कमज़ोर मॉनसून का असर: जून-जुलाई में देश के 42% ज़िलों में बारिश की कमी, खरीफ फ़सलों की बुआई प्रभावित

दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सीजन के जून और जुलाई महीनों के दौरान देश के 741 ज़िलों में से 311 ज़िलों में बारिश की कमी दर्ज की गई है. भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी ये आंकड़े दर्शाते हैं कि कमज़ोर मॉनसून के कारण इन दो महीनों में देश के 42% ज़िलों में औसत से कम वर्षा हुई है.

भारत मौसम विज्ञान विभाग ने शुक्रवार को देशभर के ज़िलों में दर्ज की गई बारिश के आकलन पर आधारित एक रिपोर्ट जारी की. मॉनसून की बारिश के वितरण के लिए कुल 741 ज़िलों का आकलन किया गया. 

  • कम बारिश: 311 ज़िले (42%)-यह आंकड़ा देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश को दर्शाता है.
  • सामान्य: 273 ज़िले (37%)-एक-तिहाई से अधिक ज़िलों में सामान्य बारिश हुई.
  • अधिक बारिश: 69 ज़िलों (9%) में सामान्य से अधिक बारिश हुई.
  • बहुत कम बारिश: 49 ज़िलों (7%) में सामान्य से काफ़ी कम बारिश दर्ज की गई.
  • बहुत अधिक बारिश: 32 ज़िलों (4%) में सामान्य से काफ़ी अधिक बारिश हुई.

हालांकि, जून के मुकाबले जुलाई के दौरान मॉनसून की स्थिति में काफी सुधार देखने को मिला है. सामान्य या उससे अधिक बारिश वाले ज़िलों की संख्या जून के 30% (224 ज़िले) से बढ़कर जुलाई में 53% (388 ज़िले) हो गई, जबकि कम और बहुत कम बारिश वाले ज़िलों की संख्या 69% (508 ज़िले) से घटकर 46% (344 ज़िले) रह गई. IMD के अनुसार, इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के पहले दो महीनों (जून-जुलाई) के दौरान मॉनसून की बारिश में कुल 13% की कमी दर्ज की गई है. 

787.37 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फसलों की बुआई

इसका सीधा असर देश में महत्वपूर्ण खरीफ फसलों की बुआई पर पड़ रहा है. कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 24 जुलाई 2026 तक देशभर में खरीफ सीजन के दौरान कुल 787.37 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फसलों की बुआई हुई है, जो पिछले साल के मुकाबले -38.82 लाख हेक्टेयर (-4.70%) कम है. वहीं, 24 जुलाई 2025 तक देशभर में 826.19 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुआई हो चुकी थी.

इस अवधि में पिछले साल की तुलना में 24 जुलाई 2026 तक चावल की बुआई में 6.19 लाख हेक्टेयर (-2.57%) की गिरावट आई है. मुख्य दलहन फसलों की बुआई में 6.90 लाख हेक्टेयर (-7.54%) की कमी दर्ज की गई है, जबकि तिलहन फसलों की बुआई का दायरा भी 3.45 लाख हेक्टेयर (-2.07%) घट गया है.

शुक्रवार को मौसम विभाग ने रिपोर्ट जारी कर आगाह किया है कि मॉनसून के शेष दो महीनों अगस्त और सितंबर के दौरान भी देश के अधिकांश हिस्सों में औसत से कम बारिश होने की संभावना है. ऐसे में स्पष्ट है कि यदि मॉनसून की कमी से जूझ रहे पूर्वी, उत्तर-पूर्वी और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में अगस्त के दौरान बारिश की स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो खरीफ फसलों की बुआई और पैदावार पर इसका प्रतिकूल असर और गहरा सकता है. 

जून-जुलाई में 13% कम बारिश, अगस्त-सितंबर में भी कमजोर रहेगा मॉनसून, मौसम विभाग का अलर्ट


Prev Post
Next Post