IAF के लिए 150 नए एडवांस्ड जेट ट्रेनर विमानों की तैयारी; ₹15,000 करोड़ की डील, HAL को मिल सकता है बड़ा ऑर्डर

नई दिल्ली:

भारतीय वायु सेना (IAF) अपने लड़ाकू पायलटों के प्रशिक्षण ढांचे को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है. सूत्रों के अनुसार वायु सेना ने करीब 150 नए एडवांस्ड जेट ट्रेनर विमानों की खरीद प्रक्रिया शुरू कर दी है. इसके लिए रक्षा मंत्रालय ने Request for Information (RFI) जारी की है. ये विमान मौजूदा Hawk Mk-132 ट्रेनर विमानों की जगह लेंगे और भविष्य के फाइटर पायलटों को राफेल, तेजस, सुखोई-30 एमकेआई और आने वाले एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) जैसे अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों के संचालन के लिए तैयार करेंगे. माना जा रहा है कि यह सौदा करीब 15,000 करोड़ रुपये का हो सकता है और इससे भारत के स्वदेशी रक्षा विमानन क्षेत्र को भी नई गति मिलेगी.

शुरू हुई नए ट्रेनर विमान की तलाश

सूत्रों के मुताबिक भारतीय वायु सेना ने अगली पीढ़ी के स्टेज-III (F) ट्रेनर विमानों के लिए आरएफआई जारी कर दी है. यह प्रशिक्षण की अंतिम कड़ी होगी, जिसके बाद प्रशिक्षु पायलट सीधे ऑपरेशनल फाइटर स्क्वाड्रनों में शामिल होंगे. इन विमानों का उपयोग युवा पायलटों को एयरबोर्न रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और बियॉन्ड-विजुअल-रेंज मिसाइलों जैसे आधुनिक युद्धक प्रणालियों का प्रशिक्षण देने के लिए किया जाएगा.

Defence Deal: एचएएल का विमान
Photo Credit: HAL

HAL को मिल सकता है बड़ा लाभ

सूत्रों का कहना है कि इस प्रक्रिया से हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को बड़ा फायदा मिल सकता है. HAL का स्वदेशी HTT-40 ट्रेनर विमान पहले से भारतीय वायु सेना में शामिल है. सरकार की “Buy Indian” नीति और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के प्रयासों के बीच भारतीय कंपनियों को इस परियोजना में महत्वपूर्ण अवसर मिलने की संभावना जताई जा रही है. माना जा रहा है कि 150 विमानों की डील भारतीय एयरोस्पेस उद्योग के लिए बड़ी उपलब्धि साबित हो सकती है.

आधुनिक तकनीकों से लैस होंगे ट्रेनर

वायु सेना ने नए ट्रेनर के लिए कई उन्नत तकनीकी क्षमताएं निर्धारित की हैं. आरएफआई के अनुसार इन विमानों में फ्लाई-बाय-वायर कंट्रोल सिस्टम, ग्लास कॉकपिट, कॉन्फिगरेबल हैंड्स-ऑन-थ्रॉटल-एंड-स्टिक (HOTAS) सिस्टम और नेविगेशन के लिए NavIC, GPS तथा GLONASS आधारित तकनीक होनी चाहिए. इसके अलावा विमानों में ‘जीरो-जीरो इजेक्शन सीट’ भी अनिवार्य होगी, जिससे पायलट बेहद कम ऊंचाई और शून्य गति की स्थिति में भी सुरक्षित बाहर निकल सकें.

सुरक्षा और प्रशिक्षण पर विशेष फोकस

IAF चाहती है कि नया ट्रेनर विमान केवल उड़ान प्रशिक्षण तक सीमित न रहे, बल्कि आधुनिक युद्धक परिस्थितियों का वास्तविक अनुभव भी दे सके. आरएफआई में यह भी कहा गया है कि विमान ऐसी क्षमता वाला हो जो नियंत्रण खोने की स्थिति में स्वतः स्थिर उड़ान में लौट सके. इससे प्रशिक्षु पायलटों को सुरक्षित वातावरण में जटिल परिस्थितियों से निपटने का अनुभव मिलेगा.

वैश्विक और भारतीय कंपनियां ले सकेंगी हिस्सा

इस परियोजना के लिए भारतीय और विदेशी दोनों विमान निर्माता कंपनियों को जानकारी देने के लिए आमंत्रित किया गया है. आरएफआई प्रक्रिया के बाद अगला चरण Request for Proposal (RFP) होगा, जिसमें इच्छुक कंपनियां अपनी तकनीकी और व्यावसायिक पेशकश प्रस्तुत करेंगी. सूत्रों के अनुसार अनुबंध पर अगले 12 से 16 महीनों के भीतर प्रगति देखने को मिल सकती है, हालांकि अंतिम खरीद प्रक्रिया विभिन्न परीक्षणों और मूल्यांकन पर निर्भर करेगी.

स्वदेशी रक्षा उत्पादन को मिलेगा बल

रक्षा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यह परियोजना भारत की आत्मनिर्भर रक्षा नीति के लिए अहम साबित हो सकती है. वायु सेना ने भी खरीद के लिए “Buy (Indian) or better” श्रेणी को प्राथमिकता दी है. साथ ही कंपनियों से तकनीक हस्तांतरण (Technology Transfer) और स्वदेशी सामग्री के स्तर की जानकारी भी मांगी गई है. इस कदम से न केवल भारतीय वायु सेना की प्रशिक्षण क्षमता मजबूत होगी, बल्कि देश में उन्नत विमान निर्माण और रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को भी नई गति मिलेगी.

भविष्य के फाइटर पायलटों की तैयारी

आने वाले वर्षों में भारतीय वायु सेना के बेड़े में तेजस के नए संस्करण, राफेल और AMCA जैसे उन्नत लड़ाकू विमान शामिल होंगे. ऐसे में इन विमानों को उड़ाने वाले पायलटों के लिए अत्याधुनिक प्रशिक्षण प्रणाली की आवश्यकता और बढ़ गई है. यही वजह है कि वायु सेना अब ऐसे ट्रेनर प्लेटफॉर्म की तलाश में है जो भविष्य की युद्धक चुनौतियों के अनुरूप पायलटों को तैयार कर सके. 150 नए ट्रेनर विमानों की यह परियोजना उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.



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