पैलेट गन और महिला प्रदर्शनकारियों पर हिंसा की जांच सबसे पहले; छात्र प्रदर्शन मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त
Raisina News Desk- सितंबर 16, 2026 07:12 AM IST

नई दिल्ली:
20 जुलाई के छात्र प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने जांच प्रक्रिया को स्पष्ट दिशा देते हुए हाई पावर्ड एनक्वायरी कमेटी (HPEC) के लिए प्राथमिक जांच बिंदु निर्धारित कर दिए हैं. मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने निर्देश दिया है कि कमेटी सबसे पहले पैलेट गन के इस्तेमाल, महिला प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित हिंसा और उत्पीड़न, पुलिसकर्मियों को लगी चोटों तथा दोनों पक्षों की ओर से हुई हिंसा और संपत्ति को हुए नुकसान के आरोपों की जांच करे. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि व्यापक संवैधानिक मुद्दों पर अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट स्वयं सुनाएगा.
सुप्रीम कोर्ट ने 10 सितंबर की सुनवाई के बाद जारी अपने विस्तृत आदेश में हाई पावर्ड एनक्वायरी कमेटी (HPEC) के लिए जांच के प्राथमिक बिंदु निर्धारित कर दिए हैं. मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं, ने कहा कि कमेटी पहले चरण में चार प्रमुख आरोपों की जांच करेगी. इनमें प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन का इस्तेमाल, महिला प्रदर्शनकारियों को कथित तौर पर निशाना बनाकर की गई हिंसा और उत्पीड़न, पुलिसकर्मियों को लगी चोटें और दोनों पक्षों की ओर से हुई हिंसा तथा सार्वजनिक और निजी संपत्ति को हुए नुकसान के आरोप शामिल हैं.
अदालत ने स्पष्ट किया कि HPEC की भूमिका केवल तथ्यात्मक आरोपों की जांच कर न्यायालय की सहायता करना है. प्रदर्शन के दौरान कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा फेसियल रिकग्निशन तकनीक के इस्तेमाल और नागरिक अधिकारों से जुड़े व्यापक संवैधानिक सवालों पर फैसला सुप्रीम कोर्ट स्वयं करेगा. कोर्ट ने कहा कि इस तरह के बड़े संवैधानिक प्रश्नों पर उचित समय आने पर अलग से विचार किया जाएगा.
सुनवाई के दौरान कुछ याचिकाकर्ताओं ने हाई पावर्ड एनक्वायरी कमेटी के पुनर्गठन की मांग की थी. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह मांग खारिज कर दी. बेंच ने कहा कि कमेटी के खिलाफ जांच शुरू होने से पहले ही पूर्वधारणाएं बनाना और उसके कामकाज पर सवाल उठाना उचित नहीं है. अदालत ने कहा कि कमेटी का गठन निष्पक्ष, पारदर्शी और स्वतंत्र जांच के उद्देश्य से किया गया है तथा उससे निष्पक्षता के सर्वोच्च मानकों के अनुरूप काम करने की अपेक्षा है. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कमेटी किसी पक्ष विशेष के हितों की रक्षा के लिए नहीं बनाई गई है.
सुप्रीम कोर्ट ने जांच से जुड़े गवाहों की सुरक्षा को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं. अदालत ने HPEC को आदेश दिया कि ऐसे गवाह जिन पर दबाव, डराने-धमकाने या प्रताड़ना की आशंका है, उनकी पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाए. कोर्ट ने कमेटी को आवश्यकता पड़ने पर एक अलग ऑनलाइन पोर्टल विकसित करने की अनुमति भी दी है, जहां गवाह और अन्य संबंधित पक्ष अपने दस्तावेज, वीडियो, साक्ष्य और अन्य सामग्री जमा करा सकेंगे.
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक 14 वर्षीय महिला प्रदर्शनकारी और उसके परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की. अदालत ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि छात्रा और उसके परिवार को संभावित खतरों का आकलन कर आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए. साथ ही कोर्ट ने कथित तौर पर छात्रा और उसके परिवार को धमकी देने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ शिकायतों की त्वरित जांच के निर्देश दिए हैं. दिल्ली पुलिस को अगली सुनवाई में इस संबंध में विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी. कोर्ट ने कहा कि यदि आरोप सही हैं और पीड़िता तथा उसके परिवार को धमकाया जा रहा है, तो इस मुद्दे को सिर्फ जांच रिपोर्ट आने तक लंबित नहीं रखा जा सकता.
मामले की निष्पक्ष निगरानी और अदालत की सहायता के लिए सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. मोनिका गोंसाईं और एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड सी. सोलोमन को अमिकस क्यूरी नियुक्त किया है. ये दोनों HPEC और सुप्रीम कोर्ट के बीच समन्वय स्थापित करने के साथ-साथ दोनों पक्षों के बीच स्वतंत्र मध्यस्थ की भूमिका भी निभाएंगे.
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि HPEC केवल जांच कर अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें दे सकती है. किसी भी मामले में FIR दर्ज करने या आपराधिक जांच शुरू करने का अधिकार सुप्रीम कोर्ट ने अपने पास सुरक्षित रखा है. गौरतलब है कि 18 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय HPEC का गठन किया था. कमेटी को पुलिस बल के कथित अत्यधिक इस्तेमाल, सुरक्षाकर्मियों पर हमले और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे आरोपों की स्वतंत्र जांच का जिम्मा सौंपा गया है.
इससे पहले 1 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपने विशेष अधिकारों का प्रयोग करते हुए 20 से 25 जुलाई के बीच दर्ज प्रदर्शनों से संबंधित FIR की जांच और आगे की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी. इतना ही नहीं, अदालत ने इन घटनाओं से जुड़े नए FIR दर्ज करने पर भी अंतरिम रोक लगाई थी. अब पूरी तथ्यात्मक जांच HPEC की निगरानी में तय दायरे के भीतर आगे बढ़ेगी.
सुप्रीम कोर्ट ने HPEC को जल्द से जल्द सदस्य सचिव नियुक्त करने और अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है. अब इस महत्वपूर्ण मामले की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को होगी.