अब सड़क की लड़ाई में भी आगे निकलने को तैयार TMC का बागी गुट, शुभेंदु सरकार के खिलाफ उतरेगा | Rebel TMC Plans Statewide Protests Against UCC and Anti-Gangster Law Amid Power Struggle With Mamata Banerjee Camp



विधानसभा और संगठन के बाद अब बागी टीएमसी (TMC) अपनी ताकत का प्रदर्शन सड़कों पर करने की तैयारी में है. बीजेपी सरकार के गैंगस्टर विरोधी कानून और समान नागरिक संहिता (UCC) के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के जरिए बागी गुट खुद को पार्टी का असली हकदार साबित करने की कोशिश करेगा. रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट 21 जुलाई के ‘शहीद दिवस’ कार्यक्रमों के बाद इस नए गैंगस्टर विरोधी कानून और प्रस्तावित यूसीसी (UCC) के खिलाफ राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करने की योजना बना रहा है. पिछले हफ्ते समानांतर राज्य और जिला कमेटियों की घोषणा के बाद यह उनका पहला बड़ा सार्वजनिक प्रदर्शन होगा. यह सब एक सोची-समझी रणनीति के तहत हो रहा है.

PTI की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दिनों में बागियों ने ममता बनर्जी गुट के लिए अपनी चुनौती लगातार बढ़ाई है. पहले बागी गुट ने ममता बनर्जी को पार्टी अध्यक्ष पद से हटाकर सीनियर विधायक अरूप रॉय को नया अध्यक्ष चुना. एक समानांतर नेशनल वर्किंग कमेटी का गठन किया. इसके बाद चुनाव आयोग से खुद को ‘असली’ तृणमूल कांग्रेस घोषित करने की मांग की. हाल ही में समानांतर राज्य, जिला और फ्रंटल संगठनों की कमेटियों की घोषणा की.

अब इस आंदोलन के जरिए बागी गुट यह देखना चाहता है कि क्या उनके सांगठनिक दावों को जनता का जमीनी समर्थन भी हासिल है या नहीं.

टाइमिंग भी कमाल की चुनी

इस प्रदर्शन की टाइमिंग भी खास चुनी गई है. इस बार का 21 जुलाई ‘शहीद दिवस’, जो 1998 में पार्टी बनने के बाद से टीएमसी का सबसे बड़ा सालाना पॉलिटिकल मूवमेंट रहा है, दोनों विरोधी गुटों द्वारा अलग-अलग मनाया जाएगा. यह दिखाता है कि पार्टी के भीतर का विवाद अब पार्टी की पहचान और विरासत की असली लड़ाई में बदल चुका है.

21 जुलाई की रैली खत्म होने के बाद, रीताब्रत गुट ब्लॉक लेवल तक बढ़ाने से पहले जिला लेवल पर विरोध प्रदर्शन शुरू करने की योजना बना रहा है. उन्हें उम्मीद है कि वे यह देख पाएंगे कि TMC ने लगभग तीन दशकों में कड़ी मेहनत से जो जमीनी नेटवर्क बनाया है, वह पैरेलल लीडरशिप के साथ बदल रहा है या नहीं.

विपक्ष के नेता रीताब्रत बनर्जी ने कहा, ‘राजनीति केवल विधानसभा तक सीमित नहीं रह सकती. हम सदन के भीतर अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे, लेकिन लोगों के मुद्दों पर सड़क पर उतरकर लड़ना होगा.’

गैंगस्टर विरोधी कानून पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि संगठित अपराध के खिलाफ कार्रवाई का कोई विरोध नहीं करता, लेकिन पुलिस और प्रशासन को असीमित अधिकार देना खतरे से खाली नहीं है. वहीं यूसीसी को लेकर उनका कहना था कि यह भारत की ‘विविधता में एकता’ के खिलाफ है.

क्यों हो रहा है विरोध प्रदर्शन?

यह पूरा विवाद बीजेपी सरकार के दो बड़े कदमों के कारण शुरू हुआ है. बंगाल विधानसभा ने हाल ही में असामाजिक गतिविधियों की रोकथाम से जुड़ा कानून और ‘पब्लिक सेफ्टी एक्ट’ में संशोधन पारित किया है, जो राज्यपाल की मंजूरी के बाद लागू होने वाला है. 

इसके अलावा सरकार ने यूसीसी का मसौदा तैयार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज रंजना देसाई की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई है. बागी गुट इस कमेटी के सामने अपने सुझाव रख सकता है और साथ ही जनता को इसके खिलाफ जागरूक भी करेगा.

क्या बोली बीजेपी?

बागी टीएमसी के विरोध को लेकर बीजेपी की भी प्रतिक्रिया सामने आई है. बंगाल बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा कि गैंगस्टर विरोधी कानून का मकसद संगठित अपराध के नेटवर्क को खत्म करना है, जो पिछली सरकारों में फला-फूला. वहीं यूसीसी का उद्देश्य सभी समुदायों के लिए समान नागरिक अधिकार सुनिश्चित करना है.

दिलचस्प बात यह है कि बागियों के विरोध के मुद्दे काफी हद तक ममता बनर्जी के गुट से मिलते-जुलते हैं. ममता गुट ने भी इन दोनों कदमों का विरोध किया है. लेकिन उन्होंने बागियों के इस आंदोलन को नाटक बताया है. सीनियर टीएमसी नेता कुणाल घोष ने कहा कि हम दोनों ही कानूनों का विरोध करते हैं, लेकिन रितब्रत गुट का यह प्रदर्शन सिर्फ दिखावा है. वे बीजेपी की ‘बी-टीम’ की तरह काम कर रहे हैं.

टीएमसी के दोनों गुटों के बीच क्यों टकराव?

टीएमसी के दोनों गुट इन कानून पर एक जैसे ही मत रखते हैं, लेकिन फिर भी दोनों के बीच टकराव की स्थिति देखने को मिल रही है. यह बताता है कि दोनों गुटों के बीच अब विचारधारा की नहीं, बल्कि राजनीतिक साख और संगठन पर कब्जे की लड़ाई है.

बागी गुट ने पिछले महीने दावा किया था कि विपक्ष के नेता पद के चुनाव में टीएमसी के 80 में से 58 विधायकों का समर्थन उन्हें हासिल है और अब यह संख्या बढ़कर 65 हो गई है. संसद में भी उनका दावा है कि पार्टी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसद उनसे जुड़ चुके हैं और नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) के साथ विलय करके वे बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) गठबंधन में शामिल हो गए हैं.

बागी रितब्रत गुट के लिए यह आंदोलन केवल दो सरकारी कानूनों का विरोध नहीं है, बल्कि यह साबित करने की पहली बड़ी कोशिश है कि जो बगावत विधानसभा और संगठन में शुरू हुई थी, वह सड़कों पर भी पकड़ रखती है, वही सड़कें जहां से तृणमूल कांग्रेस का जन्म हुआ था. चुनाव आयोग के फैसले से ज्यादा, जनता के बीच होने वाली यह परीक्षा दोनों गुटों का भविष्य तय करेगी.

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