'भारत अब दो घोड़ों की सवारी कर रहा है', कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने क्यों कहा ऐसा?
Raisina News Desk- अगस्त 03, 2026 06:58 AM IST

नई दिल्ली:
लोकसभा सांसद मनीष तिवारी ने कहा है कि भारत अब सही मायनों में लोकतांत्रिक नहीं रह गया है, क्योंकि जनता की आवाज उठाने वाले प्रतिनिधि संस्थान लगभग बेकार साबित हो चुके हैं. देश की मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था को लेकर उन्होंने कहा कि भारत अब केवल एक ‘टू-हॉर्स सिस्टम’ (दो घोड़ों की प्रणाली) बनकर रह गया है, जिसमें एक तरफ अपनी मनमर्जी से काम करने वाली कार्यपालिका (एग्जीक्यूटिव) है और दूसरी तरफ ऐसी न्यायपालिका जो ज्ञापन प्रक्रिया (MoP) को दरकिनार कर खुद ही अपने जजों की नियुक्ति करती है.
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर संसद और विधानसभाएं सिर्फ कार्यपालिका की ताकत पर कब्जा जमाने के लिए एक-दूसरे से भिड़ने का जरिया बनी रहीं, तो वे नैतिक, राजनीतिक और संवैधानिक पतन की ऐसी गहराइयों में गिरती चली जाएंगी, जहां से निकलना मुश्किल होगा.
मनीष तिवारी के मुताबिक, गिरावट का यह दौर 1990 के दशक की शुरुआत में शुरू हुआ था और तब से अब तक लगातार जारी है.
उन्होंने कहा कि पहली लोकसभा (1952-57) के दौरान हर साल औसतन 135 दिन बैठकें आयोजित होती थीं. उन्होंने बताया कि 17वीं लोकसभा में बैठकें घटकर औसतन केवल 55 दिन रह गईं. इसमें भी 30 से 35 दिन हंगामे और व्यवधान की भेंट चढ़ गए.
18वीं लोकसभा को लेकर मनीष तिवारी ने आशंका जताई कि इसमें कामकाज के मामले में पिछले सभी खराब रिकॉर्ड भी तोड़ सकती है.
मनीष तिवारी ने साफ शब्दों में कहा कि अगर संसद और अन्य विधायी संस्थाओं को उनके असली संवैधानिक काम पर वापस लाना है, तो भारत की लोकतांत्रिक प्रणाली में बुनियादी बदलाव और फिर से बड़ा सुधार करना बेहद जरूरी हो गया है. उनका यह बयान ऐसे समय पर आया है जब संसद के सत्रों में विपक्ष का भारी हंगामा, बार-बार की कार्यवाही का स्थगन और विधायी कामकाज में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है.
गौरतलब है कि संसद का मौजूदा मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हुआ है और यह 13 अगस्त तक चलने वाला है. लेकिन इस सत्र में विपक्ष और सरकार के बीच लगातार गतिरोध दिखाई दे रहा है.