मोदी को बैलेट का चैलेंज देती कांग्रेस और राहुल ऐसा निपटे, अब 10 लाख की भीड़ वाला प्लान भी चौपट?

मोदी को बैलेट का चैलेंज देती कांग्रेस और राहुल ऐसा निपटे, अब 10 लाख की भीड़ वाला प्लान भी चौपट?

इतने दिनों से राहुल गांधी और इंडी वालों का इकोसिस्टम लगा हुआ था कि नरेंद्र मोदी को कैसे इलेक्शन कमीशन के मामले में घेरा जाए. इसमें इन्होंने सड़क पर खूब तमाशा किया, इसमें कॉकरोच वाले भी कूदे, फिर ये सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गए, अब तो दिल्ली में 10 लाख लोगों को लाने का प्लान बनाकर ये बैठे हैं. लेकिन आज जो हुआ है, उसने राहुल गांधी और इंडी के पूरे इकोसिस्टम के एजेंडे को तहस नहस कर दिया है. एक झटके में वोट चोरी वाला नैरेटिव, ईवीएम वाला नैरेटिव, एसआईआर वाला नैरेटिव, सारा एजेंडा धुआं धुआं हो गया.

आप देखिए कि ये वही लोग हैं जो नरेंद्र मोदी को चैलेंज देते थे कि बैलेट से चुनाव करा के देखो, फिर बताएंगे. लेकिन ये नरेंद्र मोदी को क्या ही बताएंगे, जब अपने ही राज्य में, जहां इनकी सरकार है, वहां इनका चुनाव में खाता नहीं खुल रहा है. राहुल गांधी के बारे में पहले ही कहा जाता रहा है कि वो हार की सेंचुरी लगा चुके हैं. आज तो राहुल गांधी और कांग्रेस का ऐसा ज़ीरो आया है, कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी रहा नहीं गया. उन्होंने कांग्रेस और राहुल गांधी की क्लास लगा दी. ऐसा सवाल पूछ गया कि पूरी कांग्रेस को आग लग गई. आज हम इसके बारे में आपको बताएंगे…

राहुल गांधी, इंडी गठबंधन और इनके इकोसिस्टम ने पूरा माहौल ये बनाया हुआ था कि नरेंद्र मोदी तो वोट चोरी से जीतते हैं. बीजेपी ईवीएम सेट करके चुनाव जीतती है. SIR बीजेपी को जिताने के लिए हुआ है. लेकिन आज पूरे देश ने देख लीजिए कि जिस चुनाव में EVM नहीं थी, जिस चुनाव में SIR नहीं था, जो चुनाव बैलेट पेपर से हुआ था, उस चुनाव में भी राहुल गांधी कुछ नहीं कर पाए. जबकि इस दौरान आप देखिए कि राहुल गांधी ने कितने हाथ पैर मारे. सड़क पर उतर कर मोदी के खिलाफ माहौल बनाया. 1 नवंबर को अपनी महारैली भी दिल्ली में करने जा रहे हैं. लेकिन माहौल बनाने से चुनाव नहीं जीते जाते. जमीन पर काम करना पड़ता है. और इस मामले में कांग्रेस निल बटे सन्नाटा दिख रही है.

आप देखिए कि 4 राज्यों में MLC चुनाव के जो नतीजे आए हैं. उसने कैसे राहुल गांधी और इंडी के वोट चोरी के नैरेटिव वाले गुब्बारे में छेद कर दिया है. चार राज्यों की 28 सीटों पर MLC चुनाव हुए. उसमें कांग्रेस पार्टी का स्कोर जीरो रहा, एक भी सीट नहीं जीत पाई. कर्नाटक जहां कांग्रेस की सरकार है वहां भी वो हार गई. कर्नाटक, बिहार, महाराष्ट्र में जो सीटें कांग्रेस के पास थी, वो सीट भी कांग्रेस ने गंवा दी.

12 सीटों पर लड़ी कांग्रेस, नतीजा शून्य

कांग्रेस का ये हाल तब हुआ है, जब ये लोग कह रहे थे कि बैलेट से चुनाव करा लो. लेकिन आप देखिए कि बैलेट से भी पब्लिक ने इन्हें रिजेक्ट कर दिया. कांग्रेस का हाल तो ये है कि कांग्रेस ने 4 राज्यों की 28 में से 12 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत पाई. कर्नाटक में जहां कांग्रेस की सरकार है वहां चारों सीटें कांग्रेस ने गंवा दी. कांग्रेस की सबसे बड़ी हार बैंगलुरु टीचर सीट पर हुई. इस सीट पर कांग्रेस के पांच बार के MLC और पूर्व डिप्टी चेयरमैन हार गए. कर्नाटक की चारों MLC सीटों पर बीजेपी-जेडीएस गठबंधन ने बाजी मार ली.

बिहार में भी कांग्रेस का बुरा हाल रहा, 5 सीट पर लड़ी एक भी नहीं जीती. बिहार में दरभंगा शिक्षक सीट पर कांग्रेस के MLC जनसुराज के कैंडिडेट से हार गए. इस सीट पर कांग्रेस के दिग्गज नेता मदन मोहन झा 324 वोट से हार गए. इस सीट पर RJD और CPM ने भी उम्मीदवार उतार थे. इसी लड़ाई में कांग्रेस हार गई. यानी इंडी वाले आपस में भिड़े और सीट गंवा दी.

ईवीएम-बैलेट पेपर वाला नैरेटिव फेल

महाराष्ट्र में भी MLC चुनाव के जो रूझान आ रहे हैं उसमें कांग्रेस पिछड़ रही है. और यूपी में कांग्रेस ने चुनाव नहीं लड़ा, वहां समाजवादी पार्टी का समर्थन किया. कांग्रेस का जिस तरह से बैलेट में भी सूपड़ा साफ हुआ, उसमें अब राहुल गांधी और दूसरे नेताओं के पुराने बयान याद आ रहे हैं, जिसमें ये लोग कहते थे कि EVM तो ब्लैक बॉक्स है, बैलेट से चुनाव कराओ.

खरगे ने कहा था, ‘ना, वो EVM छोड़ दो. हमको EVM-PVM कुछ नहीं चाहिए, हमको होना बैलेट पेपर पर वोट बस.’ वहीं प्रियंका ने कहा था, ‘मैं चुनौती देती हूं कि एक सही चुनाव बैलेट पेपर पर लड़ लें. ये खुद जानते हैं कि कभी नहीं जीत पाएंगे.’

पीएम मोदी ने कसा तंज

अब तो कांग्रेस के पास बैलेट वाला बहाना भी नहीं रहा. पूरा एजेंडा ही आज एक्सपोज हो गया. इसीलिए आप देखिए कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी खुलकर आ गए. पीएम ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि 4 बड़े राज्य..यूपी, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक की 28 सीटों पर MLC के चुनाव हुए. ये चुनाव बैलेट पेपर से हुए थे. आप अंदाजा लगाइए कांग्रेस कितनी सीटें जीती.’

पीएम मोदी ने इस सवाल के साथ ही कांग्रेस को चारों खाने चित कर दिया है. पीएम मोदी की सोशल मीडिया पोस्ट पर लोग जीरो लिख लिखकर रिप्लाई कर रहे हैं. लेकिन इतनी बुरी हार के बाद भी आप कांग्रेस नेताओं के तेवर देख लीजिए. कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के पीएम मोदी के पिता को लेकर दिए बयान ‘बाप भी जाएगा’ पर कहा, ‘हां, तो जाएगा…जैसी जुबान बोलेंगे, वैसी सुनेंगे.’

यानी इनके तेवर अब भी वही हैं. जबकि बार बार पब्लिक समझा रही है. खुद इनके सहयोगी समझा रहे हैं कि इस तरह की राजनीति से चुनाव नहीं जीते जाते. इसलिए कांग्रेस का मजाक भी उड़ रहा है. बीजेपी राहुल गांधी को घेर रही है. बीजेपी ने सोशल मीडिया पोस्ट में तंज करते हुए लिखा कि दुनिया को शून्य भारत ने दिया, और उस शून्य को राजनीति में सबसे ज्यादा कांग्रेस और राहुल गांधी ने अपनाया!

बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे कह रहे हैं कि क्या राहुल गांधी जी को लोगों ने 1 नवंबर की रैली के पहले इम्पीच कर दिया?…बीजेपी कह रही है कि जनसमर्थन मेहनत करने से मिलता है. सैर सपाटे से नहीं. बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा , ‘जो व्यक्ति मतिभ्रम का शिकार हो, जिसकी मति मारी गई हो, उसके लिए आप मतपत्रों से मतदान करा दीजिए, तो भी वो चारों खाने चित ही नजर आएगा. उन्हें यह बात भली-भांति समझनी चाहिए कि आप जो कुछ भी करने का प्रयास कर रहे हैं, हकीकत यह है कि आप पूरी तरह से नाकाम और नाकारा सिद्ध हो गए.

हार मानने को तैयार नहीं कांग्रेस नेता

EVM से लेकर वोट चोरी तक कांग्रेस का सारा नैरेटिव पस्त हो गया. लेकिन कांग्रेस के नेता अब भी अपनी हार मानने को तैयार नहीं है. अभी भी हार को छिपाने के लिए तरह तरह के बहाने बना रहे हैं. कोई कह रहा है कि सारे ही चुनाव चोरी हो रहे हैं, कोई पीएम मोदी को चुनौती दे रहा है कि आने वाले पांच राज्यों के चुनाव और 2029 का चुनाव बैलेट से करवा लें.

कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी कह रहे हैं कि जिसकी सरकार होती है उसका MLC चुनाव होता है.. तो फिर सवाल है कि कर्नाटक में कांग्रेस क्यों हार गई. आप सोचिए कांग्रेस के नेता अपनी शर्मनाक हार को भी डिफेंड करने में लगे हैं. जैसे ये लोग कांग्रेस अध्यक्ष के विवादित बयान को डिफेंड कर रहे थे.

कांग्रेस को सुननी चाहिए अपने इन नेताओं की बात

लेकिन कांग्रेस नेताओं को अपने ही नेताओं को सुन लेना चाहिए. बिहार में कांग्रेस के सांसद मनोज कुमार आरोप लगा रहे हैं कि MLC चुनाव को लेकर पार्टी ने कोई बात नहीं की. कोई चुनाव प्रचार नहीं करवाया.

मनोज कुमार ने कहा, ‘एक बार फिर से बहुत बड़ा मिस्टेक हुआ है. जब-जब चुनाव आता है, पता नहीं कौन सा पहाड़ टूट जाता है. मतलब हम लोग मेंबर ऑफ पार्लियामेंट तीन थे, कांग्रेस पार्टी के. एक बात नहीं की गई, पता ही नहीं चलता है कि क्या… मतलब कहाँ से, कैसे होता है? अरे हम लोग जाते, तो मैं दलित समाज से आता हूँ. मैं उदाहरण बता रहा हूँ, मैं दलित समाज से आता हूँ. और मैं दलित शिक्षकों के पास जाता तो प्रभाव पड़ता कि नहीं पड़ता कि अपना सांसद आया है लेकिन पता नहीं न कोई टच किया चुनाव प्रचार में… मुझे लगता है इन सब चीजों में सुधार करना चाहिए.’

अखिलेश प्रसाद सिंह ने भी कहा, ‘जो आप बोल रहे हैं सही है. अच्छा नहीं हुआ है प्रदर्शन और प्रत्याशी भी कुछ अच्छे नहीं चुने गए. इसी वजह से हार हुई.’

यूपी में सपा-भाजपा में कांटे की टक्कर

आप ये भी देखिए कि यूपी में भी जो कांग्रेस विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में 200 सीटों पर दावेदारी ठोक रही है. MLC चुनाव में उसका कहीं भी नामो निशान नजर नहीं आ रहा है. जबकि बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली है. बीजेपी के खाते में 11 में 6, जबकि समाजवादी पार्टी के खाते में 5 सीटें आती दिख रही हैं.

यूपी में 11 सीटों पर हुए MLC चुनावों पर नजर डालें तो, – गोरखपुर शिक्षक सीट पर कांटे के मुकाबले में बीजेपी के ध्रुव त्रिपाठी जीत गए हैं. वाराणसी शिक्षक सीट पर समाजवादी पार्टी के लाल बिहारी यादव जीते हैं. लखनऊ शिक्षक सीट पर बीजेपी के उमेश द्विवेदी ने जीत दर्ज की. मेरठ-सहारनपुर शिक्षक सीट पर बीजेपी के श्रीचंद शर्मा को जीत मिली है. मेरठ-सहारनपुर स्नातक सीट पर बीजेपी के दिनेश गोयल जीते हैं. बरेली-मुरादाबाद शिक्षक सीट पर बीजेपी के हरि सिंह ढिल्लो ने बाजी मारी है. आगरा शिक्षक सीट समाजवादी पार्टी के आकाश अग्रवाल ने अपने नाम की है. आगरा स्नातक सीट पर बीजेपी के मानवेंद्र प्रताप सिंह जीते हैं. इलाहाबाद-झांसी स्नातक सीट से समाजवादी पार्टी के मान सिंह यादव ने जीत दर्ज की है. वाराणसी में स्नातक एमएलसी सीट पर समाजवादी पार्टी के कैंडिडेट ने बढ़त बनाई हुई है. लखनऊ स्नातक सीट पर समाजवादी पार्टी की कैंडिडेट कांति सिंह आगे चल रही हैं.’

यूपी में 11 सीटों पर हुए विधान परिषद चुनाव को अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल कहा जा रहा है. इसीलिए वोटों की गिनती के दौरान जबरदस्त तनाव भी देखने को मिल रहा है. बवाल की वजह से कई सीटों पर काउंटिंग बार बार रुक रही है. इस बवाल के बीच बीजेपी और समाजवादी पार्टी इन चुनाव के नतीजों को अपनी अपनी जीत बता रही हैं.

अखिलेश का बीजेपी पर कटाक्ष

यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक दावा कर रहे हैं कि बीजेपी ने अपनी सभी सीटें बचाई हैं. वहीं डिप्टी सीएम केशव प्रसाद ने वाराणसी सीट पर हुई हार को लेकर माना है कि समाजवादी पार्टी का खाता वहां खुला, जहां नहीं खुलना था. मौर्य ने कहा, ‘हम लोग और अधिक सीटें जीतने की अपेक्षा कर रहे थे, उतनी सीटें नहीं मिल पाई हैं, इनको भी देखेंगे. सपा का जो खाता जहां खुल गया, जहां नहीं खुलना चाहिए था वो विचार करेंगे… आगे जब चुनाव होंगे, तो भाजपा फिर से जीते, इसकी कोशिश करेंगे.’

डिप्टी सीएम केशव प्रसाद के बयान पर अखिलेश यादव ने भी चुटकी ली. उन्होंने यूपी में MLC चुनावों के नतीजों पर ट्वीट किया. “दरअसल PDA की जीत पर ये भी अंदर ही अंदर ख़ुश हैं, घर छोड़ देने से कोई पराया नहीं हो जाता है. अगर षडयंत्रकारी भाजपाइयों ने गोरखपुर में घोड़े की ढाई चाल न चली होती तो वहां भी बनारस वाला हाल होता. कुल मिलाकर तो गोरखपुर भी भाजपा नैतिक रूप से हार ही गई है.’

आगे अखिलेश यादव ने लिखा, ‘MLC चुनावों ने भाजपा का बोरिया बिस्तर बांध दिया है. घोर बेईमानी और प्रशासनिक हेराफेरी के बावजूद भी भाजपा की दुर्गति कोई नहीं रोक पाया. जिन भ्रष्ट अधिकारियों ने भाजपा की चाकरी की है, उन सबको PDA सरकार आने पर जनता के कटघरे में खड़ा किया जाएगा.’

बिहार में बीजेपी की बड़ी जीत

उधर बिहार में 8 सीटों पर हुए MLC चुनाव में बीजेपी ने सबसे ज्यादा सीटें जीती हैं. यहां भी कांग्रेस का सूपड़ा फिर साफ हो गया है. यहां भी कांग्रेस के खाते में निल बट्टा सन्नाटा नजर आ रहा है. बिहार में विधान परिषद चुनाव के नतीजे देखें तो 8 सीटों पर हुए चुनाव में बीजेपी ने सबसे ज्यादा 3 और JDU ने एक सीट पर चुनाव जीता है. इस तरह NDA के खाते में 4 सीट आई हैं. एक सीट पर RJD को जीत मिली है. वहीं जन सुराज पार्टी ने भी कांग्रेस को हराकर एक सीट पर जीत दर्ज की है. दो सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार जीते हैं, जबकि कांग्रेस यहां भी खाता खोलने में नाकाम रही है.

बिहार में हुए MLC चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा पटना स्नातक सीट की हो रही है. इस सीट पर मोकामा से JDU के बाहुबली विधायक अनंत सिंह ने बगावत की थी. उन्होंने JDU कैंडिडेट नीरज कुमार का खुला विरोध किया और जनसुराज पार्टी के कैंडिडेट अनुज सिंह का समर्थन किया. जिसके लिए अनंत सिंह को JDU से सस्पेंड भी कर दिया गया है.

और जब नतीजों में JDU कैंडिडेट नीरज कुमार की जीत का ऐलान हुआ. तो उन्होंने अनंत सिंह को निशाने पर लिया. और कहा कि जनबल और कार्यकर्ता बल के दम पर उन्होंने धनबल और बाहुबल को झुका दिया. उन्होंने अनंत सिंह के घर पर बन रही मिठाइयों पर भी तंज किया. वहीं अनंत सिंह ने जीत पर नीरज कुमार को बधाई देने से साफ इनकार कर दिया.

क्यों चर्चा में पटना शिक्षक सीट?

इस चुनाव में पटना शिक्षक सीट की भी बहुत चर्चा हो रही है, क्योंकि इस सीट पर RJD ने करीब ढाई दशक से MLC रहे BJP के नवल किशोर को हरा दिया. RJD से डॉक्टर संजीव कुमार सिंह में जीत दर्ज की. RJD की जीत पर प्रवक्ता प्रियंका भारती ने कहा कि, ‘MLC चुनाव इस बात का प्रमाण है की BJP के लिए EVM ही जादू का पिटारा है. पिटारा खुलते ही एकतरफा BJP. वहीं बैलट से चुनाव हो और ज्ञानू की ना चले तो मोदी ख़ुद अपनी सीट भी नहीं बचा पाएंगे.’

यानी RJD प्रवक्ता ये दावा किया कि बैलेट से चुनाव होते ही खेल पलट गया है. बीजेपी तो EVM के भरोसे जीतती है, लेकिन RJD प्रवक्ता ये नहीं बता पाईं कि फिर बिहार में इंडी गठबंधन सभी MLC की सीट क्यों नहीं जीत पाया. दूसरी तरफ तेजस्वी यादव MLC चुनाव में भी धांधली के आरोप लगा रहे हैं. क्योंकि उन्हें पता है कि अगर ये सब नहीं कहेंगे तो फिर 1 नवंबर की रैली में मंच पर क्या माहौल बनाएंगे.

1 नवंबर की रैली पर अड़ी कांग्रेस

MLC चुनाव के नतीजे तो पूरा देश देख रहा है, लेकिन कांग्रेस और राहुल गांधी अपनी अलग ही दुनिया में हैं. एक सीट भी जीत नहीं पा रहे लेकिन माहौल बनाने में कोई कमी नहीं है. आप देखिए कि दिल्ली में 1 नवंबर की रैली के लिए कांग्रेस अड़ी हुई है. जबकि व्यापारियों से फिर से राहुल गांधी को ओपन लेटर लिखा है. 20 बड़े होलसेल मार्केट के व्यापारी डेलिगेशन ने राहुल से मुलाकात के लिए 20 मिनट का समय मांगा है. पत्र में लिखा है कि अगर 20 मिनट की मुलाकात में राहुल गांधी व्यापारियों को ये समझा देंगे कि 10 लाख लोगों की रैली से कारोबार में फायदा होगा. का व्यापार बढ़ेगा. ग्राहक बढ़ेंगे. तो उसी वक्त चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री यानी CTI अपना विरोध वापस ले लेगा. और अगर राहुल फेल हो गए. उल्टे 20 मिनट में व्यापारी राहुल गांधी को ये समझाने में सफल हो गए कि रैली से व्यापार में कितना नुकसान होगा. तो राहुल गांधी को अपनी रैली दिवाली तक टालनी पड़ेगी. CTI का कहना है कि वो लड़ाई नहीं, बातचीत चाहते हैं.

पत्र में ये भी लिखा कि राहुल गांधी नफरत के बाजार में मोहब्बत की दुकान खोलने की बात करते हैं तो फिर दिवाली के बाजार में मोहब्बत की दुकान बंद मत करवाइए. एक ओर व्यापारी दीपावली और धनतेरस को लेकर रैली पोस्टपोन करने की बात कह रहे. दूसरी ओर कांग्रेस रैली के फायदे गिनवा रही. कह रही कि क्या गजब ही हो जाएगा. 10 लाख लोग आएंगे तो होटल में रुकेंगे. समोसे-पकोड़े खाएंगे. खरीदारी करेंगे तो कारोबार बढ़ेगा. नुकसान नहीं होगा.

कांग्रेस अलग ही गणित समझा रही. उधर व्यापारी कह रहे कि हम पिछली बार देख चुके हैं. दिल्ली में डेली डेली प्रोटेस्ट में हजारों करोड़ का नुकसान पहले ही हो चुका है. भाई दूज, दिवाली, धनतेरस जैसा बड़ा त्योहार आ रहा है. शादी-ब्याह का सीजन आने वाला है. यही सब चलता रहा तो कारोबार ही ठप पड़ जाएगा.

बीजेपी ने दिल्ली में निकाला काउंटर मार्च

इन सब के बीच बीजेपी ने अब काउंटर अटैक शुरू कर दिया है. विपक्ष के विरोध के जवाब में बीजेपी ने आज दिल्ली में चांदनी चौक पर ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ मार्च निकाला. BJP अध्यक्ष नितिन नवीन के नेतृत्व में काफी भीड़ जुटी. कई लोग इकट्ठा हो गए. दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता समेत बीजेपी के कई बड़े नेता भी इस पदयात्रा में शामिल हुए. लेकिन इस दौरान चांदनी चौक की दुकानें खुली रहीं. ये बीजेपी का दावा है. बीजेपी कह रही कि यह एक सांकेतिक मार्च था. किसी व्यापारी को मार्च से कोई दिक्कत नहीं हुई. पूरा मार्केट खुला था. बिजनेस चल रहा था. किसी दुकानदार को कोई परेशानी हुई ही नहीं. बीजेपी कह रही कि हम किसी का नुकसान नहीं पहुंचाएंगे. इंडी वालों की तरह सड़क पर माहौल नहीं खराब करेंगे. एक नवंबर को विपक्ष की रैली के विरोध में बीजेपी मौन यात्रा भी निकालेगी.

आज चांदनी चौक पर मार्च के दौरान बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधा. रिजीम चेंज वाले बयान पर कहा कि ये लोग चिल्लाते रह जाएंगे. पीएम मोदी अगले साल भी लालकिले पर तिरंगा फहराते दिखेंगे. राहुल के चक्कर में एकदिन कांग्रेस पार्टी ही समाप्त हो जाएगी.

उधर, कॉकरोच पार्टी वालों को देखिए. ये पीस बॉन्ड भरकर जेल से रिहा हुए थे. कोर्ट में माफीनामा और पीस बॉन्ड भरने के बाद ये एकदम शांत पड़ गए थे. अब ये इंडी वालों की रैली में इन्टरेस्ट दिखा रहे हैं. कॉकरोच पार्टी वालों ने एक नवंबर को होने वाली रैली का समर्थन किया है. अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि कॉकरोच जनता पार्टी ने रैली को अपना समर्थन दिया है.

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