Dharohar: दिखने में अलमारी,अंदर छिपा है 80 साल पुराना म्यूजिक सिस्टम,हैदराबाद में आज भी है 80 साल पुराना ग्रामोफोन

Dharohar: दिखने में अलमारी,अंदर छिपा है 80 साल पुराना म्यूजिक सिस्टम,हैदराबाद में आज भी है 80 साल पुराना ग्रामोफोन

Dharohar: हैदराबाद में 1940 के दशक का एक दुर्लभ ग्रामोफोन आज भी चालू हालत में मौजूद है. शीशम की नक्काशीदार लकड़ी से बने इस साढ़े तीन फीट ऊंचे ग्रामोफोन में निजाम से जुड़ी ऐतिहासिक तस्वीर भी लगी है. बिना बिजली और बैटरी के चलने वाला यह विंटेज प्लेयर 78 RPM रिकॉर्ड के जरिए आज भी पुराने संगीत की मधुर धुनें सुनाता है.

हैदराबाद. आज के आधुनिक डिजिटल युग में जहां लोग अपने स्मार्टफोन या छोटे ब्लूटूथ स्पीकर पर एक क्लिक में लाखों गाने सुन लेते हैं, वहीं पुराने दौर का संगीत सुनने का अंदाज बेहद खास और शाही हुआ करता था. 1940 के दशक का एक बेहद दुर्लभ और विशाल कैबिनेट ग्रामोफोन आज भी अपने मूल स्वरूप में पूरी तरह चालू हालत में मौजूद है. यह ग्रामोफोन न केवल उस दौर की बेहतरीन इंजीनियरिंग की मिसाल है बल्कि हैदराबाद के समृद्ध इतिहास और संगीत संस्कृति की एक अनमोल धरोहर भी है.

साढ़े तीन फीट ऊंचा यह ग्रामोफोन प्रीमियम शीशम की लकड़ी की नक्काशीदार अलमारी यानी कैबिनेट के भीतर तैयार किया गया है. पुराने दौर में इस तरह के कैबिनेट ग्रामोफोन केवल शाही परिवारों या संपन्न घरों की शोभा हुआ करते थे, इसकी खासियत यह है कि इसमें ऊपर कोई बड़ा पीतल का हॉर्न बाहर नहीं दिखता, बल्कि कैबिनेट के अंदर ही साउंड बॉक्स और हॉर्न को लकड़ी के जालीदार डिजाइन के पीछे खूबसूरती से छिपाया गया है. सामने की तरफ ब्रास के मजबूत लॉक लगे हैं जो इसे एक एंटीक अलमारी जैसा लुक देते हैं.

आज भी जिंदा रखे हुए है 80 साल पुरानी धुनों को 

जब इस कैबिनेट के ऊपरी हिस्से का ढक्कन खोला जाता है, तो अंदर टर्नटेबल के ठीक सामने ढक्कन पर हैदराबाद के निज़ाम से जुड़ी एक दुर्लभ ऐतिहासिक तस्वीर नजर आती है. इस तस्वीर पर अंग्रेजी और उर्दू में लिखा है— An address was presented to the Nizam on his return from Delhi. यह तस्वीर इस विंटेज प्लेयर को सीधे हैदराबाद के आसफ जाही दौर और दिल्ली से वापसी के ऐतिहासिक पलों से जोड़ती है.

यह विंटेज प्लेयर बिजली या बैटरी से नहीं, बल्कि पूरी तरह मैकेनिकल सिस्टम पर चलता है. इसके साइड में एक हैंडल दिया गया है जिसे हाथ से घुमाकर चाबी भरी जाती है. इसके बाद गियर ऑन करते ही 78 आरपीएम का विनाइल रिकॉर्ड घूमने लगता है. ग्रामोफोन की सुई जब हिज मास्टर्स वॉयस के ब्लैक रिकॉर्ड पर पड़ती है, तो लकड़ी के कैबिनेट से निकलने वाली सुरीली आवाज सीधे 80 साल पुराने दौर की याद ताजा कर देती है. ऐतिहासिक विरासत और पुरानी धुनों को सहेजने वाले लोगों के लिए यह कैबिनेट ग्रामोफोन आज भी एक नायाब खजाना बना हुआ है.

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