कोलकाता नगर निगम में कितने वार्ड रहेंगे 144 या 209? कलकत्ता हाई कोर्ट 6 नवंबर को सुनाएगा फैसला, जानें पूरा विवाद

कोलकाता नगर निगम में कितने वार्ड रहेंगे 144 या 209? कलकत्ता हाई कोर्ट 6 नवंबर को सुनाएगा फैसला, जानें पूरा विवाद

Kolkata Municipal Corporation: कोलकाता नगर निगम में वार्डों की संख्या 144 से बढ़ाकर 209 करने के फैसले पर आज यानी 6 नवंबर को कलकत्ता हाई कोर्ट अपना आदेश सुनाएगा. सीपीआई (एम) ने परिसीमन प्रक्रिया को चुनौती दी है. अदालत ने फैसला आने तक चुनाव कार्यक्रम घोषित करने पर रोक लगा रखी है. अब सबकी नजर हाई कोर्ट के फैसले पर है.

Kolkata Municipal Election 2026: पश्चिम बंगाल में कोलकाता नगर निगम चुनाव से पहले वार्डों की संख्या को लेकर बड़ा कानूनी विवाद खड़ा हो गया है. नगर निगम में वार्डों की संख्या 144 से बढ़ाकर 209 कर दी गई थी. इस फैसले को सीपीआई (एम) ने हाई कोर्ट में चुनौती दी है. बुधवार को सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था. अब शुक्रवार, 6 नवंबर को फैसला सुनाया जाएगा. इससे चुनाव की आगे की प्रक्रिया भी तय होगी.

6 नवंबर को आज हाई कोर्ट सुनाएगा अहम फैसला

कलकत्ता हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच शुक्रवार को कोलकाता नगर निगम (केएमसी) के वार्ड परिसीमन मामले में अपना फैसला सुनाएगी. इस पीठ में न्यायमूर्ति सब्यसाची भट्टाचार्य और न्यायमूर्ति अर्जुन रॉय शामिल हैं. इस मामले की सुनवाई 4 नवंबर को पूरी हो गई थी. इसके बाद दोनों जजों की पीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया था. अदालत ने पश्चिम बंगाल राज्य चुनाव आयोग को भी साफ निर्देश दिया था. हाई कोर्ट का फैसला आने तक आयोग को कोलकाता नगर निगम चुनाव का कार्यक्रम घोषित नहीं करना है. ऐसे में आज आने वाला आदेश चुनाव की आगे की प्रक्रिया के लिहाज से काफी अहम है.

144 से बढ़ाकर 209 किए गए थे वार्ड

दरअसल, कोलकाता नगर निगम में वार्डों की संख्या बढ़ाने का फैसला लिया गया था. पहले यहां 144 वार्ड थे, लेकिन नए परिसीमन के तहत इनकी संख्या बढ़ाकर 209 कर दी गई. इसी प्रक्रिया पर कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) यानी सीपीआई (एम) ने सवाल उठाए.पार्टी नेता और पूर्व पार्षद दीपू दास ने इस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की. उनका आरोप है कि वार्डों की सीमाएं तय करते समय जरूरी पहलुओं का ध्यान नहीं रखा गया. याचिका में परिसीमन प्रक्रिया पर गंभीर आपत्तियां जताई गई हैं.

सीपीआई (एम) ने क्यों उठाए सवाल?

याचिकाकर्ता का कहना है कि नए वार्डों की सीमाएं तय करने से पहले नागरिकों की राय जानने के लिए उचित प्रक्रिया नहीं अपनाई गई. इलाके में जाकर स्थिति की जांच करने और सार्वजनिक सुनवाई कराने का प्रस्ताव भी दिया गया था. लेकिन इन सुझावों पर ध्यान नहीं दिया गया. याचिका में यह भी कहा गया कि परिसीमन करते समय वार्डों की आबादी और उनकी भौगोलिक स्थिति जैसे जरूरी पहलुओं पर ठीक से विचार नहीं हुआ. याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि पूरी प्रक्रिया किसी खास राजनीतिक दल को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से की गई.

पहले सिंगल बेंच में पहुंचा था मामला

इस मामले की सुनवाई शुरुआत में न्यायमूर्ति हिरण्मय भट्टाचार्य की एकल पीठ में हुई थी. हालांकि, उन्होंने कोई विशेष आदेश देने के बजाय सभी संबंधित पक्षों को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था. इसके बाद याचिकाकर्ता ने एकल पीठ के आदेश को चुनौती देते हुए डिवीजन बेंच का रुख किया. उनका तर्क था कि यदि अदालत के स्पष्ट फैसले से पहले चुनाव आयोग ने चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया, तो उनकी याचिका का कोई मतलब नहीं रह जाएगा.

सात नगर निकायों में होने हैं चुनाव

पश्चिम बंगाल के सात शहरी निकायों में कोलकाता नगर निगम और हावड़ा नगर निगम भी शामिल हैं. इन निकायों में दिसंबर के आखिरी सप्ताह में मतदान होने की संभावना जताई जा रही है. वहीं, चुनाव के नतीजे अगले साल जनवरी के पहले सप्ताह में घोषित किए जा सकते हैं. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि हाई कोर्ट 144 से 209 वार्ड करने के फैसले को सही मानता है या परिसीमन प्रक्रिया पर कोई दूसरी व्यवस्था देता है. अदालत के आदेश से कोलकाता नगर निगम चुनाव की आगे की राह साफ होगी.

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