असम सीमा पर अशांति का मेघालय पर्यटन पर असम सीमा पर असर, बुकिंग कैंसिल करा रहे हैं पर्यटक
Raisina News Desk- अगस्त 24, 2026 05:14 PM IST

शिलॉन्ग:
असम के साथ बढ़े तनाव का असर मेघालय के पर्यटन क्षेत्र पर दिखने लगा है. होटल और होमस्टे से मिली जानकारी के मुताबिक, शिलॉन्ग, सोहरा (चेरापूंजी) और आसपास के इलाकों में करीब 90 फीसद पर्यटकों की बुकिंग रद्द हो गई है. हालांकि, यह आंकड़ा होटल और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों से मिली जानकारी पर आधारित है. सरकार की ओर से इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है. पर्यटन संगठनों ने लोगों से हिंसा न करने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की अपील की है.
19 अगस्त को शिलॉन्ग में खासी स्टूडेंट्स यूनियन (केएसयू) की रैली के दौरान हुई हिंसा और इसके बाद असम-मेघालय के बीच लोगों और वाहनों की आवाजाही को लेकर पैदा हुए तनाव के बाद बुकिंग रद्द होने का सिलसिला शुरू हुआ. मेघालय टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन (टीओएएम) के अध्यक्ष और नॉर्थ ईस्ट इंडिया टूरिज्म कन्फेडरेशन (एनईआईटीसी) के सलाहकार और संस्थापक अध्यक्ष ईबी ब्लाह ने कहा कि इस घटना से मेघालय में पर्यटकों के बीच सालों से बनी सुरक्षा की छवि को नुकसान पहुंच सकता है. उन्होंने कहा,”यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण घटना है. इसका असर पर्यटन पर पड़ेगा. हमने पिछले कई सालों में देखा है कि पूर्वोत्तर या इस क्षेत्र के किसी भी हिस्से को पर्यटकों के लिए सुरक्षित जगह के तौर पर देखा जाना चाहिए.”
शिलॉन्ग और सोहरा में अगस्त के महीने में आमतौर पर पर्यटन गतिविधियां कम ही रहती हैं. इस समय होटल और होमस्टे में पर्यटकों की संख्या पीक सीजन की तुलना में कम होती है. लेकिन पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि इस बार पहले से पक्की हो चुकी बुकिंग भी रद्द हो रही हैं.
ब्लाह ने कहा कि पर्यटन उद्योग आने वाले सीजन की तैयारी कर रहा था. पर्यटकों ने मेघालय आने की योजनाएं बनानी शुरू कर दी थीं. उन्होंने कहा,”मेघालय के टूर ऑपरेटर और कंपनियां पर्यटकों के आने की तैयारी कर रहे थे. पर्यटकों ने भी अपनी यात्रा की योजना बनानी शुरू कर दी थी. लेकिन इस तरह की घटनाओं से लोगों के मन में यह धारणा बन सकती है कि यह जगह सुरक्षित नहीं है.” इसका असर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मेघालय में पूजा की छुट्टियों और क्रिसमस के दौरान पर्यटकों की संख्या तेजी से बढ़ती है.
पर्यटन कारोबारियों के मुताबिक, शिलॉन्ग और सोहरा जाने की योजना बना चुके लोग लगातार फोन करके वहां की स्थिति और यात्रा की सुरक्षा के बारे में जानकारी ले रहे हैं. ब्लाह ने कहा कि अभी उद्योग के पास रद्द हुई बुकिंग का पूरा आंकड़ा नहीं है. उन्होंने कहा,”हमारे पास अभी आंकड़े नहीं हैं, क्योंकि हमने अभी इसे पूरी तरह इकट्ठा नहीं किया है. निश्चित तौर पर कुछ बुकिंग रद्द हुई हैं. कुछ लोग कुछ इलाकों में जाने से बच सकते हैं. लेकिन अगर स्थिति जारी रहती है तो इसका असर बहुत ज्यादा होगा. आने वाले दिनों में बुकिंग रद्द होने का सिलसिला बढ़ सकता है.”
पर्यटन उद्योग के लिए एक और बड़ी चिंता असम और मेघालय के बीच सड़क संपर्क है. दूसरे राज्यों से मेघालय आने वाले पर्यटकों में से बहुत से गुवाहाटी और जोरबाट के रास्ते पहुंचते हैं. ब्लाह ने कहा,”लोग आने के लिए तैयार भी हों, लेकिन अगर उन्हें कुछ जगहों से वाहन नहीं मिलते या किसी इलाके में स्थिति खराब होने के कारण यात्रा प्रभावित होती है तो वे मेघालय नहीं आ पाएंगे.” उन्होंने कहा, ”अगर सड़क बंद है और वाहन मेघालय नहीं आ पा रहे हैं तो पर्यटक कैसे आएंगे? होटल बुक करने और यात्रा की योजना बनाने के बावजूद उन्हें परेशानी होगी.”
19 अगस्त को शिलॉन्ग में हुई हिंसा के दौरान कई वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया था. इसके बाद असम-मेघालय मार्ग पर वाहनों की आवाजाही को लेकर विरोध और रास्ते रोकने की घटनाएं भी सामने आईं. इससे पर्यटन और अन्य कामों के लिए इस सड़क मार्ग पर निर्भर लोगों की चिंता बढ़ गई.
ब्लाह के मुताबिक, पर्यटन उद्योग के सामने समस्या सिर्फ पर्यटकों की ओर से बुकिंग रद्द करने की नहीं है. अगर सड़क और परिवहन व्यवस्था प्रभावित होती है तो जिन पर्यटकों ने पहले से होटल बुक कर रखा है, वे भी अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पाएंगे. उन्होंने कहा,”एक समस्या यह है कि खबरों और सुरक्षा को लेकर डर के कारण पर्यटक खुद अपनी यात्रा रद्द कर रहे हैं. लेकिन दूसरी समस्या पर्यटन उद्योग की तरफ से है.” उन्होंने बताया कि पूर्वोत्तर का पर्यटन एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है. पर्यटक अक्सर एक ही यात्रा में कई राज्यों को शामिल करते हैं. ऐसे में एक राज्य में पैदा हुई परेशानी का असर पूरे पूर्वोत्तर के पर्यटन पर पड़ सकता है. ब्लाह ने कहा, ”पूर्वोत्तर का पर्यटन सर्किट आपस में जुड़ा हुआ है. इसलिए किसी एक जगह पर परेशानी होने से पूरे क्षेत्र में पर्यटकों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है.” उन्होंने कहा कि पर्यटकों के लिए राज्यों की राजनीतिक सीमाएं ज्यादा मायने नहीं रखतीं. उनके लिए यात्रा की योजना और टूर पैकेज ज्यादा महत्वपूर्ण होते हैं.
20 अगस्त को मेघालय के कई पर्यटन संगठनों ने संयुक्त बयान जारी कर पर्यटन उद्योग पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर चिंता जताई थी.इस बयान पर टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ मेघालय, मेघालय रूरल टूरिज्म फोरम, टूर गाइड्स एसोसिएशन ऑफ मेघालय, फेडरेशन ऑफ शिलॉन्ग होटल्स, मेघालय टूरिज्म डेवलपमेंट फोरम और मेघालय रूरल टूरिज्म कोऑपरेटिव फेडरेशन ने हस्ताक्षर किए थे. संगठनों ने हिंसा और मेघालय के बाहर से आए वाहनों, जिनमें पर्यटक टैक्सी और बसों में हुई तोड़फोड़ की निंदा की थी. उन्होंने कहा था कि ऐसी घटनाओं से मेघालय की पर्यटक स्थल के रूप में बनी छवि को नुकसान पहुंच सकता है.इन संगठनों ने लोगों से बदले की कार्रवाई से बचने की अपील करते हुए हिंसा और तोड़फोड़ करने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की मांग की.
मेघालय में बड़ी संख्या में लोगों की रोजी-रोटी पर्यटन से जुड़ी है. इनमें होटल और होमस्टे में काम करने वाले लोग, पर्यटक वाहन चालक, रेस्तरां कर्मचारी, गाइड, हस्तशिल्प से जुड़े लोग और छोटे कारोबारी शामिल हैं. हालांकि, ब्लाह ने कहा कि पर्यटन पूरी तरह बंद नहीं हुआ है. अभी भी पर्यटक मेघालय और पूर्वोत्तर की यात्रा कर रहे हैं. देश के अलग-अलग हिस्सों से फुटबॉल प्रशंसक भी यहां पहुंच रहे हैं. लेकिन उन्होंने कहा कि आने वाले पीक सीजन में बड़े नुकसान से बचने के लिए स्थिति को जल्द सामान्य करना जरूरी है. ब्लाह ने कहा,”अगर हम कोई समाधान निकाल लेते हैं तो निश्चित तौर पर इसका असर इतना ज्यादा नहीं होगा.” पर्यटन कारोबारियों के लिए फिलहाल सबसे बड़ी चिंता असम और मेघालय के बीच सामान्य आवाजाही बहाल करना और पर्यटकों के मन में राज्य की यात्रा को लेकर भरोसा कायम करना है.
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