सतपुड़ा के जंगल और दुर्गम पहाड़ पार कर आदिवासियों तक पहुंचे ‘ग्रीन कमांडो’, बड़वानी के हेल्थ मॉडल की चर्चा



बड़वानी:

Mission Green Commando: मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में स्थित सतपुड़ा की दुर्गम पहाड़ियों और घने वन क्षेत्रों में प्रशासन ने एक अनूठी पहल के जरिए स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम छोर तक पहुंचाने का प्रयास किया है. पाटी विकासखंड के आदिवासी बहुल बोकराटा क्षेत्र में संचालित ‘मिशन ग्रीन कमांडो’ के तहत स्वास्थ्य, राजस्व और पंचायत विभाग के कर्मचारियों, आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम, स्वयंसेवकों और चिकित्सा दलों ने मिलकर उन बस्तियों तक पहुंच बनाई, जहां सामान्य परिस्थितियों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचना बेहद कठिन होता है. कठिन पहाड़ी रास्तों, जंगलों और संकरी पगडंडियों को पार करते हुए करीब 2,500 घरों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाई गईं. इस अभियान ने यह साबित कर दिया कि सेवा का संकल्प हो तो भौगोलिक बाधाएं भी रास्ता नहीं रोक सकतीं.

दुर्गम आदिवासी क्षेत्र में चलाया गया विशेष अभियान

बड़वानी जिले के पाटी विकासखंड का बोकराटा क्षेत्र प्रदेश के सबसे कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में गिना जाता है. यहां कई फालिया और बस्तियां पहाड़ियों की ऊंचाइयों पर स्थित हैं, जहां तक पहुंचने के लिए सड़क सुविधा लगभग नहीं के बराबर है. इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने ‘मिशन ग्रीन कमांडो’ शुरू किया. इस अभियान में शामिल स्वास्थ्यकर्मियों, राजस्व अधिकारियों, पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय स्वयंसेवकों को ‘ग्रीन कमांडो’ नाम दिया गया. इनका उद्देश्य दूरस्थ आदिवासी परिवारों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना और उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ना था.

कलेक्टर की मॉनिटरिंग में बनी विस्तृत रणनीति

कलेक्टर जयति सिंह ने बताया कि इस अभियान की विस्तृत माइक्रो प्लानिंग तैयार की गई. विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर प्रत्येक टीम की जिम्मेदारी तय की गई. दुर्गम क्षेत्रों की परिस्थितियों को देखते हुए परिवहन, चिकित्सा सामग्री, मानव संसाधन और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की पहले से तैयारी की गई, ताकि अभियान में किसी प्रकार की बाधा न आए. प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि सबसे दूरस्थ बस्तियां भी इस अभियान से वंचित न रहें.

Mission Green Commando: मिशन ग्रीन कमांडो

200 टीमों ने 2,500 घरों तक पहुंचाई सेवाएं

अभियान के तहत लगभग 200 संयुक्त टीमों का गठन किया गया. प्रत्येक टीम में नोडल अधिकारी, चिकित्सा अधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO), आशा, एएनएम, आशा सहयोगिनी और स्थानीय वालंटियर्स शामिल थे. इन टीमों ने 9 ग्राम पंचायतों के करीब 2,500 घरों तक पहुंचकर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराईं. यह अभियान केवल औपचारिक दौरा नहीं था, बल्कि घर-घर जाकर लाभार्थियों की पहचान और स्वास्थ्य जांच का व्यापक प्रयास था.

जहां वाहन रुके, वहां से पैदल बढ़े ‘ग्रीन कमांडो’

दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचने के लिए प्रशासन ने 10 बसों और करीब 100 शासकीय वाहनों की व्यवस्था की. स्थानीय सरपंचों, सचिवों, पटवारियों और ग्रामीणों ने भी मोटरसाइकिल और अन्य स्थानीय साधनों की मदद से स्वास्थ्य टीमों को अंतिम मोटर योग्य मार्ग तक पहुंचाया. इसके बाद कई स्थानों पर स्वास्थ्य दलों को कई किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ा. दवा किट, टीकाकरण सामग्री, जांच उपकरण और आवश्यक चिकित्सा सामग्री अपने साथ लेकर टीमों ने पहाड़ों और जंगलों के बीच बसे परिवारों तक पहुंच बनाई.

Mission Green Commando: दुर्गम स्थानों पर पहुंचे स्वास्थ्यकर्मी

स्वास्थ्य सेवाओं पर रहा विशेष जोर

अभियान के दौरान सभी पात्र बच्चों के शत-प्रतिशत टीकाकरण को प्राथमिकता दी गई. साथ ही:

  • गर्भवती महिलाओं का पंजीयन और प्रसव पूर्व जांच (ANC)
  • सिकल सेल एनीमिया की स्क्रीनिंग
  • कुपोषित बच्चों की पहचान
  • गंभीर रूप से कम वजन वाले बच्चों का चिन्हांकन
  • वरिष्ठ नागरिकों की स्वास्थ्य जांच
  • किशोर-किशोरियों का स्वास्थ्य मूल्यांकन

जैसी गतिविधियां भी की गईं. इसके अलावा चार प्राथमिकता वाले समूहों यानी गर्भवती महिलाएं, पांच वर्ष तक के बच्चे, किशोर-किशोरियां और वरिष्ठ नागरिकों की पहचान कर उनके फॉलोअप की व्यवस्था भी की गई.

दवा किट और जागरूकता अभियान भी चलाया गया

स्वास्थ्य जांच के साथ-साथ ग्रामीणों को ओआरएस पैकेट और आवश्यक दवाइयां भी वितरित की गईं. टीमों ने लोगों को स्वच्छता, पोषण, सुरक्षित मातृत्व, टीकाकरण और मौसमी बीमारियों से बचाव के बारे में जागरूक किया. ग्रामीणों को बताया गया कि समय पर स्वास्थ्य परीक्षण और टीकाकरण कई गंभीर बीमारियों को रोक सकता है.

आकांक्षी विकासखंड पाटी बना मॉडल

पाटी देश के आकांक्षी विकासखंडों में शामिल है. ऐसे क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं. ‘मिशन ग्रीन कमांडो’ को प्रशासन ने केवल स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं बल्कि सुशासन और जनभागीदारी के मॉडल के रूप में विकसित किया.
अभियान में स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी भी देखने को मिली, जिससे इसकी सफलता और प्रभाव बढ़ा.






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