गणपति विसर्जन से पहले बदला तरीका, जलस्रोतों को प्रदूषण से बचाने के लिए तैयार किया कृत्रिम तालाब, जानें पूरी पहल

गणपति विसर्जन से पहले बदला तरीका, जलस्रोतों को प्रदूषण से बचाने के लिए तैयार किया कृत्रिम तालाब, जानें पूरी पहल

Jodhpur Ganesh Visarjan: गणपति बप्पा के विसर्जन को लेकर जोधपुर में पहली बार अनोखी पहल की गई है. प्राकृतिक जलस्रोतों को बचाने और विसर्जन के दौरान पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने के उद्देश्य से दशहरा मैदान में कृत्रिम तालाब तैयार किया गया है. यहां गणपति प्रतिमाओं का विसर्जन कराया जाएगा. इस पहल से प्राकृतिक जलस्रोतों को सुरक्षित रखने के साथ श्रद्धालुओं को पर्यावरण के अनुकूल विसर्जन का विकल्प उपलब्ध कराने की कोशिश की गई है.

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जोधपुर: जोधपुर में गणपति बप्पा के विसर्जन को लेकर खास पहल, प्राकृतिक जलस्रोतों को प्रदूषण से बचाने के लिए दशहरा मैदान, 16 सेक्टर हाउसिंग बोर्ड में कृत्रिम तालाब तैयार किया गया है. नगर निगम और सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से बने इस तालाब में श्रद्धालु गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन कर सकेंगे. पर्यावरण प्रेमी पंडित जीवराज श्रीमाली ने कायलाना झील सहित अन्य प्राकृतिक जलस्रोतों में विसर्जन नहीं करने की अपील की है. साथ ही प्रतिमाओं के साथ आने वाले कपड़े, चुनरी और प्लास्टिक सामग्री अलग जमा कर पुनर्चक्रण की व्यवस्था की जाएगी.

इस पहल का उद्देश्य गणपति विसर्जन की परंपरा को बनाए रखते हुए शहर के प्राकृतिक जलस्रोतों को प्रदूषण से बचाना है। नगर निगम जोधपुर के सहयोग और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं की भागीदारी से तैयार किए गए कृत्रिम तालाब में श्रद्धालु पर्यावरण अनुकूल तरीके से गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन कर सकेंगे.पर्यावरण प्रेमी एवं नगर निगम के ब्रांड एंबेसडर पंडित जीवराज श्रीमाली के नेतृत्व में इस अभियान को आगे बढ़ाया जा रहा है। समिति ने शहरवासियों से अपील की है कि वे श्रद्धा के साथ पर्यावरण की जिम्मेदारी भी निभाएं और प्राकृतिक जलस्रोतों के बजाय निर्धारित कृत्रिम तालाब में ही प्रतिमाओं का विसर्जन करें.

120 दिन से कायलाना की सफाई का अभियान
समिति के अनुसार कायलाना झील की स्वच्छता को लेकर पिछले करीब 120 दिनों से लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान झील से बड़ी मात्रा में प्लास्टिक, थैलियां, कपड़े और अन्य कचरा बाहर निकाला गया है. ऐसे में गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन से झील में प्रदूषण और बढ़ने की आशंका को देखते हुए श्रद्धालुओं से कृत्रिम तालाब का उपयोग करने की अपील की गई है. समिति का कहना है कि जलस्रोतों को स्वच्छ रखना केवल प्रशासन की नहीं, बल्कि शहर के प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है.

पूजा सामग्री के लिए भी होगी अलग व्यवस्था
पंडित जीवराज श्रीमाली ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि प्रतिमा के साथ आने वाले वस्त्र, चुनरी और प्लास्टिक की सजावटी सामग्री को विसर्जन स्थल पर मौजूद टीम को सौंपें. इन सामग्रियों को अलग-अलग एकत्र कर पुनर्चक्रण और पुनः उपयोग के लिए भेजा जाएगा। समिति ने मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमाओं को प्राथमिकता देने का भी आग्रह किया है. वहीं पीओपी या रासायनिक रंगों वाली प्रतिमाओं को भी कृत्रिम तालाब में स्वीकार किया जाएगा, ताकि प्राकृतिक जलस्रोतों में उनका विसर्जन न हो.

कई संस्थाएं अभियान में दे रही सहयोग
गणपति विसर्जन को पर्यावरण अनुकूल बनाने के इस अभियान में नगर निगम के साथ उत्थान ग्रुप फाउंडेशन, गुरुद्वारा गुरु सिंह सभा, ग्रीन एनवायरमेंट सोसाइटी, रॉबिनहुड आर्मी, महादेव व्यायामशाला और नंदनवन मयूर सेवा समिति सहित कई संस्थाएं सहयोग कर रही हैं. अभियान के जरिए शहरवासियों से अपील की जा रही है कि गणपति बप्पा को विदाई देते समय आस्था के साथ प्रकृति का भी ध्यान रखें और प्राकृतिक जलस्रोतों को स्वच्छ बनाए रखने में अपनी भूमिका निभाएं.

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