दुनिया की धड़कनें बढ़ाने वाली रही मोदी-पुतिन की 45 मिनट वाली मुलाकात, खुद पीएम ने किया ऐलान
Raisina News Desk- सितंबर 12, 2026 12:29 AM IST

ब्रिक्स समिट शनिवार से शुरू हो रहा है. मेहमानों के आने का सिलसिला जारी है. इस बीच शुक्रवार को पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की द्विपक्षीय वार्ता हुई. ये अहम मुलाकात ठीक ब्रिक्स समिट से पहले हुई. ये मुलाकात 45 मिनट तक चली. इसके बाद दोनों देशों की तरफ से कोई साझा घोषणा-पत्र या कोई बयान जारी नहीं किया गया. पर भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बहुत हद तक चीजें क्लियर कर दीं.
रणधीर जायसवाल ने एक्स पर लिखा, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन के साथ भारत-रूस की ‘विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी’ के विभिन्न पहलुओं पर व्यापक चर्चा की. दोनों नेताओं ने बिजनेस, एनर्जी, डिफेंस, स्पेस और लोगों के बीच आपसी संबंधों जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की प्रगति की समीक्षा की; ये क्षेत्र भारत-रूस की लंबे समय से चली आ रही साझेदारी के मुख्य केंद्र बिंदु हैं. उन्होंने क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर आपसी हित के मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया, जिनमें पश्चिम एशिया और काला सागर क्षेत्र में चल रहे संघर्ष शामिल हैं. प्रधानमंत्री ने दोहराया कि बातचीत और कूटनीति ही संघर्षों को सुलझाने का सही रास्ता है और भारत शांति प्रयासों में मदद करने के लिए तैयार है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ वार्ता के दौरान काला सागर में भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया. उन्होंने यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए किसी भी शांति पहल का समर्थन करने की भारत की तत्परता दोहराई. दोनों नेताओं ने बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को और मजबूत करने पर भी सहमति जताई. दोनों नेताओं ने वर्ष 2030 तक वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने तथा रक्षा, एनर्जी और क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया.’
पीएम मोदी ने इसे और क्लियर करते हुए ट्वीट किया, बिश्केक में हमारी मुलाकात के दो हप्ते से भी कम समय में, दिल्ली में राष्ट्रपति पुतिन से मिलकर बहुत खुशी हुई. आज की बैठक में हमने व्यापारिक संबंधों को और मज़बूत करने, जिसमें ‘इकोनॉमिक कोऑपरेशन प्रोग्राम 2030′ को लागू करना भी शामिल है, इंफ्रास्ट्रक्चर, एनर्जी, टेक्नोलॉजी, डिफेंस, संस्कृति और अन्य क्षेत्रों में सहयोग. हमारी BRICS अध्यक्षता के दौरान भारत की वे कोशिशें जिनका मकसद हमारी दुनिया की भलाई को आगे बढ़ाना है.’
अब भी कोई उलझन है तो क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव का मंगलवार को दिया बयान भी पढ़ लीजिए. पेस्कोव ने कहा था कि दोनों पक्ष ब्रह्मोस मिसाइल के अपडेट पर विचार कर रहे हैं. इसके साथ ही मॉस्को अपनी शेष एस-400 मिसाइल प्रणाली की आपूर्ति को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है और प्रस्तावित सुखोई-57 लड़ाकू विमानों की आपूर्ति पर भी चर्चा कर रहा है. दोनों देशों के बीच एनर्जी संबंध काफी मजबूत बने हुए हैं और दोनों पक्ष असैन्य परमाणु रिएक्टर क्षेत्र में सहयोग गहरा करने पर भी सहमत हुए हैं. वहीं आज मुलाकात के बाद रूसी दूतावास के प्रेस सेक्रेटरी पीटर सिजोव ने NDTV से बातचीत में कई सारी बातें करते हुए यहां तक कह दिया कि इस वार्ता के सकारात्मक परिणाम जल्द सामने आने की उम्मीद है.
लगभग यही बात रणधीर जायसवाल और पीएम मोदी के ट्वीट में भी है. बस अंतर ये है कि इसमें एस 400, ब्रह्मोस और सुखोई 57 का नाम नहीं है. अंत में राष्ट्रपति पुतिन ने प्रधानमंत्री को 24वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए रूस आने का निमंत्रण दिया. प्रधानमंत्री ने निमंत्रण स्वीकार कर लिया है. शिखर सम्मेलन की तारीखें राजनयिक माध्यमों से दोनों पक्षों की सुविधा के अनुसार तय की जाएंगी.
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