'तानाशाही से कानून तक', चुनाव आयोग पर बीजेपी नेता बृजभूषण शरण सिंह ने क्यों दिया यह बयान? जानें इसके मायने
Raisina News Desk- अक्टूबर 04, 2026 08:20 PM IST
नई दिल्ली. अपने बयानों से लगातार चर्चा में रहने वाले बीजेपी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने एक बार फिर बड़ा बयान दिया है. सिंह ने चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया और ईवीएम पर उठ रहे सवालों को लेकर विपक्ष पर करारा हमला बोला है. उन्होंने दावा किया कि 2023 से पहले जब तक संसद ने कानून नहीं बनाया था, तब तक चुनाव आयोग में नियुक्ति की कोई स्पष्ट प्रक्रिया नहीं थी और वह समय ‘हिटलरशाही तानाशाही’ जैसा था. सिंह के इस बयान का समय बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि सोमवार यानी 5 अक्टूबर 2026 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर दायर याचिकाओं पर एक महत्वपूर्ण सुनवाई होने जा रही है. आइए जानते हैं कि गोंडा से तुलना कर बृजभूषण शरण सिंह ने कैसे एसआईआर पर विपक्ष को चारों खाने चित कर दिया.
बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि 2023 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद संसद ने संवैधानिक रूप से कानून बनाया. इस कानून के तहत तीन सदस्यीय समिति में प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केंद्रीय मंत्री को शामिल किया गया. उन्होंने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्तों नवीन चावला और एमएस गिल की नियुक्तियों का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि अतीत में कांग्रेस सरकारों के दौरान चुनाव आयुक्तों का चयन किस प्रक्रिया के तहत किया जाता था? उन्होंने कहा कि 2014 के बाद से विपक्षी दलों के राजनीतिक किले एक-एक करके ढह रहे हैं, इसलिए वे EVM और चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं.