पक्का घर तक नहीं, लेकिन कॉमनवेल्थ में जीता पदक; गोल्डन स्कोर तक लड़ने वाली सागर की यामिनी ने रचा इतिहास

मध्य प्रदेश के सागर जिले की जूडो खिलाड़ी यामिनी मौर्य ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन कर देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है. महिलाओं के 57 किलोग्राम से कम भार वर्ग में यामिनी ने फाइनल तक का शानदार सफर तय किया और रजत पदक अपने नाम किया. हालांकि वह स्वर्ण पदक जीतने से बेहद करीब पहुंचकर चूक गईं. फाइनल मुकाबले में उनका सामना इंग्लैंड की अनुभवी खिलाड़ी और बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 की रजत पदक विजेता एसिल्या टॉपराक से हुआ. दोनों खिलाड़ियों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली और मुकाबला गोल्डन स्कोर तक पहुंचा, जहां यामिनी को हार का सामना करना पड़ा. बावजूद इसके उनकी उपलब्धि भारतीय जूडो के लिए बड़ी सफलता मानी जा रही है.

फाइनल तक पहुंचकर रचा इतिहास

ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में यामिनी मौर्य ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए महिलाओं के 57 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में जगह बनाई. उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में आत्मविश्वास और तकनीकी कौशल का शानदार परिचय दिया.

फाइनल मुकाबले में उनका सामना इंग्लैंड की अनुभवी जूडोका एसिल्या टॉपराक से हुआ, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीत चुकी हैं. मुकाबले की शुरुआत से ही दोनों खिलाड़ियों ने आक्रामक खेल दिखाया और एक-दूसरे को अंक लेने का मौका नहीं दिया.

गोल्डन स्कोर तक चला रोमांचक मुकाबला

यामिनी और टॉपराक के बीच मुकाबला बेहद प्रतिस्पर्धी रहा. निर्धारित समय में कोई भी खिलाड़ी निर्णायक अंक हासिल नहीं कर सकी, जिसके बाद मुकाबला गोल्डन स्कोर में पहुंच गया. मुकाबले के दौरान टॉपराक ने कई बार यामिनी को मैट पर गिराने की कोशिश की, लेकिन भारतीय खिलाड़ी ने शानदार बचाव किया. हालांकि लगातार दबाव के बीच यामिनी को एक पेनल्टी भी मिली.

गोल्डन स्कोर में दोनों खिलाड़ियों के बीच संघर्ष और तेज हो गया. लगभग तीन मिनट तक चले अतिरिक्त समय में टॉपराक लगातार आक्रामक रहीं. आखिरकार एक मौके पर यामिनी से हुई छोटी सी चूक का फायदा उठाते हुए टॉपराक ने इप्पोन के जरिए मुकाबला जीत लिया और स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया.

संघर्षों से भरा रहा यामिनी का सफर

यामिनी मौर्य की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उनका सफर बेहद संघर्षपूर्ण रहा है. सागर जिले के एक साधारण परिवार से आने वाली यामिनी ने सीमित संसाधनों और आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद अपने सपनों को साकार किया है.

बताया जाता है कि परिवार की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर रही है. कई चुनौतियों के बीच यामिनी ने जूडो का अभ्यास जारी रखा और लगातार मेहनत के दम पर राष्ट्रीय स्तर से अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने का सफर तय किया.

उनकी सफलता उन खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है जो आर्थिक अभाव के बावजूद बड़े लक्ष्य हासिल करने का सपना देखते हैं.

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बना चुकी हैं पहचान

यामिनी मौर्य देश की स्थापित जूडो खिलाड़ियों में गिनी जाती हैं. वह दो बार सीनियर राष्ट्रीय चैंपियन रह चुकी हैं और 2022 से लगातार भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं. उन्होंने 2022 राष्ट्रीय खेलों में स्वर्ण पदक जीता था. इसके अलावा 2025 हांगकांग एशियाई ओपन और 2026 डकार अफ्रीका ओपन में भी गोल्ड मेडल हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया. अब कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत पदक जीतकर उन्होंने अपने करियर में एक और बड़ी उपलब्धि जोड़ ली है.

सागर और मध्य प्रदेश में खुशी की लहर

यामिनी की सफलता से सागर जिला गर्व महसूस कर रहा है. खेल प्रेमियों, कोचों और स्थानीय लोगों ने उनकी उपलब्धि पर खुशी जताई है. सोशल मीडिया पर भी उन्हें बधाइयों का सिलसिला जारी है.


Prev Post
Next Post