UGC नियमों के खिलाफ याचिका पर CJI बोले, 'नीति ऐसी होनी चाहिए जिससे…', केंद्र ने क्या कहा?
Raisina News Desk- नवंबर 05, 2026 04:03 PM IST
यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टल गई है. केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया कि नियमों को लेकर छात्रों की चिंताओं और आपत्तियों पर नए सिरे से विचार किया जा रहा है.
सरकार इन नियमों की समीक्षा के लिए एक कमिटी गठित करने पर भी विचार कर रही है, ताकि किसी भी वर्ग के छात्रों में असंतोष या भेदभाव की आशंका न रहे.
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि सरकार इस मामले को देख रही है. इस पर चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने कहा, “ऐसी नीति बनाई जानी चाहिए, जिससे सभी युवा संतुष्ट महसूस करें. किसी भी वर्ग के छात्र को यह नहीं लगना चाहिए कि उनके साथ गलत हो रहा है.”
क्या है मामला?
यूजीसी ने 13 जनवरी को उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने और समानता को बढ़ावा देने के लिए नए नियम नोटिफाई किए थे. इन नियमों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गई थीं.
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि नए नियमों में केवल एससी-एसटी और ओबीसी वर्ग के खिलाफ होने वाले भेदभाव का जिक्र है. सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ होने वाले जातिगत भेदभाव को इसमें शामिल नहीं किया गया है. इसके अलावा, झूठी शिकायत करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का भी कोई प्रावधान नहीं है.
सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी रोक
सुप्रीम कोर्ट ने 29 जनवरी को इन नए नियमों पर रोक लगा दी थी. चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा था कि पहली नजर में नियम समाज में विभेद पैदा करने वाले लगते हैं और इनके दुरुपयोग की आशंका है. कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्ति का इस्तेमाल करते हुए कहा था कि फिलहाल 2012 के UGC नियम ही लागू रहेंगे.
उस समय कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि आजादी के 75 साल बाद देश जातिरहित समाज की दिशा में आगे बढ़ रहा है. ऐसे में कॉलेज कैंपस में जातीय विवाद बढ़ने से समाज किस दिशा में जाएगा, इस पर विचार करना जरूरी है. कोर्ट ने कहा था कि नीति ऐसी होनी चाहिए जो समाज की एकता को मजबूत करे.