पहले जज को मिली बेल, फिर बेटे को कोर्ट से बड़ी राहत; हिट एंड रन केस में कांग्रेस सरकार के दावे फुस्‍स

पहले जज को मिली बेल, फिर बेटे को कोर्ट से बड़ी राहत; हिट एंड रन केस में कांग्रेस सरकार के दावे फुस्‍स

कोच्चि के चेरानाल्लूर में हुए दर्दनाक मर्सिडीज-बेंज कार हादसे मामले में अदालत ने 17 वर्षीय नाबालिग आरोपी की जमानत रद्द करने की मांग वाली याचिकाएं खारिज कर दी हैं. आरोपी एडिशनल डिस्ट्रिक्ट सेशंस जज का बेटा है. पुलिस और पीड़ित परिवार दोनों ने जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड द्वारा दी गई बेल को चुनौती दी थी. अदालत के इस फैसले से दुखी पीड़ित परिवार ने न्याय प्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं. इससे पहले नाबालिग के जज पिता को भी हाईकोर्ट से एंटीसिपेटरी जमानत मिल गई.

केरल के कोच्चि में हुए हाई-प्रोफाइल मर्सिडीज-बेंज कार क्रैश मामले में एक बड़ा अपडेट सामने आया है. अदालत ने 17 वर्षीय आरोपी नाबालिग की जमानत रद्द करने की मांग वाली याचिकाओं को पूरी तरह खारिज कर दिया है. आरोपी कोई मामूली लड़का नहीं बल्कि एक एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस कोर्ट के जज का बेटा है. कोर्ट के इस फैसले के बाद नाबालिग की बेल बरकरार रहेगी, जिससे मामले में नया मोड़ आ गया है. अतिरिक्त जिला अदालत की जज कविता गंगाधरन ने जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (JJB) के बेल ऑर्डर को चुनौती देने वाली अपीलों पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया. याचिकाएं केरल पुलिस और हादसे में मारे गए 55 वर्षीय स्कूटर सवार जयाबालकृष्णन के परिवार द्वारा दाखिल की गई थीं. सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस से सवाल किया था कि क्या नाबालिगों के सड़क हादसों में बीएनएस की धारा 105 पहले भी लगाई गई है, जिस पर पुलिस ने 9 मामलों की जानकारी दी थी.

कंटेनर रोड पर हुआ था खौफनाक हादसा
यह पूरी घटना 25 अक्टूबर की सुबह चेरानाल्लूर के मराप्परम्बू के पास कंटेनर रोड पर हुई थी. आरोप है कि जज का नाबालिग बेटा तेज रफ्तार मर्सिडीज-बेंज कार चला रहा था और उसने जयबालकृष्णन की स्कूटर को जोरदार टक्कर मार दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई. शुरुआती ढिलाई के बाद पुलिस ने बीएनएस की धारा 105 (गैर-इरादतन हत्या) जोड़ी और नाबालिग के जज पिता को भी मामले में आरोपी बनाया.

हाईकोर्ट से जज पिता को मिली अग्रिम जमानत
कानूनी दांवपेंच का ड्रामा यहीं खत्म नहीं हुआ. एक तरफ जहां निचली अदालत ने नाबालिग की बेल रद्द करने से मना कर दिया, वहीं दूसरी तरफ केरल हाईकोर्ट ने आरोपी नाबालिग के जज पिता को भी अग्रिम जमानत दे दी है. इस मामले में पुलिस की शुरुआती भूमिका से लेकर अदालती फैसलों तक पर काफी विवाद खड़ा हो रहा है.

पीड़ित परिवार का छलका दर्द
अदालत के फैसले से पीड़ित परिवार में भारी मायूसी और गुस्सा है. मृतक की बेटी भद्रकीर्ति ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “यह सब एक ड्रामे जैसा लग रहा है. जिस तरह के आदेश दोनों अदालतों से आ रहे हैं, उससे न्याय प्रणाली पर आम जनता का भरोसा टूट गया है.” हालांकि, परिवार ने साफ कर दिया है कि वे इस कानूनी लड़ाई से पीछे हटने वाले नहीं हैं और ऊपरी अदालत तक लड़ाई जारी रखेंगे.

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