दिशा सालियान केस: आदित्य ठाकरे और अनिल देशमुख को 7 दिन का अल्टीमेटम, माफी नहीं तो 500 करोड़ का मानहानि मुकदमा

दिशा सालियान की मौत के मामला एक बार फिर राष्ट्रीय सुर्खियां बन गई है. दिशा के पिता सतीश सालियान ने शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे और पूर्व महाराष्ट्र गृह मंत्री अनिल देशमुख को 500 करोड़ रुपये के मानहानि दावे के साथ कानूनी नोटिस भेजा है. नोटिस में दोनों नेताओं से सात दिनों के भीतर बिना शर्त सार्वजनिक माफी मांगने और कथित रूप से झूठे व भ्रामक बयान वापस लेने की मांग की गई है. ऐसा न करने पर सिविल मानहानि के साथ-साथ आपराधिक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है.

सतीश सालियान की ओर से भेजे गए नोटिस में आरोप लगाया गया है कि आदित्य ठाकरे और अनिल देशमुख ने उनके न्याय के लिए चल रहे संघर्ष को राजनीतिक साजिश बताकर उनकी छवि और विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाया.

नोटिस के मुताबिक, इन बयानों से यह संदेश देने की कोशिश की गई कि दिशा सालियान मामले को राजनीतिक फायदे के लिए उछाला जा रहा है, जबकि परिवार न्यायिक प्रक्रिया के जरिए मामले की निष्पक्ष जांच चाहता है.

आदित्य के बयान का भी नोटिस में जिक्र

नोटिस में आदित्य ठाकरे के उस कथित बयान का भी जिक्र किया गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि इस मामले में सीबीआई पहले ही जांच कर चुकी है और किसी तरह की आपराधिक साजिश के आरोपों को खारिज कर चुकी है.

हालांकि सतीश सालियान की ओर से दावा किया गया है कि 2 सितंबर 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट में सीबीआई ने स्पष्ट किया था कि उसने पहले इस मामले की कोई जांच नहीं की थी. इसी आधार पर नोटिस में आदित्य ठाकरे के बयान को भ्रामक और तथ्यों के विपरीत बताया गया है.

कानूनी नोटिस में पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के 23 मार्च 2025 के उस कथित बयान का भी हवाला दिया गया है, जिसमें उन्होंने दिशा सालियान मामले को आदित्य ठाकरे को बदनाम करने की साजिश बताया था. सतीश सालियान का कहना है कि ऐसे बयान उनके परिवार की मंशा पर सवाल खड़े करते हैं और न्याय की मांग को राजनीतिक रंग देने की कोशिश करते हैं.

‘दोनों के बयान झूठे हैं’

नोटिस में कहा गया है कि दोनों नेताओं के बयान पूरी तरह झूठे, मानहानिकारक और गुमराह करने वाले हैं. सतीश सालियान का दावा है कि इससे उनकी प्रतिष्ठा को गंभीर क्षति पहुंची है और समाज में उनकी छवि प्रभावित हुई है. इसलिए दोनों नेताओं से 500 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की गई है.

इसके साथ ही नोटिस में यह भी कहा गया है कि मांगी गई माफी केवल निजी तौर पर नहीं, बल्कि सभी प्रमुख प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित और प्रसारित की जानी चाहिए, ताकि कथित रूप से हुई प्रतिष्ठा की क्षति की भरपाई हो सके.

सतीश सालियान की ओर से भेजे गए नोटिस में यह भी जिक्र किया गया है कि उनकी याचिका पर हाईकोर्ट की ओर से एफआईआर दर्ज करने और मामले की सीबीआई जांच के निर्देश दिए गए हैं. उनका कहना है कि ऐसे में मामले को राजनीतिक साजिश बताने वाले बयान न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले हैं.

नोटिस में साफ चेतावनी दी गई है कि यदि सात दिनों के भीतर उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं तो दोनों नेताओं के खिलाफ सिविल मानहानि का मुकदमा दायर किया जाएगा. इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 356 के तहत आपराधिक मानहानि की कार्रवाई का अधिकार भी सुरक्षित रखा गया है.



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