प्रो कामाकोटी पर प्रियंका गांधी की टिप्पणी से नाराज हैं वैज्ञानिक और शिक्षाविद, पत्र लिखकर बताया उनका योगदान

नई दिल्ली:

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा की ओर से आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी कामाकोटी को कथित तौर पर ‘गोमूत्र विशेषज्ञ’ कहे जाने से देश का अकादमिक और वैज्ञानिक समुदाय आहत है.कांग्रेस नेता की इस टिप्पणी के विरोध में देश के प्रमुख वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और कुलपतियों ने प्रियंका गांधी को एक खुला पत्र लिखा है. इस पत्र में सार्वजनिक बहस के गिरते स्तर पर चिंता जताई गई है.

पत्र में कहा गया है कि भारतीय संसद से हमेशा यह उम्मीद की जाती है कि वहां विचारों पर गंभीरता से बहस हो और असहमति को गरिमा के साथ व्यक्त किया जाए. शिक्षाविदों का कहना है कि किसी विद्वान के विचारों से जुड़ने के बजाय उसे एक सरलीकृत लेबल देकर खारिज करना हमारे संविधान में उल्लेखित ‘वैज्ञानिक दृष्टिकोण’ के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है.

प्रोफेसर कामाकोटी की सफलताएं

पत्र में स्पष्ट किया गया है कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण का अर्थ सिर्फ पारंपरिक या गैर-पारंपरिक विचारों पर संदेह करना नहीं है, बल्कि किसी भी दावे को स्वीकार या अस्वीकार करने से पहले निष्पक्ष रूप से उसकी जांच करना है. इतिहास गवाह है कि कभी असत्य माने जाने वाले कई विचार बाद में वैज्ञानिक रूप से सही साबित हुए.

शिक्षाविदों ने प्रोफेसर कामाकोटी की साख का जिक्र करते हुए लिखा है कि वो देश के शीर्ष तकनीकी विशेषज्ञों में से एक हैं. आईआईटी मद्रास से कंप्यूटर साइंस में एमएस और पीएचडी कर चुके प्रो. कामाकोटी के 150 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित हैं. वे 50 से अधिक अनुसंधान परियोजनाओं से जुड़े रहे हैं. भारत के पहले इंडस्ट्रियल-ग्रेड माइक्रोप्रोसेसर के निर्माण में उनका प्रमुख योगदान रहा है. इसके अलावा, उन्हें ‘डीआरडीओ अकादमिक एक्सीलेंस अवॉर्ड’ जैसे कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जा चुका है.

क्या प्रियंका गांधी ने विद्वता का अपमान किया

इस खुले पत्र में चेतावनी दी गई है कि राजनेताओं के इस तरह के तंज या उपहास से शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों में भय का माहौल बनता है. यदि जटिल वैज्ञानिक प्रश्नों को राजनीतिक उपहास का विषय बनाया जाएगा, तो समाज एक जागरूक और सूचनात्मक बहस का अवसर खो देगा.पत्र में नेताओं से अपील की गई है कि वे विद्वानों के तर्कों की आलोचना करें, सबूतों को चुनौती दें, लेकिन विद्वता का अपमान न करें.

सौ से भी अधिक विशेषज्ञों की ओर से लिखे गए इस खुले पत्र को आईसीटी मुंबई के पूर्व कुलपति प्रोफेसर जीडी यादव और एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज की महासचिव प्रोफेसर पंकज मित्तल सहित कई प्रमुख हस्तियों के समन्वय में जारी किया गया है.

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