क्या हैं 'गोल्डन क्रिसेंट' और 'गोल्डन ट्राएंगल'? जिसे ड्रग्स माफिया ने बनाया भारत में तस्करी का रूट
Raisina News Desk- अगस्त 03, 2026 01:55 AM IST

नई दिल्ली:
नशे के खिलाफ केंद्र सरकार ने एक बड़ा अभियान शुरू किया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘नशा मुक्त युवा’ मूवमेंट शुरू किया. यह अभियान 100 हफ्ते तक चलेगा. पीएम मोदी ने कहा कि आज से ‘नशा मुक्त युवा’ अभियान शुरू हो रहा है और आने वाले 100 रविवार नशा मुक्त भारत की दिशा में 100 मजबूत कदम होंगे.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश और जीवन के लिए खुद को नशा मुक्त रखना बहुत जरूरी है. उन्होंने कहा कि नशा फोकस को भटकाता है, और धीरे-धीरे युवा को उसके अपने सपनों से दूर ले जाता है.
पीएम मोदी ने कहा, ‘नशा केवल शरीर को नुकसान नहीं पहुंचाता, नशा एक मां की मुस्कान छीन लेता है. नशा एक पिता के सपनों को चूर-चूर कर देता है. एक बहन की राखी की उम्मीद को कमजोर कर देता है. एक छोटे भाई का आदर्श छीन लेता है. घर के बुजुर्ग हर दिन इस दर्द को जीते हैं कि उनका अपना बच्चा धीरे-धीरे खुद को खो रहा है, खुद को गला रहा है, तिल-तिल गल रहा है, आंखों के सामने उसे बर्बाद होते देख रहे हैं और जब परिवार में, समाज में ऐसा होता है और कहीं न कहीं, राष्ट्र की शक्ति भी कमजोर पड़ जाती है और इसलिए दुश्मन देश भी षड्यंत्र करके हमारे देश के युवाओं को इस नशे की लत में खींचने के लिए कोई कोशिश बाकी नहीं रखते हैं. ड्रग्स सप्लाई कर-करके कमाई करना और हमारे जैसे देश को तबाह करना, यह भी उनकी आतंकी साजिश का हिस्सा होता है और इसलिए हमें हर एक युवा को नशे के चंगुल में फंसने से बचाना है.’
युवाओं को नशे से दूर रखना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि हर 35 से 40 युवाओं की जान नशे के कारण जा रही है. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के मुताबिक, 2024 में ड्रग्स और शराब के कारण 13,955 की मौत हुई थी. इनमें से 12,977 मौतें ड्रग्स या शराब की लत के कारण आत्महत्या से हुई थीं, जबकि 978 लोगों की जान ड्रग ओवरडोज से हुई थी.
लेकिन ये नशा भारत में आता कहां से है? ये जानने से पहले ये जानते हैं कि भारत में कितनी बड़ी आबादी नशे की चपेट में है?
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की 2025 की एनुअल रिपोर्ट की मानें तो करोड़ों भारतीय नशे की चपेट में हैं.
NCB की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 3.1 करोड़ से ज्यादा लोग कैनबीज (हशीश, गांजा या भांग वगैरह) और 2.3 करोड़ से ज्यादा लोग ओपियोइड (अफीम, हेरोइन) का नशा करते हैं. इसके अलावा 1.18 करोड़ लोग सिडेटिव या सिंथेटिक ड्रग्स का सेवन करते हैं.
रिपोर्ट बताती है कि भारत की लगभग 4% आबादी कैनबीज और 3% अफीम का नशा करती है. सबसे ज्यादा नशा इन्हीं दो चीजों का है. इसके अलावा, 16 करोड़ से ज्यादा लोग शराब पीते हैं.
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लेकिन ये नशा आता कहां से है?
भारत में जिन दो रास्तों से ड्रग्स आता है, उसे ‘गोल्डन क्रिसेंट’ और ‘गोल्डन ट्राएंगल’ कहते हैं. केंद्र सरकार इसे ‘डेथ क्रिसेंट’ और ‘डेथ ट्राएंगल’ भी कहती है.
‘गोल्डन क्रिसेंट’ भारत के पश्चिम में है, जिसमें पाकिस्तान, अफगानिस्तान और ईरान आते हैं. यहां से मुख्य रूप से हेरोइन, हशीश और एटीएस जैसे ड्रग्स आते हैं. NCB की रिपोर्ट बताती है कि तालिबान ने अफीम पर बैन लगा दिया था लेकिन वहां पहले से जमा 13,200 टन का स्टॉक अभी भी सप्लाई होता है. पाकिस्तान से सीमा लगने के कारण पंजाब, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों में ड्रग्स तस्करी होती है.
NCB के मुताबिक, 2025 में देशभर में 3,567 किलो हेरोइन जब्त की गई थी, जिसमें से 2,086 किलो यानी 58% हेरोइन अकेले पंजाब में जब्त हुई थी. ये वो हेरोइन थी जो पाकिस्तान से यहां पहुंची थी.
वहीं, ‘गोल्डन ट्राएंगल’ भारत के पूर्व में है, जिसमें म्यांमार, थाईलैंड और लाओस शामिल हैं और यहां से मेथामफेटामाइन जैसे सिंथेटिक ड्रग्स की तस्करी होती है. सबसे ज्यादा तस्करी म्यांमार से होती है. 2024 में म्यांमार में मेथामफेटामाइन का 995 टन उत्पादन हुआ था, जिससे सप्लाई और बढ़ गई थी.
इससे पूर्वोत्तर के राज्यों में ड्रग्स की समस्या बढ़ती है. 2025 में NCB ने 3,485 किलो एटीएस जब्त किया था, जिसमें से 42% यानी 1,477 किलो सिर्फ मिजोरम से जब्त किया गया था. वहीं, मणिपुर से 535 किलो, दिल्ली से 454 किलो, और गुजरात से 308 किलो की जब्ती हुई थी.
तस्करों ने ड्रग्स की तस्करी के लिए नए-नए तरीके खोज निकाले हैं. NCB ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि ड्रोन से ड्रग तस्करी सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरी है. ये तस्करी पाकिस्तान से होती है.
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल ड्रोन से ड्रग तस्करी के 305 मामले सामने आए थे, जिनमें 408 किलो ड्रग्स की सप्लाई की गई थी. 2024 की तुलना में ये 98% ज्यादा थी. सबसे ज्यादा तस्करी पंजाब में होती है. अकेले पंजाब में ड्रोन से तस्करी से 298 मामले सामने आए थे, जिनमें 461 किलो ड्रग्स की सप्लाई हुई थी.
ड्रोन के अलावा कुरियर और पार्सल के जरिए भी ड्रग्स की तस्करी चिंता बढ़ा रही है. हालांकि, कुरियर और पार्सल से होने वाली ड्रग्स की सप्लाई में कमी भी आई है. 2021 में 250 मामले सामने आए थे, जिनमें 1,557 किलो ड्रग्स की सप्लाई हुई थी. 2025 में 174 मामले सामने आए, जिनमें 972 किलो ड्रग्स की सप्लाई हुई.
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NCB की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में देशभर में ड्रग तस्करी के 1,48,063 मामले दर्ज किए गए थे, जिनमें 1,83,675 लोगों को गिरफ्तार किया गया था. गिरफ्तार होने वालों में 747 विदेशी नागरिक थे.
गिरफ्तार आरोपियों के पास से एजेंसियों ने 12,409 क्विंटल की ड्रग्स जब्त की थी, जिसकी कीमत 18,227 करोड़ रुपये थी. 2024 की तुलना में इसमें काफी गिरावट आई थी. 2024 में एजेंसियों ने 27,524 करोड़ की कीमत की 13,306 क्विंटल ड्रग्स जब्त की थी.
NCB की रिपोर्ट बताती है कि 2025 में देशभर में 6.28 लाख किलो से ज्यादा गांजा जब्त हुआ था. इसके अलावा हशीश (5,407 किलो), अफीम (8,094 किलो), मॉर्फिन (227 किलो), हेरोइन (3,567 किलो), कोकिन (226 किलो), एटीएस (3,485 किलो) और मेफेड्रोन (852) की जब्ती हुई थी.
NCB ने बताया कि 2025 में 778 क्विंटल ड्रग्स को नष्ट किया गया, जिसकी कीमत 3,889 करोड़ रुपये थी.
ड्रग्स तस्करी में NCB का कन्विक्शन रेट 65% से ज्यादा है. 2025 में 203 मामलों का ट्रायल पूरा हुआ, जिनमें से 131 मामलों में दोषी को सजा सुनाई गई, जबकि 69 मामलों में आरोपी को बरी कर दिया गया. कुल मिलाकर, 2025 में 265 लोगों को सजा हुई जिनमें से 98 दोषियों को 10 साल से ज्यादा की कैद की सजा मिली है. वहीं, 39 दोषियों को 20 साल जेल की सजा सुनाई गई है.
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