जो कांग्रेस के बड़े-बड़े नेता नहीं कर सके… नेहा बोरा ने 9 बार ड‍िटेन होकर वो कर द‍िखाया, कैसे बनीं राहुल गांधी की चहेती?

जो कांग्रेस के बड़े-बड़े नेता नहीं कर सके… नेहा बोरा ने 9 बार ड‍िटेन होकर वो कर द‍िखाया, कैसे बनीं राहुल गांधी की चहेती?

नई दिल्ली. कांग्रेस में एक से बढ़कर एक चेहरे हैं, जो सालों से सड़क से संसद तक चर्चा में रहे हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ से निकलीं आलका लंबा से लेकर रागिनी नायक तक कई युवा चेहरे भी हैं. लेकिन, सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के साथ ये सारे चेहरे नदारद दिखे. राहुल गांधी के साथ वह लड़की थी, जिसे दिल्ली पुलिस ने 24 घंटे के अंदर दो बार डिटेन किया था और अबतक 9 बार डिटेन हो चुकी हैं. कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के बाद अचानक नेहा बोरा की चर्चा पूरे देश में होने लगी है. इंडिया गठबंधन के सुप्रीम कोर्ट मार्च में वैसे तो राहुल गांधी के साथ-साथ चलने के लिए एक से बड़े नेता मुंह बाये हुए खड़े थे. लेकिन आइसा प्रेसिडेंट नेहा बोरा और प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ राहुल कदमताल मिलाते नजर आए. क्या राहुल गांधी को कन्हैया कुमार की तरह ही लेफ्ट से एक नया चेहरा मिल गया? क्यों सोमवार को नेहा बोरा को राहुल गांधी भीड़ से बचाते दिखे और उसके कंधे पर हाथ रखकर भविष्य के संकेत दे दिए? क्या कांग्रेस ज्वाइन करेंगी नेहा बोरा?

12 अक्टूबर को INDIA गठबंधन के सुप्रीम कोर्ट मार्च की कई तस्वीरें चर्चा में रहीं, लेकिन एक दृश्य ने खास तौर पर लोगों का ध्यान खींचा. कांग्रेस नेता राहुल गांधी, उनकी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा एक साथ मार्च करते नजर आए. भीड़ के बीच प्रियंका और नेहा आगे चलती दिखीं, जबकि राहुल गांधी उनके पीछे चलते हुए रास्ता बनाते नजर आए. इ स तस्वीर को राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और छात्र नेता नेहा बोरा के बीच तालमेल के रूप में देखा जा रहा है.

मार्च के दौरान दिल्ली की सड़कों पर विपक्षी नेताओं और समर्थकों की भीड़ जुटी थी. ऐसे माहौल में आगे चल रहे लोगों के लिए रास्ता बनाना और पीछे से भीड़ के बीच आगे बढ़ना आसान नहीं था. इसी दौरान सामने आए वीडियो में प्रियंका गांधी वाड्रा और नेहा बोरा आगे चलती दिखीं, जबकि राहुल गांधी उनके पीछे से उन्हें आगे बढ़ने के लिए जगह देते नजर आए. पीटीआई न्यूज एजेंसी की वीडियो में दो बार राहुल गांधी ने नेहा बोरा और बहन प्रियंका गांधी वाड्रा के कंधे पर हाथ रखा. यह बताता है कि राहुल गांधी कैसे भीड़ से दोनों को बचा रहे हैं औऱ आगे चलने का इशारा कर रहे हैं.

कौन हैं नेहा बोरा, जिनकी राहुल-प्रियंका के साथ दिखी तस्वीर?

इस दृश्य की खासियत यह थी कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के साथ छात्र राजनीति से जुड़ी एक महिला नेता भी एक ही फ्रेम में नजर आईं. नेहा बोरा ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. AISA वामपंथी छात्र राजनीति से जुड़ा संगठन है. नेहा बोरा की मौजूदगी ने इस मार्च में छात्र संगठनों की भागीदारी को भी सामने रखा. जहां राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा कांग्रेस का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, वहीं नेहा बोरा छात्र आंदोलन की आवाज के रूप में मार्च में शामिल थीं. तीनों का एक साथ चलते दिखना विपक्षी मार्च में अलग-अलग राजनीतिक धाराओं की भागीदारी का प्रतीकात्मक दृश्य बना.

प्रियंका गांधी वाड्रा मार्च में राहुल गांधी के साथ शामिल हुईं.

प्रियंका गांधी की मौजूदगी ने भी खींचा ध्यान

प्रियंका गांधी वाड्रा मार्च में राहुल गांधी के साथ शामिल हुईं. दोनों भाई-बहन की एक साथ मौजूदगी कांग्रेस नेतृत्व की साझा भागीदारी को दर्शाती थी. भीड़ के बीच प्रियंका और नेहा के आगे चलने तथा राहुल के पीछे से रास्ता बनाते दिखने वाले दृश्य ने मार्च को एक मानवीय पहलू भी दिया. इतना जरूर है कि मार्च के दौरान सामने आई इस तस्वीर ने नेताओं के बीच आपसी तालमेल और भीड़ के बीच आगे बढ़ने की कोशिश को उजागर किया.

आखिर किस मुद्दे पर निकला था मार्च?

INDIA गठबंधन के नेताओं ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका दायर करने और कथित ‘वोट चोरी’ तथा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े मुद्दों को उठाने के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च किया. विपक्षी दल चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठा रहे हैं. ये विपक्ष के आरोप हैं, जिन पर कानूनी और राजनीतिक स्तर पर बहस जारी है.

नेता पहले कॉन्स्टिट्यूशन क्लब से बसों में बाराखंभा रोड पहुंचे और फिर सुप्रीम कोर्ट की ओर बढ़े. मार्च के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी थी और पुलिस ने रास्ते में बैरिकेडिंग भी की. विपक्षी नेताओं का कहना था कि वे अपनी शिकायतें अदालत के सामने रखना चाहते हैं. राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और नेहा बोरा की साथ चलती तस्वीर ने मार्च के बड़े राजनीतिक मुद्दे के बीच एक अलग दृश्य पेश किया. एक तरफ कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व था, दूसरी तरफ छात्र संगठन की अध्यक्ष और उनके आसपास बड़ी संख्या में समर्थक थे.

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