चंद्रशेखर की आजाद समाज पार्टी ने उतारे 45 प्रभारी, एक भी जनरल को मौका नहीं; 11 मुस्लिमों को मौका

सांसद चंद्रशेखर आजाद ने 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं. आजाद समाज पार्टी ने उत्तर प्रदेश में 45 विधानसभा प्रभारियों की सूची जारी कर दी है. इनमें पूर्व मंत्री और पूर्व IPS को भी मौका दिया है. खास बात यह है कि 45 में एक भी प्रभारी जनरल नहीं है. चंद्रशेखर की पार्टी की तरफ से की गई यह नियुक्तियां अहम मानी जा रही हैं. क्योंकि इससे पहले बहुजन समाज पार्टी ने भी अपने प्रभारियों की सूची जारी की थी. ऐसे में अब चंद्रशेखर ने भी अपने प्रभारी उतारकर पार्टी वोटरों को पार्टी से जोड़ने की शुरुआत कर दी है. चंद्रशेखर आजाद खुद तैयारियों में जुटे हैं. 

चंद्रशेखर आजाद का फॉर्मूला 

चंद्रशेखर आजाद ने जिन 45 प्रभारियों की सूची जारी की है. उसमें जनरल वर्ग के नेताओं को मौका नहीं दिया है. प्रभारियों की सूची में सबसे ज्यादा 18 प्रभारी अनुसूचित जाति वर्ग से हैं. जबकि  16 ओबीसी, 10 मुस्लिम और 1 सिख समाज के नेता को मौका दिया है. लेकिन ब्राह्मण और ठाकुर समाज के किसी चेहरे को प्रत्याशी नहीं बनाया है. चंद्रशेखर आजाद की इस पहली सूची से साफ है कि उनका पूरा ध्यान दलित, पिछड़े और मुस्लिम वोट बैंक को अपने पाले में करने का है. 45 सीटों के सामाजिक समीकरण को देखें तो पार्टी ने अपने फॉर्मूले को जमीन पर उतारने की कोशिश की है.

पश्चिमी यूपी पर फोकस 

आजाद समाज पार्टी पश्चिमी यूपी पर फोकस दिख रहा है.  मेरठ, मुजफ्फरनगर, शामली, हापुड़, अलीगढ़, हाथरस और आगरा जैसे जिलों की सीटों पर सबसे पहले प्रभारियों के नामों का ऐलान किया गया है. हाथरस सीट से पूर्व आईपीएस अधिकारी आदित्य प्रकाश वर्मा को प्रभारी बनाया गया है, जो पार्टी का बड़ा प्रशासनिक चेहरा होंगे. वहीं, अलीगढ़ की छर्रा सीट से पूर्व मंत्री चौधरी महेंद्र सिंह को प्रभारी बनाया है.  मेरठ शहर से बदर अली, शामली की थाना भवन से मो. मौसम राव और मऊ की मधुबन सीट से शिवसागर यादव को मैदान में उतारा गया है. 

यूपी चुनाव की तैयारियों में जुटी आजाद समाज पार्टी

नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद उत्तर प्रदेश में होने वाले 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटे है. चंद्रशेखर अपने उम्मीदवारों को बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने, घर-घर जाकर जनसंपर्क करने और जनता के बीच अपनी पहचान बनाने के लिए पूरा समय देना चाहते हैं। बसपा की सुस्ती और सपा के पारंपरिक समीकरणों के बीच चंद्रशेखर आजाद खुद को यूपी में तीसरे सबसे बड़े विकल्प के रूप में स्थापित करने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं. माना जा रहा है कि यह प्रभारी ही एक तरह से प्रत्याशी है. क्योंकि आगेचलकर इन्ही के नाम का ऐलान हो सकता है.

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