसंधान केंद्र के रूप में काम करते हैं. यहां पेड़ों पर आधारित और प्राकृतिक खेती के तरीकों का परीक्षण किया जाता है, ताकि मिट्टी में जैविक तत्वों को वापस लाया जा सके और खेती को किसानों के लिए एक मुनाफे का सौदा बनाया जा सके. इस वैश्विक कार्यशाला से सीखकर निकले प्रतिभागी अब इन व्यावहारिक तकनीकों को अपने-अपने देशों, खेतों और समुदायों में स्थानीय परिस्थितियों के हिसाब से लागू करेंगे.