सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता का उत्पात, कागज उड़ाए और चिल्लाया | supreme court Rough Petitioner Prabal Pratap singh justice justice kv Viswanathan and justice alok aradhe


सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता का उत्पात, कागज उड़ाए और चिल्लाया

सुप्रीम कोर्ट में हंगामा (फाइल फोटो)

नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट में आज एक याचिकाकर्ता ने जमकर उत्पात किया. आरोपी याचिकाकर्ता की पहचान प्रबल प्रताप सिंह के रूप में हुई है. इस घटना से शीर्ष अदालत के जज में हतप्रभ रह गए. जस्टिस केवी विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ में सुनवाई के दौरान ये वाकया सामने आया. सुबह 11 बजे हो रही सुनवाई के दौरान हंगामा हो गया. बाद में याचिकाकर्ता को कोर्ट से बाहर कर दिया गया. 

सुप्रीम कोर्ट के अंदर हंगामा 

कोर्ट के अंदर जाकर आरोपी याचिकाकर्ता ने सीधे जजों को आदेश देने के अंदाज में बोलना शुरू कर दिया. उसने कोर्ट में कहा कि मिस्टर जूडिशल सर्वेंट, मैं आपको आदेश देता हूं कि लखनऊ में साइबर क्राइम का सिंडिकेट चलाने वाले एक एएसपी के खिलाफ FIR का आदेश दीजिए. इस पर जस्टिस विश्वनाथन ने कहा कि क्या तुम हमें आदेश दे रहे हो? 

आरोपी शख्स ने कोर्ट में मचाया शोर

इसके बाद याचिकाकर्ता ने शोर मचाना शुरू कर दिया और कागज उड़ाने लगा. इसके बाद वहां मौजूद गार्ड्स ने उसे खींचकर बाहर निकाला. याचिकाकर्ता प्रबल प्रताप सिंह खुद पार्टी इन पर्सन के तौर पर पेश हुआ था. बताया जा रहा है कि खुद को “सॉवरेन” बताने वाले याचिकाकर्ता ने कोर्टरूम में कागज उछाले.

पुलिस हिरासत में शख्स 

इसके हंगामे के बाद उसे कोर्टरूम से बाहर ले जाया गया. इसके बाद पुलिस ने उसे हिरासत में लिया है. दिल्ली पुलिस उससे पूछताछ कर रही है. यह घटना सुबह करीब 11 बजे आंशिक कार्य दिवस के दौरान हुई. 

सुप्रीम कोर्ट बोला- कोई ऐक्शन नहीं लेंगे 

प्रबल प्रताप सिंह की हरकत पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वो उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करने जा रहे हैं. सर्वोच्च अदालत ने कहा कि हम केवल उनसे सहानुभूति रखते हैं. बेंच ने इस घटना के बावजूद किसी कार्रवाई करने से इनकार कर दिया. प्रबल प्रताप सिंह की हरकत पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वो उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करने जा रहे हैं. सर्वोच्च अदालत ने कहा कि हम केवल उनसे सहानुभूति रखते हैं. बेंच ने इस घटना के बावजूद किसी कार्रवाई करने से इनकार कर दिया. जस्टिस विश्वनाथन ने आदेश देते हुए कहा कि हम उनके खिलाफ कार्रवाई का कोई प्रस्ताव नहीं करते हैं. जहां तक उनकी याचिका के मेरिट का सवाल है तो हमने रिकॉर्ड को देखा है. हमें इसमें कार्रवाई करने का कोई तथ्य नहीं दिखता है और याचिका खारिज की जाती है. जस्टिस विश्वनाथन ने इस घटना पर कहा कि याचिकाकर्ता काफी डिस्टर्ब हैं. ये उनकी हताशा थी. हमें उनसे सहानुभूति है. 




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