पीओके खाली करो… ज्ञान देना बंद करो… कौन हैं IFS क्षितिज त्यागी जिन्होंने UN में पाकिस्तान का कच्चा चिट्ठा खोला
Raisina News Desk- सितंबर 23, 2026 09:07 PM IST
जिनेवा: संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के मंच पर भारत ने पाकिस्तान के जहरीले प्रोपेगेंडा की धज्जियां उड़ा दीं. भारतीय स्थायी मिशन के काउंसलर क्षितिज त्यागी ने राइट ऑफ रिप्लाई के तहत पड़ोसी मुल्क को ऐसा आईना दिखाया कि पूरी दुनिया देखती रह गई. भारत ने साफ कर दिया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख देश का अभिन्न हिस्सा हैं. उन्होंने पाकिस्तान को अपनी अवैध कब्जे वाली भारतीय जमीन फौरन खाली करने की कड़ी चेतावनी दी. इसके साथ ही भारत ने 1990 के दौर में कश्मीरी पंडितों के साथ हुए बर्बर अत्याचार और सीमा पार से पोषित आतंकवाद का पूरा काला चिट्ठा खोल दिया. त्यागी ने पाकिस्तान को अल्पसंख्यकों पर ज्ञान बांटने के बजाय अपने गिरेबान में झांकने की नसीहत दी.
‘कश्मीरी पंडितों के दर्द का असली गुनहगार पाकिस्तान ही’
संयुक्त राष्ट्र के मंच से भारतीय डिप्लोमैट क्षितिज त्यागी ने इतिहास के सबसे काले पन्नों को बेबाकी से सबके सामने रखा. उन्होंने याद दिलाया कि 1990 में कश्मीरी पंडितों को आतंक की बदौलत उनके ही घरों से बेदखल कर दिया गया था. इन हत्यारे आतंकियों को पाकिस्तानी सेना और उसकी खुफिया एजेंसी ने हथियार मुहैया कराए थे. सीमा पार ट्रेनिंग कैंपों में इन खूनी दरिंदों को तैयार कर कश्मीर घाटी में भेजा गया था.
क्षितिज त्यागी ने जोर देकर कहा कि इन आतंकियों ने केवल कश्मीरी पंडितों को ही नहीं सताया. आगे चलकर इन्होंने हर उस कश्मीरी नागरिक को अपना निशाना बनाया, जिसने अमन का रास्ता चुना. इनमें बहुत बड़ी तादाद स्थानीय मुस्लिमों की भी थी. दशकों तक निर्दोष लोगों का खून बहाने वाली स्टेट पॉलिसी आज खुद को मानवाधिकारों का मसीहा साबित करने में जुटी है.
आतंकियों को पनाह देने वाला मुल्क कभी अल्पसंख्यकों का हितैषी हो सकता है?
पाकिस्तानी हुकूमत जब भी किसी अंतरराष्ट्रीय मंच पर जाती है, वह कश्मीर का झूठा रोना रोने लगती है. भारतीय काउंसलर ने इस ढोंग की बखिया उधेड़ते हुए कहा कि जहां खुद अल्पसंख्यकों पर रोजाना जुल्म होते हैं, वह भारत को उपदेश न दे. पाकिस्तान में हिंदू, सिख और ईसाई समुदाय की बेटियों का जबरन धर्म परिवर्तन कराया जाता है. वहां की व्यवस्था में अल्पसंख्यकों का वजूद मिटाने की साजिशें खुलेआम चलती हैं.
भारत ने स्पष्ट संदेश दिया कि जो देश खुद यूनाइटेड नेशंस के ब्लैकलिस्टेड आतंकियों को वीआईपी सुरक्षा देता है, उसका हर बयान खोखला है. पाकिस्तान की पहचान आज दुनिया भर में आतंक के एक्सपोर्टर के तौर पर सिमट चुकी है. ऐसे दिवालिया मुल्क को भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने या नसीहत देने का कोई नैतिक हक नहीं बनता है.
कौन हैं जिनेवा में पाकिस्तान को पानी पिलाने वाले डिप्लोमैट क्षितिज त्यागी?
पाकिस्तान के हुक्मरानों को उनकी असली औकात याद दिलाने वाले भारतीय राजनयिक क्षितिज त्यागी की चर्चा अब हर जगह हो रही है. वह भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) के 2012 बैच के काबिल अफसर हैं. वर्तमान में वह जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र मिशन में भारत के काउंसलर के पद पर मुस्तैदी से तैनात हैं.
डिप्लोमेसी की दुनिया में कदम रखने से पहले क्षितिज त्यागी एक अव्वल दर्जे के इंजीनियर थे. उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी खड़गपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल की. इसके बाद उन्होंने इसी प्रीमियर संस्थान से थर्मल एनर्जी और एनवायरमेंट इंजीनियरिंग में एमटेक पूरा किया.
कैसे कॉर्पोरेट की मोटी सैलरी छोड़कर आईएफएस बने क्षितिज त्यागी?
आईआईटी से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कॉर्पोरेट सेक्टर में अपनी मजबूत पहचान बनाई. क्षितिज त्यागी ने 2007 से लेकर 2010 तक नामी रियल एस्टेट कंसल्टिंग फर्म जोन्स लैंग लासेल (जेएलएल) में बिजनेस एनालिस्ट के तौर पर काम किया. बेहतरीन करियर और शानदार सैलरी होने के बावजूद उनका मन फाइलों और कॉरपोरेट मैट्रिक्स में नहीं रमा.
साल 2014 के एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि वह केवल कॉरपोरेट नंबर्स तक सीमित नहीं रहना चाहते थे. वह देश के आम लोगों की जिंदगी में सीधा सकारात्मक बदलाव लाना चाहते थे. इसी जज्बे के साथ उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की. साल 2011 में अपने दूसरे ही प्रयास में उन्होंने ऑल इंडिया 148वीं रैंक हासिल कर इतिहास रच दिया.
पुर्तगाल से जिनेवा तक कैसा रहा क्षितिज त्यागी का राजनयिक सफर?
सिविल सेवा में क्षितिज त्यागी ने सोशियोलॉजी और पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन को वैकल्पिक विषय के रूप में चुना था. उनके राजनयिक सफर की शुरुआत 2014 में पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में भारतीय दूतावास से हुई. वहां उन्होंने बतौर थर्ड सेक्रेटरी द्विपक्षीय व्यापार और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत किया.
इसके बाद उन्हें 2015 में ब्राजील के ब्रासीलिया में सेकेंड सेक्रेटरी और 2018 में मिस्त्र के काहिरा में फर्स्ट सेक्रेटरी का अहम दायित्व सौंपा गया. जनवरी 2024 में त्यागी को जिनेवा में यूएन के भारतीय स्थायी मिशन में फर्स्ट सेक्रेटरी बनाया गया. उनकी असाधारण प्रतिभा को देखते हुए जनवरी 2025 में उन्हें काउंसलर के पद पर प्रमोट कर दिया गया. अब इसी धारदार अंदाज के साथ वह यूएन जैसे बड़े मंचों पर भारत का पक्ष मजबूती से रखकर दुश्मनों को खामोश कर रहे हैं.