पिल्ले से 'भाई' जैसा प्यार, असम बाढ़ में बहने से बचाने के लिए मासूम बच्चा खुद उफनती नदी में बह गया

देश के पूर्वोत्तर राज्य असम में इन दिनों बाढ़ से हाहाकार मचा हुआ है. जहां देखो वहां पानी ही पानी है. लोगों के घर छिन गए, अपने बिछड़ गए. हालात कुछ ऐसे हैं कि तस्वीरें देख कर आंखों से पानी नहीं रुकेगा. लोग रो-बिलख रहे हैं और मदद की गुहार लगा रहे हैं. पानी में डूबते जानवरों को देख किसी का भी दिल रो पड़ेगा. इस भयावह मंजर के बीच एक इमोशनल कर देने वाली घटना सामने आई है. एक 13 साल के बच्चे ने अपने पालतू पिल्ले को बचाने के लिए अपनी जान दे दी.

‘इंसान और डॉग का प्यार’

इंसान और कुत्ते के बेइंतहा प्यार की कई कहानियां हमने फिल्मों में और असल जिंदगी में खूब देखी हैं. लोग अपने पालतू कुत्तों को बच्चे जैसा प्यार करते हैं. वहीं डॉग का लगाव भी मालिक से कुछ ऐसा ही होता है. 1985 में आई जैकी श्रॉफ की फिल्म ‘तेरी महरबानियां’ में भी इंसान और कुत्ते के बीच का प्यारा सा रिश्ता बखूबी दिखाया गया. वहीं हाल ही में एक घटना सामने आई थी. जहां मालिक की मौत से दुखी कत्ते ने भी अपनी जान दे दी थी. असम में नन्हें से पिल्ले को बचाने की कोशिश में बच्चे ने जान दे दी.

पिल्ले को बचाने की कोशिश में बच्चा बाढ़ में बहा

घटना असम के शिवसागर जिले के बामुनपुखुरी चाय बागान की है. बेटे को खोने के बाद परिवार बुरी तरह टूट गया है. दरअसल इस परिवार के पास 3 महीने का एक पालतू पिल्ला वरुण था. जिसे उन्होंने अपने बेटे की तरह पाला. उनका 13 साल का बेटा ऋदीप उस पप्पी को छोटे भाई की तरह प्यार करता था. बाढ़ के बीच वह अपने प्यारे पल्ले को अकेला छोड़ कर नहीं जा सका. पिता ने खूब कहा कि बेटा घर में पानी भरा है तुम अपने चाचा के घर चले आओ.

पिल्ला बच गया, बेटा चला गया

इस पर 13 मासूम ऋदीप बोला कि पापा मैं ‘वरुण’ को साथ लेकर जाऊंगा. आप भी हमारे साथ आ जाओ. पानी का बहाव तेज था. इतने में पिता घर के अंदर से जरूरी कागज निकालने चले गए. इस बीच बाहर पानी का बहाव और तेज हो गया. बच्चे के पिता ने बताया कि वह घर के अंदर घुसे इतने में बाहर इतना तेज पानी का बहाव आया कि उनका 13 साल का बेटा फिसलकर उसमें बह गया. उन्होंने उसे बचाने की बहुत कोशिश की लेकिन नाकाम रहे. पिल्ला तो बच गया लेकिन बेटा चला गया. 

उफनती नदी में बहा 13 साल का बच्चा

एक ‘बच्चे’ को बचाने के चक्कर में दूसरे बच्चे की जान चली गई. यह घटना 19 जुलाई की है. 13 साल का ऋदीप अपने तीन महीने के पालतू पिल्ले ‘वरुण’ को सुरक्षित जगह पर ले जाने की कोशिश कर रहा था. इसी दौरान वह खुद पानी के तेज बहाव में फिसलकर बह गया.

इकलौते बेटे को खोने से टूट गए माता-पिता

मासूम ऋदीप के माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है. पिल्ले को गोदी में लिए वह अपने बेटे को याद कर आंसू बहा रहे हैं. उन्होंने दूसरे लोगों से अपील करते हुए कहा कि बाढ़ के समय अपने बच्चों को हमेशा अपने पास रखें. यह न सोचें कि वे अपने आप सुरक्षित रहेंगे. हमने तो अपना इकलौता बेटा खो दिया है.” बच्चे की मां ने पीएम मोदी से बाढ़ प्रभावित हर गांव में नाव की व्यवस्था कराने की अपील की, ताकि मदद मिलते ही लोग जल्द सुरक्षित जगहों पर पहुंच सकें. 

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