10 साल में 70% सिकुड़ी त्सो कार झील, अब ग्लेशियर के पानी से फिर भरने की कोशिश
Raisina News Desk- सितंबर 14, 2026 01:50 AM IST

लद्दाख की मशहूर त्सो कार झील पिछले एक दशक में करीब 70 फीसदी सिकुड़ गई है. कभी करीब 11,000 एकड़ में फैली यह झील अब घटकर लगभग 3,200 एकड़ रह गई है. अब झील को फिर भरने के लिए ग्लेशियर से आने वाले पानी का रुख त्सो कार की ओर मोड़ा जा रहा है. लद्दाख प्रशासन के मुताबिक, करीब 18,045 फीट की ऊंचाई से बहने वाली रूपशो खरनाक धारा त्सो कार से लगभग 11.5 किलोमीटर दूर है. दोनों जगहों के बीच करीब 3,000 फीट का ऊंचाई का अंतर है. अभी इस धारा का पानी बिना इस्तेमाल हुए सिंधु नदी में चला जाता है.
प्रशासन के मुताबिक, गर्मियों में इस धारा का अधिकतम बहाव करीब 132 क्यूसेक यानी लगभग 32 करोड़ लीटर प्रतिदिन है. योजना के तहत इस पानी को प्राकृतिक ढलान के सहारे तीन निचले इलाकों से होकर त्सो कार तक पहुंचाया जाएगा.
पहला इलाका करीब 270 एकड़, दूसरा 24 एकड़ और तीसरा 10 एकड़ में फैला है. इनके निकास पर छोटे बांध और RCC पाइप लगाए जा रहे हैं, ताकि पानी के बहाव को नियंत्रित किया जा सके. तीसरा इलाका त्सो कार से करीब 400 मीटर दूर है.
नया 11 किलोमीटर लंबा पक्का जलमार्ग बनाने के बजाय मिट्टी की नहर और प्राकृतिक ढलान का इस्तेमाल किया जा रहा है. प्रशासन के मुताबिक, इससे बड़े पैमाने पर निर्माण से होने वाले पर्यावरणीय असर को कम किया जा सकेगा.
काम 2 सितंबर से शुरू हो चुका है. प्रशासन के मुताबिक, 9 सितंबर से करीब 20 क्यूसेक पानी पहले इलाके में पहुंचाया जा रहा है. चार दिनों में यह इलाका करीब 20 फीसदी भर गया.
तीनों इलाकों में कुल करीब 123 करोड़ लीटर पानी जमा किया जा सकता है.
प्रशासन के मुताबिक, ये तीनों इलाके आगे चलकर मीठे पानी की आर्द्रभूमि बन सकते हैं. ग्लेशियर से आने वाली गाद पहले इन्हीं इलाकों में जमा होगी और उसके बाद पानी झील तक पहुंचेगा.
इन नए जलक्षेत्रों से प्रवासी पक्षियों को भी फायदा होने की उम्मीद है. त्सो कार पहले से ही प्रवासी पक्षियों और ब्लैक-नेक्ड क्रेन के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र है. झील के सिकुड़ने का असर स्थानीय पश्मीना बकरी पालकों पर भी पड़ा है. प्रशासन के अनुसार, चरागाह कम होने के कारण कई पालकों को अपने घरों से 50 से 75 किलोमीटर दूर तक जाना पड़ रहा है.
उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने 10 अगस्त को त्सो कार का दौरा किया था. स्थानीय ग्रामीणों ने उन्हें झील के सिकुड़ने और पक्षियों की संख्या घटने की जानकारी दी.
इसके बाद विभाग ने सर्वे किया और 30 अगस्त को रिपोर्ट सौंपी. शुरुआत में करीब 11 किलोमीटर लंबी RCC नहर बनाने का प्रस्ताव था, लेकिन पर्यावरण से जुड़ी चिंताओं को देखते हुए मिट्टी की नहर का विकल्प चुना गया. काम 2 सितंबर से शुरू हुआ. प्रशासन को उम्मीद है कि अक्टूबर 2027 तक त्सो कार झील को पूरी तरह बहाल किया जा सकेगा.
वीके सक्सेना ने कहा, “रूपशो खरनाक की धारा का रुख मोड़कर हमारा लक्ष्य त्सो कार झील में फिर से जीवन लाना है.”