पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी कलह! पूर्व CM चन्नी की निलंबित नेता से मुलाकात के बाद उठ रहे कई बड़े सवाल

चंडीगढ़:

पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी की दरारें शुक्रवार को और गहरी हो गईं, जब पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने सस्पेंड किए गए पूर्व विधायक मदन लाल जलालपुर के घर जाकर उनसे मुलाकात की. इस कदम को पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के लिए एक सीधे सियासी मैसेज के तौर पर देखा जा रहा है. यह मुलाकात मदन लाल द्वारा वडिंग पर सार्वजनिक रूप से यह आरोप लगाने के कुछ ही घंटों बाद हुई. उन्होंने कहा था कि पार्टी के कामकाज को लेकर चिंताएं उठाने की वजह से उन्हें निशाना बनाया जा रहा है. ऐसे में कांग्रेस आलाकमान की बार-बार दखलंदाजी के बावजूद स्टेट यूनिट के अंदर बढ़ती फूट और उजागर हो गई.

मदन लाल से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बात करते हुए चरणजीत सिंह चन्नी ने पार्टी नेतृत्व के उस फैसले पर सवाल उठाया, जिसके तहत सीनियर नेताओं की चिंताओं को दूर करने के बजाय एक नेता को सस्पेंड कर दिया गया.

चन्नी ने कहा, “यह लड़ाई किसी पद या पार्टी की अध्यक्षता के लिए नहीं है. यह पंजाब के मुद्दों के बारे में है. नेतृत्व को सबको साथ लेकर चलना चाहिए. हमारी असली लड़ाई उन लोगों के खिलाफ है, जो दिल्ली से आकर पंजाब पर राज करना चाहते हैं.” 

चन्नी की इन बातों को आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर हमले और कांग्रेस के अंदर असंतोष के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है.

पंजाब में कमजोर हो रही कांग्रेस?

पार्टी से सस्पेंड किए गए मदन लाल जलालपुर ने आरोप लगाया कि उन्हें सिर्फ इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि उन्होंने संगठन को एकजुट करने की जरूरत पर जोर दिया था. उन्होंने कहा, “मैंने KC वेणुगोपाल या भूपेश बघेल के बारे में कभी भी कोई अपमानजनक शब्द नहीं कहे. वे दोनों सम्मानित नेता हैं. मैंने बस इतना कहा था कि जब से राजा वडिंग को स्टेट चीफ के तौर पर दोबारा नियुक्त किया गया है, पंजाब में कांग्रेस का ग्राफ गिरा है. मेरे खिलाफ ही कार्रवाई क्यों की गई? मुझे तो कारण बताओ नोटिस भी नहीं दिया गया.”

हालांकि, पटियाला में पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक में कांग्रेस के पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल की मौजूदगी में वडिंग ने अनुशासनात्मक कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि मदन लाल को हाल ही में नहीं, बल्कि काफी पहले निलंबित किया गया था. यह कार्रवाई पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने की वजह से की गई थी.

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दिन भर की घटनाओं से पंजाब कांग्रेस के अंदर सत्ता के लिए हो रही खींचतान भी साफ हो गई. जहां पटियाला में पार्टी की ऑफिशियल मीटिंग में वारिंग ने बघेल के साथ मंच साझा किया, वहीं मदन लाल के साथ चन्नी की मीटिंग में पटियाला के सांसद धर्मवीर गांधी और पूर्व मंत्री भारत भूषण आशु समेत कांग्रेस के कई सीनियर नेता शामिल हुए. गौर करने वाली बात यह है कि दोनों नेताओं ने वारिंग के प्रोग्राम में हिस्सा नहीं लिया, जिससे गुटबाजी बढ़ने की धारणा को और बल मिला.

स्टेट लीडरशिप के लिए सियासी शर्मिंदगी बाद में समाना में और बढ़ गई, जहां कांग्रेस वर्कर्स ने एक पार्टी फंक्शन के दौरान वारिंग के खिलाफ नारे लगाए. यह मामला तब सामने आया, जब हाल के हफ्तों में कांग्रेस हाईकमान ने पंजाब यूनिट के अंदर मतभेदों को दबाने की कोशिश की. लेकिन यह थमने के बजाय, अंदरूनी बगावत और तेज होती दिख रही है, जिसमें नाराज नेता अपनी शिकायतें पब्लिक में ले जा रहे हैं.

जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहा है, आपसी फूट बढ़ती नजर आ रही है. यह कांग्रेस पार्टी की सत्ताधारी AAP सरकार के खिलाफ एकजुट चुनौती देने की कोशिशों पर भारी पड़ सकती है.

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