केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल जाएंगे अमेरिका, ट्रेड डील पर होगी चर्चा; किस पर बनी अंडरस्टैंडिंग?

केंद्र सरकार में वाणिज्य और उद्योग मंत्री पियूष गोयल स‍ितंबर 2026 के आखिर में होने वाली G20 बैठक में शामिल होने के लिए अमेरिका जाएंगे. यह जानकारी वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने दी. उन्‍होंने कहा- ‘हमें उम्मीद है कि वहां उनके अमेरिकी समकक्षों के साथ द्विपक्षीय बैठकें होंगी. इस दौरान भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते समेत सभी मुद्दों पर चर्चा होगी. बातचीत के एजेंडे में BTA को लेकर चल रही बातचीत निश्चित रूप से शामिल होगी’. 

‘टैरिफ में खास फायदा दे अमेरिका’  

इससे पहले 3 सितंबर 2026 को केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने एक महत्वपूर्ण बयान में कहा था कि जब वॉशिंगटन भारतीय निर्यातकों को प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले टैरिफ में खास फायदा देगा, तब भारत अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते को अंतिम रूप देगा. 

मंत्री गोयल ने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर एक वर्कशॉप में बोलते हुए कहा था- जैसे ही अमेरिका हमें खास फायदा देगा, हम BTA को अंतिम रूप देंगे और व्यापार समझौते की घोषणा करेंगे. भारत की टैरिफ दरें प्रतिस्पर्धियों को मिलने वाली दरों से बेहतर या शून्य होनी चाहिए.’ 

30 ट्रिलियन डॉलर का बाजार खुलेगा

वाणिज्य मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, भारत और अमेरिका के बीच framework deal पर अंडरस्टैंडिंग बन गई है. उम्मीद है कि इस साल के अंत तक अमेरिका के साथ इस डील पर साइन हो जाएं. भारत सरकार को उम्मीद है कि इससे भारतीय निर्यातकों, खासकर MSME, किसानों और मछुराहों के लिए 30 ट्रिलियन डॉलर का बाजार खुलेगा. निर्यात में बढ़ोतरी से महिलाओं और युवाओं के लिए लाखों नए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे.

जल्‍द से जल्‍द पूरा करने की सिफारिश

पिछले महीने वाणिज्य संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने संसद में पेश अपनी रिपोर्ट ‘भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों के मूल्यांकन’ में भारत सरकार से भारत-अमेरिका प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को देशहित को पूरी तरह से सुरक्षित रखते हुए जल्द से जल्द पूरा करने की सिफारिश की थी.

संसदीय समिति ने रिपोर्ट में क्‍या कहा था?

‘समिति का मानना है कि विभाग को ‘मिशन 500’ पहल के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए एक समय-सीमा वाला रोडमैप भी तैयार करना चाहिए. इसमें वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार को बढ़ावा देना, निवेश को प्रोत्साहित करना, ‘ट्रांसफॉर्मिंग द रिलेशनशिप यूटिलाइजिंग स्ट्रेटेजिक टेक्नोलॉजी’ (TRUST) फ्रेमवर्क के तहत अहम तकनीकों में सहयोग मजबूत करना, सप्लाई चेन को अधिक लचीला-बेहतर बनाना और भारतीय निर्यातकों के सामने आने वाली टैरिफ और नॉन-टैरिफ मार्केट एक्सेस की बाधाओं को दूर करना शामिल होना चाहिए.”

ये भी पढ़ें…

ट्रंप के 100% टैरिफ दांव से अमेरिका को ही होगा नुकसान, NDTV से बोले नीति आयोग के उपाध्यक्ष

भारत-अमेरिका ट्रेड डील: पीयूष गोयल ने बता दी शर्त


Prev Post
Next Post