2034 तक पहली उड़ान,120 किलोन्यूटन थ्रस्ट, 100 फीसदी IP… एमका फाइटर जेट इंजन के लिए रॉल्स-रॉयस का बड़ा ऑफर
Raisina News Desk- अगस्त 30, 2026 05:05 AM IST

भारत के एयरोस्पेस सेक्टर के लिए एक बड़ी खबर है. ब्रिटिश इंजीनियरिंग कंपनी रॉल्स-रॉयस और रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) ने ‘एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट’ (AMCA) प्रोग्राम के लिए पूरी तरह से स्वदेशी जेट इंजन बनाने के लिए एक स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप की है. अगस्त 2026 में घोषित इस सहयोग का मकसद भारत में एक खास ‘सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस’ बनाना है. यह नई सुविधा इंजन के पूरे लाइफ़साइकिल को संभालेगी, जिसमें ओरिजिनल डिजाइन और बड़े पैमाने पर टेस्टिंग से लेकर बड़े पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग और लंबे समय तक ऑपरेशनल सपोर्ट शामिल होगा. इस जॉइंट वेंचर का शुरुआती लक्ष्य एक ऐसा पावरप्लांट बनाना है, जो आफ्टरबर्नर चालू होने पर 120 किलोन्यूटन (kN) का थ्रस्ट दे सके, और जिसका कोर 73kN का ड्राई थ्रस्ट पैदा करे.
इसके ब्लूप्रिंट में अपग्रेड करने का एक ऐसा रास्ता भी शामिल है, जिसे आसानी से बढ़ाया जा सकता है. जैसे-जैसे भविष्य में AMCA के नए वर्जन को ज्यादा पावर की जरूरत होगी, इंजन के ड्राई कोर को 88kN तक बढ़ाया जा सकेगा, जिससे यह 145kN का जबरदस्त वेट थ्रस्ट दे पाएगा. इस प्रस्ताव की एक अहम बात पूरी तरह से तकनीकी आजादी है. रोल्स-रॉयस ने स्थानीय कोर इंजीनियरिंग टीम के साथ मिलकर भारत में ही इंजन बनाने का वादा किया है. सबसे जरूरी बात यह है कि भारत सरकार के पास इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) अधिकार पूरी तरह से (100%) रहेंगे.
चूंकि यह सरकार द्वारा मंज़ूर किया गया एक आधिकारिक प्रोग्राम होगा, इसलिए भारत को भविष्य में किसी बाहरी मंजूरी के बिना इस टेक्नोलॉजी को अपग्रेड करने, उसमें बदलाव करने या उसे मॉडिफ़ाई करने की आजादी होगी. आधुनिक रक्षा खरीद में इस तरह के कंट्रोल की बहुत मांग रहती है. इस इंजन के ऑपरेशनल फायदे बहुत बड़े हैं. एक एडवांस्ड फ़ाइटर जेट में 145kN के दो इंजन लगाने से कुल 290kN का थ्रस्ट मिलेगा. यह जबरदस्त पावर 33 से 35 टन वजन वाले भारी एयरक्राफ्ट के लिए एकदम सही है, जो एक असली 6th-जेनरेशन एयर-सुपीरियरिटी फाइटर की डिजाइन जरूरतों से पूरी तरह मेल खाता है.
इस तरह के भविष्य के जेट्स को टेक-ऑफ के समय ज्यादा वजन की जरूरत होती है, ताकि उनमें बड़े इंटरनल वेपन बे (हथियार रखने की जगह), लंबी दूरी के मिशन के लिए ज्यादा फ़्यूल और “लॉयल विंगमैन” कॉम्बैट ड्रोन के साथ तालमेल बिठाने के लिए जरूरी कॉम्प्लेक्स इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम लगाए जा सकें. ओपन-सोर्स रिपोर्ट के अनुसार, इस जॉइंट प्रपोजल में एक आक्रामक टाइमलाइन तय की गई है, जिसमें 2030 तक इंजन कोर टेस्ट, 2034 तक पहली उड़ान और 2036 तक बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन का लक्ष्य रखा गया है. यह प्रस्ताव रॉल्स-रॉयस को फ़्रांसीसी एयरोस्पेस कंपनी सैफ़्रान के इंजन ऑफर के साथ सीधे मुकाबले में खड़ा करता है, क्योंकि भारत अपनी भविष्य की रक्षा जरूरतों के लिए एक सॉवरेन एविएशन इकोसिस्टम बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है.
मैथ्स में AI अच्छा या बुरा? ऑनलाइन पोस्ट वायरल होने के बाद सबसे बेहतरीन गणितज्ञों का आया जवाब