उज्जैन में खड़े हनुमान की प्रतिमा हटेगी या नहीं? 170 साल पुरानी मूर्ति पर प्रशासन भी बेबस दिखा, संत समाज अड़ा
Raisina News Desk- सितंबर 10, 2026 10:56 AM IST

उज्जैन:
महाकाल की नगरी उज्जैन में इन दिनों खड़े हनुमान जी की मूर्ति वाला मंदिर श्रद्धा और चर्चा का केंद्र बना हुआ है. सिंहस्थ महाकुंभ की तैयारियों के तहत सड़क चौड़ीकरण की योजना के बीच 170 वर्ष पुरानी मानी जाने वाली खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को लेकर बहस छिड़ गई है. सोशल मीडिया पर प्रतिमा को हटाने के प्रयासों की खबरें वायरल होने के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं. स्थानीय लोगों का दावा है कि प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे हैं. दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि प्रतिमा को विस्थापित करने की कोई कार्रवाई अभी तक नहीं की गई है और धार्मिक आस्था के साथ-साथ वैज्ञानिक परीक्षण को भी प्राथमिकता दी जा रही है.
उज्जैन में सिंहस्थ महाकुंभ को देखते हुए विभिन्न विकास कार्यों की तैयारियां चल रही हैं. इसी क्रम में सड़क चौड़ीकरण की योजना के दौरान खड़े हनुमान जी की प्रतिमा का मुद्दा सामने आया. प्रतिमा की विशेषता यह बताई जा रही है कि करीब आठ फीट ऊंची यह मूर्ति बिना किसी बाहरी सहारे के खड़ी है. बताया जा रहा है कि प्रतिमा को स्थिर रखने के लिए चार से पांच फीट की शिला जमीन के भीतर तक स्थापित है. अब विशेषज्ञ इसकी संरचना और गहराई का अध्ययन करने के लिए तकनीकी परीक्षण कर रहे हैं.
सोशल मीडिया पर मामले की चर्चा बढ़ने के बाद मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या में भी तेजी से इजाफा हुआ है. महाकाल दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु अब खड़े हनुमान जी के दर्शन के लिए भी पहुंच रहे हैं. मंदिर परिसर के आसपास विशेष व्यवस्था की गई है. प्रतिमा के नजदीक टेंट लगाया गया है. स्थानीय लोगों के मुताबिक प्रतिदिन पांच हजार से अधिक श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं और अब तक एक लाख से अधिक लोग दर्शन कर चुके हैं.
खड़े हनुमान जी की मुर्ति के संबंध में उज्जैन SDM एलएन गर्ग ने कहा, ‘विकास कार्य भी आवश्यक हैं और उज्जैन की धार्मिक आस्था भी हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है. विशेषज्ञों, संत समाज और श्रद्धालुओं के विश्वास के साथ ही समाधान निकाला जाएगा. यह श्रद्धालुओं की गहरी आस्था से जुड़ा विषय है. इसके साथ ही प्रतिमा की संरचनात्मक स्थिति का वैज्ञानिक परीक्षण भी आवश्यक है.’
एसडीएम ने आगे कहा कि ‘खड़े हनुमान जी की प्रतिमा से जुड़ा विषय उज्जैन वासियों एवं श्रद्धालुओं की आस्था से संबंधित है. प्रशासन के लिए श्रद्धालुओं की भावनाएं, प्रतिमा की सुरक्षा और उज्जैन की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत सर्वोपरि है…सभी संबंधित पक्षों की भावनाओं को ध्यान में रखे बिना प्रशासन कोई भी कदम अथवा निर्णय नहीं लेगा.’
एसडीएम ने कहा कि ‘सोशल मीडिया पर यह खबर भ्रामक रूप से प्रसारित की जा रही है कि प्रशासन द्वारा श्री खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को विस्थापित करने के लिए कई प्रयास किए जा चुके हैं. यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि अभी तक प्रतिमा को विस्थापित अथवा हटाने संबंधी कोई भी प्रयास; किसी भी मशीन अथवा मानवीय युक्तियों से नहीं किया गया है. इस संबंध में यह निर्णय लिया गया है कि विशेषज्ञों की वैज्ञानिक एवं तकनीकी राय प्राप्त किए बिना प्रतिमा के विस्थापन हेतु कोई भी आगे कार्रवाई नहीं की जाएगी.
प्रतिमा को हटाने की संभावनाओं पर संत समाज ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है. फिरोजाबाद के महंत मनीष भारद्वाज और पुजारी रामकुमार ने कहा कि सड़क चौड़ीकरण के नाम पर मंदिर या प्रतिमा से छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए. महंत मनीष भारद्वाज ने कहा कि हनुमान जी कलयुग के प्रमुख देवता माने जाते हैं और जहां भी उनकी प्रतिमाओं के साथ छेड़छाड़ हुई है, वहां इसे लेकर धार्मिक भावनाएं प्रभावित हुई हैं. उन्होंने प्रशासन से प्रतिमा को यथास्थान सुरक्षित रखने या मंदिर का पुनर्निर्माण कराने की मांग की.
सूरत के अटल आश्रम के महामंडलेश्वर बटुकगिरी महाराज ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रशासन को मंदिर हटाने के बजाय वैकल्पिक रास्ते तलाशने चाहिए. उन्होंने कहा कि सिंहस्थ महाकुंभ सनातन परंपरा से जुड़ा महत्वपूर्ण आयोजन है और जहां प्राचीन मंदिर मौजूद हैं, वहां उनकी सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित किया जाना चाहिए. उनके अनुसार आवश्यकता पड़ने पर सड़क की दिशा में बदलाव या मंदिर परिसर के विकास जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है.