जयपुर में रिंग रोड का काम अब रफ्तार से आगे बढ़ रहा है. अदालती प्रक्रियाओं और भूमि मुआवजे से जुड़े विवाद सुलझने के बाद प्रोजेक्ट आखिरी चरण में पहुंच गया है. इसे साल 2004 में हरी झंडी मिली थी, लेकिन कई अड़चनों के चलते मामला फंस गया था. अब भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को तेज गति से आगे बढ़ने के बाद काम जल्दी पूरी होने के आसार है. इससे दिल्ली हाईवे से अजमेर हाईवे को जोड़ने वाला लिंक तैयार हो जाएगा. मेगा प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद दिल्ली से अजमेर, अहमदाबाद और मुंबई की ओर जाने वाले वाहनों को जयपुर शहर में एंट्री नहीं करनी पड़ेगी. साथ ही जयपुर शहर के परकोटे में ट्रैफिक जाम से भी राहत मिलेगी.
इस रोड का दक्षिणी हिस्सा यानी आगरा-अजमेर मार्ग करीब 47 किलोमीटर लंबा है. जबकि दूसरा हिस्सा उत्तरी रिंग रोड परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण चरण है. इसकी लंबाई लगभग 99.35 किलोमीटर होगी. यह रूट जयपुर जिले की 10 तहसीलों के करीब 150 गांवों से होकर गुजरेगा और इन क्षेत्रों की कनेक्टिविटी के साथ-साथ विकास की दिशा भी बदल देगा. आमेर, जमवारामगढ़, बस्सी, कालवाड़, चौमूं और सांगानेर इस परियोजना के प्रमुख क्षेत्र हैं. इनमें सबसे बड़ा और सबसे जटिल हिस्सा आमेर तहसील का है, जहां करीब 26 गांवों की भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है.
प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद, जयपुर के एक छोर से दूसरे छोर तक पहुंचने में महज 35 से 40 मिनट का वक्त लगेगा. दिल्ली से अजमेर के सफर में भी करीब डेढ़ से दो घंटे की बचत होगी. प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, अगले 6 महीनों के भीतर जमीन पर कब्जे और मुआवजे की प्रक्रिया को पूरी कर लिया गया तो 3 साल में जयपुर को एक रिंग रोड का तोहफा मिल जाएगा.

करीब 22 साल पहले प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली, लेकिन हर बार किसी ना किसी वजह से अटक गई.
मौजूदा समय में दिल्ली से अजमेर, अहमदाबाद और मुंबई की ओर जाने वाले हजारों भारी वाहन और कंटेनर शहर के भीतर से गुजरने को मजबूर हैं. इसके लिए उन्हें विश्वकर्मा औद्योगिक क्षेत्र, 22 गोदाम और अजमेर रोड बाईपास जैसे प्रमुख मार्गों का इस्तेमाल करना पड़ता है. रात के समय इन एंट्री पॉइंट्स पर ट्रकों की लंबी कतारें लग जाती हैं, जिससे शहर का यातायात प्रभावित होता है और आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है.
आसान भाषा में समझें तो इस प्रोजेक्ट का प्लान कुछ ऐसा है कि इससे जयपुर के चारों कोनों पर स्थित प्रमुख नेशनल हाईवे एक-दूसरे से सीधे तौर पर जुड़ेगे. इस उत्तरी रिंग रोड का शुरुआती पॉइंट आगरा रोड पर स्थित बगराना को बनाया गया है. बगराना से आगे बढ़ते हुए यह सड़क नायला और लांगड़ियावास जैसे ग्रामीण इलाके बस्सी और जमवारामगढ़ की सीमाओं को पार करेंगे. यह रूट लबाना और अच्रोल के नजदीक पहुंचेगा, जहां यह सीधे दिल्ली-जयपुर नेशनल हाईवे को इंटरसेक्ट करेगा. यहां से आगे बढ़ते हुए पूरा हाईवे चौमूं समेत अन्य ग्रामीण इलाकों से गुजरेगा और सीधे मुख्य अजमेर रोड से कनेक्ट हो जाएगा.
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जयपुर रिंग रोड का काम दो चरणों में जारी है- उत्तरी रिंग रोड और दक्षिणी रिंग रोड
दिल्ली रोड, सीकर रोड, आगरा रोड और अजमेर रोड के मुख्य पॉइंट्स पर ‘मेगा क्लोवरलीफ फ्लाईओवर’ बनाया जा रहा है. इससे किसी भी गाड़ी को हाईवे बदलने के लिए न तो रुकने की जरूरत होगी और ना ही किसी रेड लाइट का सामना करना पड़ेगा.
इस योजना को जमीन पर उतारने के लिए प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए इन 150 गांवों की कुछ जमीनों का चयन किया गया है. इन जमीनों के कन्वर्जन और खरीद-फरोख्त पर तत्काल प्रभाव से पूरी तरह बैन लगा हुआ है. करीब 3,000 करोड़ रुपये के जमीन अधिग्रहण के लिए जिला कलेक्टर और जेडीए कमिश्नर खुद सीधे किसान प्रतिनिधियों के साथ मुआवजे के फॉर्मूले पर काम कर रहे हैं.
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