हथियारों के बाद अब एनर्जी के क्षेत्र में भी बढ़ेगी भारत की धाक, जर्मनी खरीदने को तैयार

भारत दुनिया के कई देशों को हथियार एक्सपोर्ट तो करता ही है, लेकिन अब कुछ सालों देश एनर्जी एक्सपोर्टर भी बनने जा रहा है. जर्मनी भारत से ग्रीन हाइड्रोजन खरीद सकता है. यह बात खुद जर्मनी के राजदूत फिलिप एकरमैन ने कही. उन्होंने यह भी बताया कि भारत और जर्मनी के बीच अगली पीढ़ी की पनडुब्बियों की खरीद से जुड़े समझौते पर ‘बहुत जल्द’ हस्ताक्षर होने की उम्मीद है. यानी जर्मनी के साथ पनडुब्बियों और ग्रीन एनर्जी जैसे समझौते होने वाले हैं.

‘ग्रीन हाइड्रोजन एक्सपोर्ट करेगा भारत’

भारत में जर्मनी के राजदूत फिलिप एकरमैन ने गुरुवार को कहा कि जर्मनी आने वाले सालों में भारत से ग्रीन हाइड्रोजन इम्पोर्ट करेगा. उन्होंने कहा कि भारत एक एनर्जी एक्सपोर्टर के तौर पर उभर सकता है. उन्होंने रिन्यूएबल एनर्जी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और प्रस्तावित भारत-यूरोपीय संघ (EU) फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को भविष्य में दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने वाले अहम क्षेत्रों के तौर पर बताया.

इंडो-जर्मन चैंबर ऑफ कॉमर्स द्वारा आयोजित इंडो-जर्मन इंडस्ट्रीज डायलॉग में एकरमैन ने कहा, ‘मुझे लगता है कि भारत कुछ सालों में एनर्जी एक्सपोर्टर बन जाएगा. मुझे लगता है कि जर्मनी भविष्य में इस ग्रीन हाइड्रोजन का ग्राहक बन सकता है.’ रिन्यूएबल एनर्जी को भारत-जर्मनी संबंधों का एक रणनीतिक स्तंभ बताते हुए, एकरमैन ने कहा कि दोनों देश हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी में सहयोग को गहरा करने के लिए काम कर रहे हैं.

गुजरात के कच्छ में अडानी ग्रुप के रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट के अपने दौरे को याद करते हुए, राजदूत ने कहा कि वह भारत में सोलर और विंड एनर्जी के बड़े पैमाने पर उत्पादन और ग्रीन हाइड्रोजन के लिए उसकी योजनाओं से प्रभावित थे. उन्होंने कहा, ‘उन्होंने वहां सोलर और विंड फील्ड के जरिए बहुत बड़ी मात्रा में बिजली पैदा करने की क्षमता बनाई है. ग्रीन हाइड्रोजन को लेकर उनकी योजनाएं बहुत महत्वाकांक्षी हैं.’

‘पनडुब्बियों की खरीद पर जल्द होगा समझौता’

फिलिप एकरमैन ने कहा कि भारत और जर्मनी के बीच अगली पीढ़ी की पनडुब्बियों की खरीद से जुड़े समझौते पर ‘बहुत जल्द’ हस्ताक्षर होने की उम्मीद है. भारत और जर्मनी, भारतीय नौसेना के लिए भारत में निर्मित की जाने वाली अगली पीढ़ी की छह पारंपरिक पनडुब्बियों से जुड़े अनुमानित आठ अरब यूरो यानी 90,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के ‘प्रोजेक्ट-75आई’ समझौते को अंतिम रूप दे रहे हैं.

जर्मनी की थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स (टीकेएमएस) और भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स के इस समझौते पर हस्ताक्षर करने की उम्मीद है. एकरमैन ने कहा, ‘पनडुब्बी समझौते को लेकर मैं बेहद आशान्वित और आश्वस्त हूं कि इस पर बहुत जल्द, शायद अगले महीने हस्ताक्षर हो जाएंगे.’

ट्रेड के मामले में एकरमैन ने प्रस्तावित इंडिया-EU FTA को टभारत में जर्मन बिजनेस के लिए शायद सबसे बड़ा गेम-चेंजर’ बताया और उम्मीद जताई कि इस साल के आखिर तक इस पर साइन हो जाएंगे और अगले साल की पहली छमाही में इसे लागू कर दिया जाएगा. उन्होंने बताया कि जर्मनी यूरोप में भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है और दोनों के बीच सालाना ट्रेड 50 अरब अमेरिकी डॉलर से ज्यादा है. उन्होंने कहा कि FTA से भारत में जर्मन बिजनेस की भागीदारी और निवेश बढ़ सकता है.



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