TMC के 'सिंबल' पर घमासान! चुनाव आयोग पहुंची लड़ाई, ममता बनर्जी को 16 सितंबर तक का अल्टीमेटम
Raisina News Desk- सितंबर 13, 2026 05:07 PM IST

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के चुनाव चिन्ह और पार्टी पर अधिकार को लेकर ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी के गुटों के बीच जारी जंग अब बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गई है. दिल्ली में चुनाव आयोग (ECI) के सामने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आयोग ने ममता बनर्जी को 16 सितंबर दोपहर 3 बजे तक का समय दिया है.
चुनाव आयोग ने ममता से साफ कहा है कि अगर उनके पास पार्टी पर अपने दावे को मजबूत करने के लिए कोई अतिरिक्त दस्तावेज या बात है, तो वे तय समय तक जमा कराएं.
शनिवार को चुनाव आयोग की फुल बेंच ने दिल्ली में कालीघाट (ममता गुट) के प्रतिनिधियों और ऋतब्रत बनर्जी के गुट दोनों की बातें सुनीं. दोनों ही पक्षों ने पार्टी पर अपनी दावेदारी साबित करने के लिए कई अहम दस्तावेज सौंपे. इसके बाद आयोग ने ममता बनर्जी को नोटिस भेजकर निर्देश दिया कि वे अपने जमा किए जाने वाले दस्तावेजों की एक कॉपी सबूत के तौर पर ऋतब्रत गुट को भी भेजें.
चुनाव आयोग के इस नोटिस पर तृणमूल कांग्रेस के सांसद और वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने कहा कि चुनाव आयोग ने अभी तक कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं किया है. आयोग ने हमें 16 और 17 सितंबर को पेश होने का निर्देश दिया है. इसका सीधा मतलब है कि हमारे उम्मीदवार पार्टी के आधिकारिक चिन्ह पर ही उपचुनाव लड़ रहे हैं.
वहीं टीएमसी नेता कुणाल घोष ने कानूनी पेचीदगियों पर बोलने से परहेज करते हुए कहा कि हमारी सर्वोच्च नेता ममता बनर्जी और कल्याण बनर्जी इस मामले को देख रहे हैं.
हालांकि, उन्होंने ऋतब्रत बनर्जी पर तीखा हमला बोला. कुणाल घोष ने कहा, “ऋतब्रत यह नहीं कह सकते कि TMC किसी की व्यक्तिगत संपत्ति नहीं है. वे ममता बनर्जी की पीठ में छुरा घोंप रहे हैं, जिन्होंने खून-पसीने से इस पार्टी को खड़ा किया है.”
दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष (LoP) ऋतब्रत बनर्जी ने चुनाव आयोग के पत्र को एक सामान्य प्रक्रिया करार दिया. उन्होंने कहा, “इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है.
आयोग ने हमें समय दिया था, हमने अपनी दलीलें और दस्तावेज सौंप दिए हैं. आयोग ने दोनों पक्षों को 16 तारीख तक अंतिम बातें रखने को कहा है, जिसके बाद 17 सितंबर को जरूरत पड़ने पर दोबारा सुनवाई हो सकती है. ना तो आप और ना ही कल्याण बनर्जी यह तय कर सकते हैं कि सिंबल किसे मिलेगा, इसका फैसला सिर्फ चुनाव आयोग करेगा.”
इस पूरे विवाद पर चुटकी लेते हुए बंगाल की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस अब खत्म हो चुकी है. उनके सिंबल की लड़ाई से किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता. रेजीनगर और नंदीग्राम उपचुनाव में क्या नतीजे आने वाले हैं, यह बात पूरा बंगाल अच्छी तरह से जानता है.
तृणमूल के इस अंदरूनी घमासान और 16-17 सितंबर की तारीखों पर अब पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं कि आखिर बंगाल की ‘घास-फूल’ की पहचान किस गुट के पास रहती है.