इथेनॉल को लेकर C-Voter का आया सर्वे, 48 प्रतिशत NDA समर्थकों को ही रास नहीं आ रहा ये फैसला | Ethanol Blending Policy Faces Criticism C Voter Survey



क्या आपकी गाड़ी भी पेट्रोल डलवाने के बाद पहले जैसा माइलेज नहीं दे रही? क्या आपको भी डर है कि कहीं इथेनॉल मिला हुआ ईंधन आपकी कीमती गाड़ी के इंजन को अंदर से खोखला न कर रहा हो?  पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की सरकारी नीति को लेकर देश की जनता क्या सोचती है इसे लेकर सी-वोटर का सर्वे आया है.

सर्वे एजेंसी CVoter के हालिया स्नैप पोल में लोगों ने इथेनॉल मिलावट पर अपनी राय रखी है. 8 और 9 जुलाई 2026 को देश के सभी जिलों में किए गए इस व्यापक सर्वे में जो आंकड़े सामने आए हैं उसमें वो सारे सवाल पूछे गए हैं जो आपके मन में चल रहे होंगे. 

एनडीए समर्थकों को भी रास नहीं आ रही ब्लेंडिंग

जब जनता से सीधा सवाल पूछा गया कि क्या वे पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की सरकारी नीति का समर्थन करते हैं, तो नतीजों ने सबको चौंका दिया. देश की 52% जनता ने सीधे तौर पर इस नीति को नकार दिया है.

एनडीए समर्थकों में से भी 48.2% लोगों ने इस नीति का विरोध किया है, जबकि केवल 24.4% ही इसके पक्ष में दिखे. विपक्ष के समर्थकों में यह नाराजगी और भी ज्यादा है. वहां 57.2% लोग इथेनॉल ब्लेंडिंग के खिलाफ हैं और सिर्फ 22.2% इसके समर्थन में हैं.

क्या जल्दबाजी में लिया गया फैसला?

सर्वे में पूछा गया कि क्या इथेनॉल को पेट्रोल में मिलाने का फैसला जल्दबाजी में लिया गया. इसपर लोगों का मानना है कि सरकार ने बिना सोचे-समझे और बिना पूरी रिसर्च के इस नीति को लागू कर दिया है.

सर्वे में शामिल 59.1% लोगों का कहना है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति को लागू करने में भारी जल्दबाजी दिखाई गई है. इस बात से 54.4% एनडीए समर्थक और 63.7% विपक्षी समर्थक पूरी तरह सहमत हैं.

गाड़ी खराब होने और माइलेज घटने का सता रहा है डर?

लोग अपनी गाड़ियों में E20 पेट्रोल (20% इथेनॉल मिक्स पेट्रोल) इस्तेमाल करने से कतरा रहे हैं. देश के 55.1% लोग अपनी गाड़ी में E20 पेट्रोल नहीं डलवाना चाहते. इसके पीछे दो सबसे बड़े कारण हैं.

देश के 52.8% लोगों का साफ मानना है कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से उनकी गाड़ियों का माइलेज कम हो जाता है. इसमें 51.2% एनडीए और 55.4% विपक्ष के वोटर शामिल हैं.

सर्वे के मुताबिक, 54.2% लोगों को लगता है कि यह पेट्रोल ज्यादा गाड़ियों को नुकसान पहुंचा रहा है. इसके अलावा 14.3% लोगों का मानना है कि इससे कुछ खास किस्म की गाड़ियों को नुकसान पहुंचता है. एनडीए के भी लगभग आधे (49.9%) समर्थक मानते हैं कि इससे गाड़ियां खराब होती हैं.

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